Jaipur

राजस्थान में महिला उत्पीड़न छोटी-छोटी बच्चियों के साथ दुष्कर्म और अलवर में पति के सामने पत्नी के सामूहिक बलात्कार की घटनाओं के बाद आये भयानक उबाल पर भी राजस्थान में महिलाएं सुरक्षित नहीं हो पा रही है।

7 महीने पहले गठित हुई राजस्थान की अशोक गहलोत वाली कांग्रेस सरकार बदमाशों के आगे लाचार नजर आ रही है।

बदमाशों के हौसले इतने बुलंद है कि राजस्थान विश्वविद्यालय, जो कि राज्य का सबसे पहला और सबसे बड़ा सरकारी विश्वविद्यालय, उसकी महिला प्रोफेसर को इंटरनेट के जरिए बदमाश दुष्कर्म करने की धमकी दे रहे हैं।

इस मामले को लेकर दो महिला प्रोफेसर स्नेह महेश नगर और गांधीनगर थाने में मामला दर्ज करवाया है। बताया जा रहा है कि अब तक इस तरह की धमकी विश्वविद्यालय की करीब 40 महिला प्रोफेसर के पास आ चुकी है।

पुलिस के मुताबिक बदमाशों ने कई महिला प्रोफेसर के घर पर कैश ऑन डिलीवरी से गिफ्ट तक भेजे हैं। इसके साथ ही उनके साथ गलत काम करने की भी धमकी दी जा रही है।

जानकारी में आया है कि 5 दिन तक इस मामले को पुलिस के पास होने के बावजूद एक भी बदमाश का पता नहीं लगाया जा सकता है। पुलिस अभी तक खाली हाथ है और महिला प्रोफेसर सहमी हुई हैं।

विश्वविद्यालय में इन धमकियों के चलते महिला प्रोफेसर में खौफ इतना है कि यूनिवर्सिटी की सभी महिला प्रोफेसर ने अपने फोटो, मोबाइल नंबर और एड्रेस समेत सभी जानकारियां विश्वविद्यालय की वेबसाइट से हटा दी है।

इस विद्यालय प्रशासन ने भी सभी प्रोफेसर स्कोर जानकारी विश्वविद्यालय की वेबसाइट से हटाने के लिए इंफोनेट सेंटर को निर्देश दिए थे।

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि इस वेबसाइट पर मिल जाते हैं, जिसके चलते सारे नंबर को विश्वविद्यालय की साइड से हटाया गया।

विश्वविद्यालय की वेबसाइट में प्रोफेसर एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के मोबाइल नंबर की जानकारी उपलब्ध रहती है। कई विश्वविद्यालयों की वेबसाइट पर भी शिक्षकों के मोबाइल नंबर दिए हुए हैं, जिससे छात्र छात्राएं और शोध करने वाले विद्यार्थी जरूरत पड़ने पर आसानी से संपर्क कर सकें।

जानकारी में आया है कि इस मामले को लेकर एक महिला प्रोफेसर ने सबसे पहले 3 जुलाई को महेश नगर थाने में बदमाशों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया था।

इसमें बताया गया था कि बदमाश फोन करके अश्लील बातें करते हैं, और जब वह इसका विरोध करती है तो बदमाशों ने महिला का बलात्कार करने की भी धमकी दे डाली।

एक अन्य शिकायत गांधीनगर थाने में दर्ज करवाई गई है, जिसमें महिला प्रोफेसर के पास इंटरनेट के जरिए कॉल आया था, जिसमें बदमाश ने महिला प्रोफेसर से अश्लील भाषा में बात की। तीसरा मामला भी कुछ दिन पहले का है।

इस प्रकरण को लेकर महारानी कॉलेज की प्रिंसिपल प्रोफेसर कटेजा का कहना है कि राजस्थान यूनिवर्सिटी की कई महिला शिक्षकों को अभद्र फोन कॉल्स आये है, इसकी शिकायत आने पर एक प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति से शिकायत दी है कुलपति प्रोफेसर आरके कोठारी ने मामले को लेकर शीघ्र ही कार्रवाई करने का आश्वासन भी दिया है।

इधर, महिला प्रोफेसर के द्वारा थाने में छेड़छाड़ का केस धारा 354 के तहत दर्ज करवाने के बाद महेश नगर थाना अधिकारी जगदीश तंवर और गांधीनगर नेमीचंद ने सभी फोन कॉल्स को इंटरनेट के जरिए खंगालने का काम शुरू कर दिया है। इस मामले में आईटी एक्ट की धाराओं को जोड़ा गया है।

दूसरी तरफ से रविवार को विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष जयंत सिंह समेत कई शिक्षकों ने डीजीपी भूपेंद्र सिंह से मिलकर प्रकरण की जानकारी दी है।

कुलपति प्रोफेसर आरके कोठारी का कहना है कि महिला प्रोफेसर ने उनको इस मामले की शिकायत की है और उसके बाद उनकी सभी जानकारी विश्वविद्यालय की वेबसाइट से हटा दी गई है। इसके साथ ही और बची हुई जानकारियां भी हटाने के बाद एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।

आपको बता दें कि राजस्थान विश्वविद्यालय के 35 डिपार्टमेंट्स में 230 महिला प्रोफेसर कार्यरत हैं। विश्वविद्यालय के 230 महिला प्रोफेसर की फोटो, उनके मोबाइल नंबर, उनके घर का एड्रेस, ईमेल आईडी और उनके शोध समेत अन्य सभी जानकारियां विश्वविद्यालय की साइट पर उपलब्ध है।

इस घटनाक्रम के बाद सोमवार को सभी महिला प्रोफेसर के मोबाइल नंबर समेत जानकारी विश्वविद्यालय की वेबसाइट से हटा दिए, लेकिन सवाल यह है कि शिकायत के 5 दिन बाद भी जयपुर पुलिस इस मामले में अभी तक किसी बदमाश का ना तो पता लगा पाई है और न ही किसी को गिरफ्तार कर पाई है।

जिससे महिला प्रोफेसर में असुरक्षा की भावना पनप रही है। सवाल यह भी है कि राजस्थान विश्वविद्यालय जैसे शिक्षा की सबसे बड़े मंदिर के शिक्षकों के साथ अगर ऐसा होता है तो शहर, गांव, गरीब और कस्बे में रहने वाली महिलाओं का क्या हाल होगा, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है?

फिलहाल पुलिस पूरी तरह से खाली हाथ है और विश्वविद्यालय प्रशासन एफ आई आर दर्ज करवाने के बाद इतिश्री कर के बैठा हुआ है। जबकि विश्वविद्यालय के पास है इंफोनेट सेंटर है, जिसके जरिए सभी फोन कॉल्स और इंटरनेट के द्वारा बदमाशों की जानकारी जुटाई जा सकती है।

साथ ही अन्य प्राइवेट साइबर एक्सपर्ट के द्वारा भी इस मामले को एड्रेस करके जल्द से जल्द बदमाश पकड़ा जा सकता है, मामले की तह तक जाया जा सकता है, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस प्रशासन दोनों लापरवाह बने हुए हैं।