राजस्थान: कांग्रेस को बसपा के साथ इसलिए करना होगा गठबंधन?

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जयपुर।
आखिरकार प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट को अपना मन मारना ही होगा। आल इंडिया कांग्रेस कमेटी में अशोक गहलोत की बात को तवज्जो देते हुए राजस्थान में भी कांग्रेस का बसपा समेत अन्य पार्टियों के साथ गठबंधन का मार्ग प्रशस्त कर दिया गया। कांग्रेस राज्य में बसपा के साथ 6 से 10 सीटों पर गठबंधन कर सकती है। दो अन्य पार्टियों के साथ गठबंधन की संभावना है।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, गुलाम नबी आजाद, सचिन पायलट, अशोक गहलोत, रामेश्वर डूडी सहित कई आला नेताओं की एक अहम बैठक में इस बात पर मुहर लगा दी गई है। राजस्थान के अलावा मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी पार्टी अन्य जिताउ और ​बीजपी विरोधी पार्टियों के साथ मेलजोल बढ़ाएगी।

राजस्थान को वैसे तो कांग्रेस जीता हुआ मान रही है, लेकिन फिर भी अशोक गहलोत के मन मुताबिक बसपा के साथ गठबंधन कर पार्टी बीजेपी को काई चांस नहीं देना चाहती है। इससे पहले करीब दो माह पूर्व ही पार्टी अध्यक्ष सचिन पायलट ने कहा था कि कांग्रेस राजस्थान में किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करेगी, खुद चुनाव जीतने के लिए काबिल है।

गौरतलब है कि राज्य में बसपा 2008 में 6 सीटों पर चुनाव जीत चुकी है, इसको करीब 3.2 प्रतिशत वोट मिले थे। तब अशोक गहलोत के चुनावी बाद किए गए मैनेजमेंट के जादू के कारण बसपा के सभी विधायकों ने बसपा छोड़कर कांग्रेस ज्वाइन कर ली थी।

इस तरह से देखा जाए तो बसपा के प्रति कांग्रेस का प्रेम नई बात नहीं है। लेकिन सूत्रों की मानें तो बसपा इस बार उन लोगों को ही टिकट देगी, जो जीतने के बाद पार्टी नहीं छोड़ने की अंडरटेकिंग देंगे।

ऐसे में इतिहास का रिपीट होना मुश्किल है। संभवत: इसी बात को भांपते हुए गहलोत ने बसपा के साथ गठबंधन कर साथ चुनाव लड़ने की रणनीति बनाई है।

इधर, सूत्रों का दावा है कि बसपा खींवसर के निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का मानस बना चुकी है। सांगानेर से भाजपा विधायक व भारत वाहिनी पार्टी के अध्यक्ष घनश्याम तिवाड़ी और बेनीवाल की जुगलबंदी भी चर्चा में है।

कांग्रेस अगर बसपा के साथ गठबंधन करती है तो उसको कम से कम एक दर्जन सीटें छोड़नी होगी, जो भाजपा के लिए अच्छी खबर है, ब​शर्ते वह जातीय गणित को साधने में कामयाब हो जाए।

पश्चिमी राजस्थान बीजेपी विधायक मानवेंद्र सिंह के द्वारा पार्टी छोड़कर कांग्रेस का दामन थामने की चर्चा भी खूब सुर्खियां बटोर रही है। अभी उनकी अंतिम बात कांग्रेस के साथ चल ही रही है।

विधानसभा चुनाव में हर बार की भांति इस बार भी 3 से 4 प्रतिशत वोट स्विंग होने की स्थिति में परिणाम काफी बदल सकता है। ऐसे में कांग्रेस चाहती है कि बसपा को मिलने वाला वोट उनको मिल जाए, ताकि बीजेपी को सीधे तौर पर 6 से 8 फीसदी वोटों का नुकसान हो। यह नुकसान ही बीजेपी को सरकार बनाने से रोक सकता है।

यदि बसपा राज्य में कांग्रेस के बजाए हनुमान बेनीवाल या घनश्याम तिवाड़ी की भारत वाहिनी के साथ तालमेल करती है, तो इससे भी बीजेपी को ही फायदा होगा। गठबंधन नहीं होना बीजेपी के लिए फायदे का सौदा है, तो गठबंधन होना कांग्रेस व सभी विपक्षियों के लिए लाभ देने वाला होगा।

बहरहाल, राजपा का गठबंधन भी काफी अहम है। इस पार्टी के मुखिया अब आमेर विधायक नवीन पिलानिया हैं, जो एक बार चुनाव हारने के बाद जीते थे। पिलानिया ने जल्द अपनी पार्टी के 20 प्रत्याशियों की टिकट फाइनल करने का ऐलान कर दिया है।

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