-30 वर्ष पुराने पत्रकारिता विभाग को बंद करने के विरोध में

राजस्थान विश्वविद्यालय में बीते 30 बरस से पत्रकारों को तैयार करने वाले केंद्र व राज्य सरकार बंद करने जा रही है।

जानकारी में आया है कि जन संचार केंद्र में इस बार कोई भी एडमिशन नहीं लिया जाएगा, बल्कि जिनको भी पत्रकारिता का कोर्स करना है उनको हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में आवेदन करना होगा।

सरकार के द्वारा निर्देश देने के बाद राजस्थान विश्वविद्यालय द्वारा जन संचार केंद्र को बंद करने की बात कहने पर राजस्थान के पत्रकारों में गहरा रोष है।

राजस्थान विश्वविद्यालय की शिक्षकों और देशभर में पत्रकारिता विभाग विश्वविद्यालय की शिक्षकों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है।

सोशल मीडिया पर तीन 30 बरस में जो छात्र राजस्थान विश्वविद्यालय के पत्रकारिता के केंद्र से पत्रकार बनके निकले हैं, उन्होंने भी गहरी नाराजगी जाहिर की है।

गौरतलब है कि राजस्थान की तत्कालीन अशोक गहलोत सरकार ने साल 2013 में राजस्थान में पहला पत्रकारिता का विश्वविद्यालय हरदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय जयपुर में स्थापित किया था, लेकिन उसके बाद दिसंबर 2013 में राज्य सरकार बदली तो सत्ता में आई भाजपा की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सरकार ने हरदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय को बंद करके उसके सभी शिक्षकों और विद्यार्थियों को राजस्थान विश्वविद्यालय के जन संचार केंद्र में स्थानांतरित कर दिया।

लेकिन 7 दिसंबर 2018 को राजस्थान में फिर से सत्ता परिवर्तन हुआ और अशोक गहलोत एक बार फिर मुख्यमंत्री बने मुख्यमंत्री बनने के बाद अपने वादे के मुताबिक अशोक गहलोत हरदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय को एक बार फिर से शुरू करने की घोषणा कर दी।

इसके साथ ही यह संकट खड़ा हो गया कि यदि जयपुर में पत्रकारिता का विश्वविद्यालय संचालित होगा तो क्या राजस्थान विश्वविद्यालय में चल रहे जनसंचार के अंदर को भी यथावत रखा जाएगा या बंद कर दिया जाएगा?

अब जबकि विश्वविद्यालय में जनसंचार केंद्र ने ऐडमिशन बंद कर दिए गए हैं तो एक बार फिर से लोगों के जेहन में तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के द्वारा हरदेव जोशी विश्वविद्यालय को बंद करने के बाद जो वाकया किया हुआ था, उसकी याद ताजा हो गई है।

जनसंचार केंद्र के शोध छात्र रहे डॉ. अखिल शुक्ला ने इस पर गहरी आपत्ति जताई है। जनसंचार के अंदर के पूर्व निदेशक प्रोफेसर संजीव भागवत ने भी अपने फेसबुक पेज पर केंद्र को बंद करने को लेकर राज्य सरकार को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।

डॉ. अखिल शुक्ला का कहना है कि राजस्थान विश्वविद्यालय प्रशासन जनसंचार केंद्र में शिक्षक नहीं होने का हवाला देकर केंद्र को बंद करने की तैयारी कर रहा है। जो कि प्रदेश के विद्यार्थियों के साथ कुठाराघात है।

विश्वविद्यालय में जनसंचार केंद्र के अलावा अन्य कई केंद्र हैं, जिनमें स्थाई शिक्षक नहीं हैं। इसके बाद भी केंद्र चल रहे हैं। अन्य विभागों के शिक्षक ही उन केंद्रों में भी पढ़ाई करवा रहे हैं।

जब विश्वविद्यालय उन केंद्रों को इतने वर्षों से चला रहा है तो जनसंचार केंद्र को बंद करने की कवायद पर भी सवाल उठने चाहिए। कुछ इसी तरह की नाराजगी एल्युमिनाई डॉ. राकेश गोस्वामी की है।

उल्लेखनीय है कि राजस्थान विवि में सत्र 1991-92 से स्ववित्त पोषित (एसएफएस) आधार पर जनसंचार केंद्र शुरू किया गया था। जिसमें एक वर्षीय स्नातकोत्तर डिप्लोमा कोर्स कराया जाता था।

1992-93 से डिप्लोमा के स्थान पर एक वर्षीय स्नातक कोर्स शुरू किया गया। 2001 से दो वर्षीय स्नातकोत्तर कोर्स एसएफएस स्कीम में चलाया गया।

