farmer gattusingh suicide in jalaur
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जालोर।

राजस्थान की तत्कालीन वसुंधरा राजे सरकार द्वारा 2018 और 2019 में अशोक गहलोत सरकार द्वारा कर्जमाफी के तमाम दावे धरे के धरे रहे गए हैं। राज्य में कृषक ऋण माफ करने के बाद भी अन्नदाताओं के सुसाइड का सिलसिला थमने का नाम नहीं रही है।

दिसंबर 2018 से लेकर अब तक 2 दर्जन से ज्यादा किसानों ने आत्महत्या कर ली है। राज्य के जालोर जिले में मंगलवार को कर्ज में डूबे एक किसान ने ट्रेन के आगे कूदकर अपनी जान दे दी।

बताया जा रहा है​ कि उसको बैंक वाले परेशान करते थे। उसने साल 2015 में करीब 2.95 लाख रुपए का लोन लिया था, जो अब बकाया और ब्याज बढ़कर 3.96 लाख हो गया था।

जानकारी के अनुसार यहां जालोर के भागली सिंधलान के रहने वाले कृषक गटूसिंह ने नजदीकी रेवले स्टेशन के पास ट्रेन के आगे छलांग लगाकर अपनी जान दे दी।

मृतक कृषक गटूसिंह के परिवार वालों ने बताया कि उसके उपर ऋण था, और बकाया को लेकर बैंक वाले आए दिन परेशान करते थे, जिससे आहत होकर उसने अपनी इहलीला समाप्त कर ली।

घटना के बाद ​मृतक किसान के साले श्रवण सिंह ने यहां के बागरा थाने में बैंक कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया है।

एफआईआर में कहा गया है कि गटूसिंह के पास मंगलवार को भी बैंक के लोग पहुंचे थे, जिन्होंने उसको परेशान किया, और ऋण नहीं चुकाने पर धमकी भी दी। जिससे परेशान होकर किसान ने मौत को गले लगा लिया।

इधर, बैंक प्रशासन का कहना है कि मंगलवार को वो लोग किसान के घर गए थे, किंतु वह घर पर नहीं मिला था। बाद में क्या हुआ, इसका उनको पता नहीं।

गटूसिंह के परिजनों ने बताया कि 27 नवंबर 2015 को उसने बैंक से 2.95 लाख रुपए का कृषि ऋण लिया था, जो अभी तक बाकी थी।

बताया जा रहा है कि तब ट्रैक्टर खरीदा था, जिसका बकाया बढ़कर अब 3.96 लाख रुपए हो गया था। किसान गटूसिंह उसी ट्रैक्टर से स्टेशन गया और वहां पर ट्रेन के आगे कूद गया।