ashok gehlot vainhav gehlot
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जयपुर।
प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत प्रदेश के मुख्यमंत्री रहने के बजाए पुत्रमोह में धृतराष्ट्र बन गए हैं। गहलोत की चुनावी गतिविधियों को देखकर ऐसा लगता है कि उनको राजस्थान के 25 संसदीय क्षेत्रों के बजाए केवल जोधपुर की ही सीट जीतनी है।

सीएम अशोक गहलोत ने अपने पुत्र और कांग्रेस के जोधपुर से उम्मीदवार वैभव गहलोत के लिए अपनी पूरी जादूगरी दांव पर लगा दी है। यहां पर गली—गली घूम रहे गहलोत को देखकर सहज ही कहा जा सकता है कि वह अपने सियासी सफर का सबसे कठिन चुनाव लड़ रहे हैं।

22 अप्रैल को जोधपुर में जनसभा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहलोत पर तीखा हमला करते हुए कहा था कि पुत्रमोह में सब भूल चुके हैं और गली—गली घूम रहे हैं। प्रदेश में बिजली, पानी जैसे मुद्दों को लेकर जनता त्राहिमाम—त्राहिमाम कर रही है और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को अपने बेटे को जिताने की चिंता में डूबे हैं।

इसके बाद 23 अप्रैल को जोधपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए गहलोत ने दावा किया कि अगर पीएम नरेंद्र मोदी का बेटा होता तो उनको वातसल्य का मतलब पता होता, लेकिन दुर्भाग्य देखिए मोदी बेटे उनके चुनाव प्रचार पर उनको गली—गली घूमता बता रहे हैं।

उसी दिन से भाजपा लगातार गहलोत के वातसल्य को लेकर मुख्मयंत्री अशोक गहलोत पर हमलावार है। भाजपा गहलोत पर हर दिन हमला कर रही है। भाजपा दावा कर रही है कि अशोक गहलोत ‘पुत्रमोह में धृतराष्ट्र’ बन गए हैं।

बहरहाल, अशोक गहलोत जोधपुर के ‘वार्ड मुख्यमंत्री’ बने नजर आ रहे हैं। शुक्रवार को भी गहलोत ने जोधपुर के 56 वार्डों में सुबह से लेकर देर रात तक छोटी—छोटी सभाएं कीं। ऐसा लगा रहा है मानों गहलोत की कांग्रेस केवल जोधपुर में ही चुनाव लड़ रही हों।