साल 2016 में इस विभाग ने बंद हो चुके हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय को शरण दी थी और आज सरकार के बदलते ही 30 साल पुराने राजस्थान विवि के पत्रकारिता विभाग पर संकट के काले बादल क्यूं मंडरा रहे है।

जबकि यहां पर्याप्त विद्यार्थियों की संख्या है और हर साल पूरी सीटें भर जाती हैै। वर्तमान में विभाग में दो सौ से अधिक विद्यार्थी हैं।

लगभग तीन दशक तक राजस्थान के जन संचार केन्द्र ने राष्ट्रीय स्तर पर मीडिया शिक्षण के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।

यहां के विद्यार्थियों ने भारत सरकार व राजस्थान सरकार के विभिन्न मंत्रालयों सहित देश के विभिन्न मीडिया घरानों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।

अनेक राष्ट्रीय व अन्तरराष्ट्रीय स्तर की एजेंसियों के साथ कार्यशालाएं आदि का आयोजन केन्द्र की महत्त्वपूर्ण उपलब्धियां थीं।

राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी के सहयोग से दस स्तरीय पाठ्य पुस्तकों का प्रकाशन देश में एक अभिनव प्रयोग था। जब अजमेर और जोधपुर के विश्वविद्यालय बिना शिक्षकों के पाठ्यक्रम संचालित कर सकते हैं।

जब उदयपुर में भी एक ही शिक्षक पाठ्यक्रम संचालित करने में सक्षम है तो क्यों प्रदेश के सबसे पुराने विश्वविद्यालय के उस पाठ्यक्रम को शिक्षक के अभाव का बहाना बना कर बंद करने की तैयारी की जा रही है।

अब सरकार को इस विवि के लिए भी नये पद सृजन कर इस विभाग के कुशल संचालन में मदद करनी चाहिए ना कि तीन दशक से स्थापित केन्द्र को बंद करना चाहिए।

राजस्थान विवि के छात्रनेता सज्जन कुमार सैनी ने सरकार को आड़े हाथों लिया है। सैनी ने कहा है कि 30 साल से चल रहे जनसंचार केंद्र राज. विश्वविद्यालय (पत्रकारिता विभाग) को बंद किया जा रहा है क्या यह कदम सही है?

उन्होंने कहा है कि आखिर कब तक सरकारें अपनी मनमर्जी कर ‘शिक्षा के मंदिरों’ पर बन्द-चालू की राजनीति खेलती रहेगी?

बीजेपी ने संसाधनों की कमी का हवाला देकर हरिदेव जोशी पत्रकारिता विवि को बन्द किया, जिसे कांग्रेस सरकार ने बडे गर्मजोशी से आते ही पहली मीटिंग में शुरु किया, जो कि प्रदेश हित में स्वागत योग्य कदम था, लेकिन कांग्रेस सरकार की मंशा अब सामने आ रही, प्रदेश के सबसे बडे विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग को शिक्षको के अभाव का हवाला देकर बन्द किया जा रहा है।

जबकि विश्वविद्यालय में जनसंचार केंद्र के अलावा अन्य कई केंद्र हैं, जिनमें स्थाई शिक्षक नहीं हैं। इसके बाद भी केंद्र चल रहे हैं। अन्य विभागों के शिक्षक ही उन केंद्रों में भी पढ़ाई करवा रहे हैं।

सैनी का कहना है कि जब विवि उन केंद्रों को इतने वर्षों से चला रहा है तो जनसंचार केंद्र को तुरंत आनन फानन में बंद करने पर सवाल तो उठना चाहिये। ऐसे तो धीरे-धीरे विश्वविद्यालय को ही बंद किया जा सकता है शिक्षा के मन्दिरों पर राजनीति करना बन्द करो।

छात्रनेता अमित कुमार बड़बड़वाल का कहना है कि शिक्षक नहीं है, यह हवाला देकर अगर पत्रकारिता विभाग को बंद किया जा रहा है, ऐसे तो बहुत सारे विभागों में शिक्षक नहीं है बंद किया जाना चाहिए उन्हें ?

राजस्थान प्रदेश में बहुत सारे विश्वविद्यालय हैं, उन सभी विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की कमी है।

जिस प्रकार से राजस्थान विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग को शिक्षकों की कमी बताकर बंद किया जा रहा है, उसी को मद्देनजर रखते हुए सभी विश्वविद्यालयों को बंद करके एक कर देना चाहिए।