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जयपुर।
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के द्वारा राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को कांग्रेस कार्य समिति (CWC) में पुत्र को जिताने के लिए पार्टी को तिलांजली देने की बात कहने के बाद उनका मंत्रिमंड़ल विरोध में आ गया है।

एक अंग्रेजी अखबार ने आज अपने मुख्य पृष्ठ पर इस खबर को प्रमुखता देते हुए लिखा कि अब शायद गहलोत का बच पाना मुश्किल होगा। राहुल गांधी ने सीडब्ल्यूसी की मीटिंग में उन वरिष्ठ नेताओं के बारे में बताया था, जिन्होंने लोकसभा चुनाव के दौरान अपने पुत्रों के हितों को पार्टी के ऊपर रखा।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सरकार के मंत्रिमंडल के दो मंत्रियों ने बात की कांग्रेस अध्यक्ष की बात का समर्थन करते हुए कहा है कि और उनके राज्य में “आत्मनिरीक्षण” और “जवाबदेही” होनी चाहिए।

राज्य के सहकारिता मंत्री उदयलाल अंजना ने अखबार को बताया कि “जोधपुर शहर में चर्चा है कि मुख्यमंत्री (अशोक गहलोत) अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में अधिक काम कर सकते थे, सीएम होने के नाते वह स्वतंत्र थे।”

अखबार ने इसी तरह से राज्य के खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के मंत्री रमेश चंद मीणा के हवाले से खबर छापी है। रमेश मीणा ने गहलोत को चेतावनी दी कि हार को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।

आपको बता दें कि साल 2014 में हुए कारनामे को दोहराते हुए भाजपा ने कांग्रेस का प्रदेश से सूपड़ा साफ कर दिया है। कांग्रेस इस बार भी राजस्थान में एक सीट नहीं जीत पाई। बीजेपी ने अपनी सभी 24 सीटें जीतीं और एक सीट उनके सहयोगी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) ने जीती है।

शनिवार को ही राहुल गांधी ने अशोक गहलोत, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ और वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम का जिक्र करते हुए कहा था कि अपने बेटों के हितों को पार्टी के ऊपर रखा है।

राहुल गांधी ने सीडब्ल्यूसी को बताया है कि अशोक गहलोत ने राज्य के बाकी हिस्सों की उपेक्षा करते हुए जोधपुर में अपने बेटे के लिए चुनाव प्रचार में लगभग सारा समय बिताया था।

आपको बता दें कि मुख्यमंत्री गहलोत के बेटे वैभव गहलोत भाजपा के नेता और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से 2.7 लाख से अधिक वोटों से हार गए थे।

अखबार ने रमेश मीणा के हवाले से लिखा है कि ‘कांग्रेस अध्यक्ष ने बिल्कुल सही कहा है। राहुल गांधी ने जो कहा है उस पर आत्मनिरीक्षण होना चाहिए। विचार-विमर्श और विश्लेषण होना चाहिए।

रमेश मीणा ने कहा है कि इतनी बड़ी हार के कारणों पर पार्टी को आत्मनिरीक्षण करना चाहिए। उसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पार्टी को इस हार को हल्के में नहीं लेना चाहिए, ताकि भविष्य में इतनी बुरी हार का सामना न करना पड़े।

नेतृत्व परिवर्तन की मांग पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी को सरकार में होने के बावजूद इस तरह के कारणों पर गौर करना चाहिए, और सबकी “जवाबदेही तय होनी चाहिए”।

इसके साथ ही मंत्री रमेश मीणा ने कहा, अशोक गहलोत, कमलनाथ और पी चिदंबरम के बारे में राहुल गांधी ने जो बात कही है, उसपर उन्हें आत्मनिरीक्षण करना चाहिए।

इधर, मंत्री उदयलाल अंजना ने कहा कि “जब राहुल गांधी परेशान हैं और उन्होंने अपने इस्तीफे की पेशकश भी की है तो अन्य वरिष्ठ नेताओं को कम से कम इस बात के लिए बाउंड करना चाहिए।

यह पूछे जाने पर कि क्या वह गहलोत के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं तो अंजना ने कहा, “मैं उनके इस्तीफे की मांग करने के लिए इतना बड़ा नहीं हूं, लेकिन उन्हें आत्मनिरीक्षण करना चाहिए, हर एक को करना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि राजस्थान में टिकट वितरण ही एक कारण नहीं था, कई कारण हैं। उनका (अशोक गहलोत) बेटे का मुद्दा भी एक कारक हो सकता है। टिकट वितरण में कुछ समस्याएं थीं। टिकट ठीक से वितरित नहीं किए गए थे। मुद्दों को समय पर सुलझाया नहीं गया था।

राजस्थान में बीजेपी के वोट का जिक्र करते हुए अंजना ने कहा कि गहलोत को आरएलपी प्रमुख हनुमान बेनीवाल के साथ कांग्रेस के लिए सौदा करने की कोशिश में ज्यादा “आक्रामक” होना चाहिए, जिन्होंने नागौर में पार्टी की उम्मीदवार ज्योति मिर्धा को हराया।

मंत्री ने कहा कि अशोक गहलोत, केसी वेणुगोपाल और एआईसीसी के महासचिव अविनाश पांडे थे, वे सभी फैसले ले रहे थे। हम टिकट को लेकर उनसे मिलते थे। अगर भाजपा ऐसा कर सकती है (बेनीवाल के साथ गठबंधन), तो हम क्यों नहीं कर सकते थे? उन्होंने बताया कि पश्चिमी राजस्थान में इससे बहुत फर्क पड़ता।

आपको बता दें कि नामांकन के बाद आयोजित रैली में गहलोत ने नागौर में कहा था कि उन्होंने बेनीवाल के साथ गठबंधन करने का तीन बार प्रयास किया, लेकिन वह बहुत जिद्दी हैं और इसकी कीमत उनको चुकानी होगी।

गौरतलब है कि बेनीवाल का नागौर के अलावा, अजमेर, जोधपुर, बीकानेर, बाड़मेर, जयपुर ग्रामीण, पाली और राजसमंद में अच्छा खास वोट बैंक है, जिसका फायदा गठबंधन की वजह से भाजपा को मिला है।