Indian army
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New delhi

जम्मू कश्मीर में विवादित हो चुकी धारा 370 35a को हटाने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार ने पहल शुरू कर दी है।

केंद्र सरकार ने शनिवार को जम्मू कश्मीर में रातोंरात केंद्रीय बलों की 100 और कंपनियां तैनात करने का फैसला किया है। गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में मंत्रालय ने शुक्रवार रात को आदेश जारी कर दिया।

इसके तहत घाटी में आतंक विरोधी ग्रेड को मजबूत किया जाएगा। यह तैनाती 15 अगस्त से पहले हो जाएगी।

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गौरतलब है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल जम्मू कश्मीर में 3 दिन का दौरा करके आए हैं। उसके तुरंत बाद दिल्ली में उन के लौटते ही केंद्र सरकार ने 100 कंपनियां भेजने का फैसला कर लिया है।

यह बिल्कुल साफ है कि इस फैसले के पीछे केंद्र सरकार की कोई बड़ी मनसा नजर आ रही है।

हालांकि केंद्र के इस फैसले को लेकर जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने आशंका जाहिर करते हुए कहा है कि जम्मू कश्मीर में सुरक्षा बलों की जरूरत नहीं है, यहां पर राजनीतिक समस्या है और इसे सेना की तैनाती से हल नहीं किया जा सकता है। भारत सरकार इस पर दोबारा विचार करें।

जिन कंपनियों को भेजा गया है उनमें सीआरपीएफ की 50, एसएसबी की 30, बीएसएफ और आईटीबीपी की 10-10 कंपनियां तैनात की जाएंगी। इन कंपनियों में कुल 10000 सैनिक होंगे।

जम्मू कश्मीर में धारा 370 35a विवाद के दायरे में रही है। इसके चलते वहां पर विशेष राज्य का दर्जा होने के कारण उद्योगपति उद्योग नहीं लगा पाते हैं।

इसके चलते बेरोजगारी व्याप्त है, इसका फायदा उठाते हुए अलगाववादी नेता चंद पैसे देकर, वहां के युवाओं को सेना के खिलाफ भड़काते हैं और भारत के खिलाफ भड़का कर सेना पर पत्थरबाजी करने के लिए आते हैं।

बता दें 3 साल के दौरान नरेंद्र मोदी सरकार ने सभी अलगाववादियों को, जिनकी संख्या करीब 200 है, उनको या तो जेल में डाल दिया है या भूमिगत कर दिया है।

इसके चलते अब जम्मू कश्मीर में पत्थरबाजी की शिकायत नहीं है, तो दूसरी तरफ शिक्षण संस्थानों को मजबूत किया जा रहा है और युवाओं को शिक्षा की तरफ अग्रसर किया जा रहा है।

लेकिन आज भी कुछ राजनीति करने वाले लोग, जिनमें जम्मू कश्मीर के एक पूर्व आईएएस भी है, वह नहीं चाहते हैं कि जम्मू कश्मीर में शांति स्थापित हो और कश्मीर हमेशा के लिए अभिन्न रूप से भारत का अंग स्थापित हो जाए।

अलगाववादी नेता जम्मू कश्मीर में कश्मीर को अलग करके पाकिस्तान के साथ शामिल होने की फिराक में रहते हैं। उनकी राजनीतिक मंशा साफ नजर आती है।

बीते दिनों जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सतपाल मलिक ने कहा था कि यहां पर अब तक बने मुख्यमंत्री और मुख्यमंत्रियों के परिवार जम्मू कश्मीर को सल्तनत की तरह मानते हैं और उसी के मुताबिक राज करते हैं।

उन्होंने कहा था कि जम्मू कश्मीर के युवाओं को सेना को मारने के बजाय ऐसे लोगों को मारना चाहिए, जो राज्य में शांति स्थापित नहीं होने दे रहे हैं।

सतपाल मलिक के इस बयान को लेकर राजनीतिक रूप से विवाद पैदा हुआ था। जिसके बाद उन्होंने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि एक राज्यपाल के होने के नाते उनको इस तरह का बयान नहीं देना चाहिए था, लेकिन अगर वह राज्यपाल नहीं होते तो वह अपने बयान पर अडिग हैं।

इसके साथ ही सतपाल मलिक ने यह भी कहा था कि जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला बच्चे हैं, लेकिन जिस तरह से उन्होंने राज किया है और जम्मू कश्मीर को अपनी सल्तनत माना है, जिस तरह का भ्रष्टाचार उन्होंने किया है।

जिससे उनके उद्योग देशभर में साझेदारी में स्थापित हैं, उससे साफ है कि अब तक उन्होंने जम्मू-कश्मीर को केवल लूटने का काम किया है और वह राज्यपाल रहते हुए इन सभी लोगों की पोल खोल कर जाएंगे, इनके भ्रष्टाचार के खुलासे करके जाएंगे।

जम्मू कश्मीर में सेना की तैनाती से एक और घाटी में शांति स्थापित हो रही है तो दूसरी तरफ जम्मू कश्मीर में राज करने वाले राजनीति करने वाले लोगों के पेट में भी मरोड़ शुरू हो गई है।

जम्मू कश्मीर अभी शांति के राह पर चल रहा है। यही कारण है कि राजनीति करने वाले लोगों की रोटियां जम्मू कश्मीर में सिकतीं नजर नहीं आ रही है।

इससे पहले भी केंद्र सरकार ने पुलवामा अटैक के बाद जम्मू कश्मीर में सेना की 100 कंपनियां तैनात की थी। अब सो अन्य कंपनियां तैनात होने के कारण जम्मू कश्मीर पूरी तरह से सेना की गिरफ्त में आ गया है।

ऐसा माना जा रहा है कि जम्मू कश्मीर के प्रत्येक आवाम को विश्वास में लेकर और सुरक्षा में लेकर केंद्र सरकार धारा 370 35a को हटाने का काम कर सकती है।

बीते दिनों गृहमंत्री अमित शाह भी जम्मू-कश्मीर के तीन दिवसीय दौरे पर लूट से वापस लौटे तो इसी तरह की हलचल शुरू हुई थी।

बहरहाल केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार जिस तरह से चुप्पी साधी हुई है, उसे आशंका है कि आने वाले कुछ दिनों में जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक तौर पर बड़ा तूफान आ सकता है।