जयपुर। राजस्थान के एक प्रमुख हिंदी दैनिक अखबार के अनुसार कुख्यात डकैत जगन गुर्जर ने पुलिस के समक्ष समपर्ण कर दिया है, किंतु हकिकत यह है कि उसको कल देर शाम पुलिस के द्वारा दबौच लिया गया था।

अखबार ने अपने रिपोर्टर के हवाले से खबर प्रकाशित कर वाहवाही लूटने का प्रयास किया है, किंतु हमारे पुलिस सूत्रों ने इस खबर का खंड़न करते हुए बताया है कि जगन गुर्जर को कल पुलिस ने पकड़ लिया था।

बाद में जब इस बात का एसपी को चला तो उन्होंने उससे बात की। इसके बाद नाटकीय घटनाक्रम के तहत उसकी अखबार के एक रिपोर्टर से बात करवाई गई, जिसमें उसने सुबह सरेंडर करने की बात कही।

किंतु हकिकत यह है कि उसको पुलिस ने कल ही पकड़ लिया था, केवल खुद को मजबूत दिखाने और बीते दिनों सरकार व गुर्जर समाज के बीच हुए समझौते के तहत घटना दिखाने के लिए सरेंडर का नाटक किया गया।

अब सवाल यह उठता है कि पुलिस ने ऐसा किसके दबाव में किया? क्या समाज के चलते पुलिस ने खुद को कमजोर कर लिया, या फिर राजनीतिक दबाव में सरेंडर का नाटक रचा गया?

आपको बता दें कि 12 जून को धौलपुर के करनपुर—सायकापुरा गांव में जगन गुर्जर ने दो महिलाओं के साथ मारपीट कर उनको निर्वस्त्र कर गांव में घुमाने के बाद चंबल के बीहड़ों में छिप गया था।

बात यह भी सामने आई कि पुलिस और जगन के बीच यह समझौता हुआ कि जिस टोली के द्वारा उसके सरेंडर करने का नाटक रचा जाएगा, उसमें सभी गुर्जर समाज के लोग होंगे।

पुलिस ने जगन गुर्जर पर 40 हजार का इनाम रखा था। वह 12 जून से लगातार बीहड़ों कें छिपा था और प्रदेश पुलिस के 250 जवान ढूंढ़ रहे थे। गुर्जर समाज के नेताओं द्वारा मध्यस्था की गई थी कि उसका एनकाउंटर नहीं किया जाएगा।