रोडवेज, मंत्रालय कर्मियों के बाद अब DIPR के PRO भी स्ट्राइक पर

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- Advertisement - dr. rajvendra chaudhary

जयपुर।

राजस्थान में करीब 2 माह बाद होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्य के अधिकांश सरकारी कर्मचारी हड़ताल पर हैं। राज्य का सबसे बड़ा महकमा, शिक्षा विभाग ही अभी इस हड़ताल से अछूता है।

राजस्थान की 4500 रोडवेज बसों के पहिए थमे हुए आज 17 दिन बीत चुके हैं। इसके अलावा मंत्रालय कर्मचारी भी हड़ताल पर हैं। आज से सरकार के तमाम विकास कार्यों को लेकर प्रचार प्रसार का जिम्मा संभालने वाले सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के पीआरओ भी कल से सामूहिक अवकाश पर चले गए हैं।

पब्लिक रिलेशन्स एंड एलाइड सर्विसेज एसोसिएशन ऑफ राजस्थान (प्रसार) के आह्वान पर जनसम्पर्क विभाग में विभिन्न सेवाओं के पूरे राजस्थान के अधिकारियों एवं कर्मियों ने गुरुवार से सामूहिक अवकाश पर जाने की घोषणा की है।

प्रसार के सदस्यों ने इस संदर्भ में आयुक्त, जनसम्पर्क को लिखित सूचना दी है, जिनमें अतिरिक्त निदेशक से लेकर सहायक जनसम्पर्क अधिकारी तक और फोटो शाखा के अधिकारी शामिल हैं।

मुख्यालय में पदस्थापित अधिकारियों के साथ ही सभी जिला जनसम्पर्क कार्यालयों में पदस्थापित अधिकारियों ने भी सामूहिक अवकाश पर जाने की सूचना प्रेषित कर दी है।

प्रसार का कहना है कि संगठन ने विभाग की सेवाओं में सुधार, वेतन विसंगतियों को दूर करने, विभाग का कैडर विस्तार, नियमित तथा तदर्थ पदोन्नति, अधिकारियों को प्रताड़ना के विरोध, कार्य के अनुकूल माहौल, दायित्व निर्वहन के लिये आवश्यक मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता के समर्थन में 4 अक्टूबर, 2018 से अधिकारियों के सामूहिक अवकाश पर रहने का निर्णय लिया है।

प्रसार का कहना है कि संगठन की ओर से बार-बार लिखित ज्ञापनों के बावजूद मुख्यमंत्री एवं प्रभारी मंत्री (सूचना एवं जनसम्पर्क), अतिरिक्त मुख्य सचिव, सूचना एवं जनसम्पर्क तथा आयुक्त, सूचना एवं जनसम्पर्क के समक्ष उठाई गई समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है।

इससे पहले सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के सभी सूचना अधिकारियों ने विधानसभा सत्र के दौरान भी विधानसभा की कार्रवाई के कवरेज को लेकर मना कर दिया था।

बाद में डीआईपीआर कमिश्नर के आश्वासन के बाद अंतिम दिन कार्य बहिष्कार वापस लिया गया।