जयपुर।

लोकसभा चुनाव 2019 को लेकर राजनीतिक दलों ने प्रचार-प्रसार पर जोर देना शुरू कर दिया है। इस बीच कम्युनिस्ट पार्टी के भी तीन उम्मीदवार मैदान में सामने आये हैं।

सीकर से अमराराम, चूरू से बलवान पूनिया और बीकानेर से श्योपत मेघवाल को टिकट दिया गया है। अभी तक कम्युनिस्ट पार्टी की तरफ से केवल 3 उम्मीदवार मैदान में उतारे गए हैं, लेकिन इनके मैदान में आने के साथ ही भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस की धड़कन तेज हो गई है।

सीकर में कांग्रेस के उम्मीदवार सुभाष महरिया हैं, जो 2014 का चुनाव निर्दलीय हार चुके हैं। इसी तरह से चूरू में कांग्रेस के रफीक मंडेलिया और बीकानेर में मदन लाल मेघवाल हैं।

इसी तरह से बीजेपी के सीकर से सुमेधानंद सरस्वती, चूरू से वर्तमान सांसद राहुल कस्वां और बीकानेर से केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल चुनाव लड़ रहे हैं।

सीकर से कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार अमराराम किसानों के लिए संघर्ष करने के चलते यहां पर काफी सक्रिय हैं और अपना प्रभाव भी रखते हैं। हालांकि दिसंबर में हुए विधानसभा चुनाव में वह चुनाव हार गए थे लेकिन फिर भी सीकर जिले में उनका अच्छा खासा प्रभाव है।

माना जा रहा है कि यहां पर अमराराम के खड़े होने से कांग्रेस पार्टी को सीधे-सीधे नुकसान हो रहा है, जबकि चूरू से राहुल कस्वां के सामने बलवान पूनिया बड़ी चुनौती पेश कर सकते हैं।

कांग्रेस के उम्मीदवार रफीक मंडेलिया को पहले ही इस रेस से बाहर समझा जा रहा है, जबकि बीकानेर में सीधी टक्कर अब तक अर्जुन राम मेघवाल और मदन लाल मेघवाल के बीच थी, लेकिन कमलेश पार्टी के उम्मीदवार सामने आने के बाद अब मुकाबला त्रिकोणीय होता हुआ दिख रहा है।

सीधे तौर पर देखा जाए तो तीनों ही सीटों पर कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार कांग्रेस को नुकसान पहुंचा रहे हैं, क्योंकि सत्ता विरोधी लहर में हमेशा विरोधी की पार्टियों में जितने उम्मीदवार अधिक होते हैं, उतना ही सत्ताधारी पार्टी को फायदा होता है।

इतिहास गवाह है भारतीय जनता पार्टी त्रिकोणीय मुकाबला में हमेशा भारी रही है। ऐसे में सहज ही कहा जा सकता है कि कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार यदि जीत हासिल नहीं कर पाते हैं, तो भी कांग्रेस के लिए ही ज्यादा मुश्किलें खड़े करेंगे।

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