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नई दिल्ली

CBI घूसकांड मामले की जांच कर रहे अधिकारियों ने बिचौलियों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है। सीबीआई ने बुधवार को दिल्ली कोर्ट में ऐप्लिकेशन देकर मामले में आरोपी मनोज प्रसाद और शिकायतकर्ता सतीश एस बाबू का पॉलीग्राफी टेस्ट करने की इजाजत मांगी है।

इस मामले में गुरुवार को सुनवाई होनी है। CBI चाहती है कि आरोपी मनोज प्रसाद के अलावा शिकायत करने वाले सना सतीश बाबू से भी इस संबंध में पूरी जानकारी मिले और जरूरी पूछताछ की जा सके।

दुबई के रहने वाले इन्वेस्टमेंट बैंकर मनोज प्रसाद पर कथित रूप से सीबीआई घूसकांड में बिचौलिए की भूमिका निभाने का आरोप लगा है।

मनोज पर एजेंसी के तत्कालीन स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के नाम पर घूस लेने का आरोप है और बीते 18 दिसंहर को पटियाला हाउस कोर्ट से उसे जमानत दी गई थी।

वहीं, हैदराबाद बेस्ड सना सतीश बाबू जो मीट एक्सपोर्टर मोईन कुरैशी से जुड़े करप्शन के एक मामले में सीबीआई के रेडार पर था, उसकी मनोज से दुबई में कथित मुलाकात हुई थी।

आरोप है कि मनोज ने सना सतीश बाबू से कहा कि उसके सीबीआई के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं और वह मीट एक्सपोर्टर से जुड़े केस में भाई सोमेश प्रसाद से कहकर मदद कर सकता है।

इसके बाद सीबीआई को 15 अक्टूबर को एसएस बाबू की शिकायत मिली और अस्थाना के खिलाफ 21 अक्टूबर को मामला दर्ज किया गया।

यह मामला मांस कारोबारी मोईन कुरैशी के खिलाफ कथित रूप से मामला कमजोर करने के लिए दर्ज हुआ था। इसके लिए सना सतीश बाबू से पांच करोड़ रुपये रिश्वत भी मांगी गई थी।

दो करोड़ रुपयों को दोनों बिचौलियों मनोज प्रसाद और सोमेश प्रसाद के जरिए दिया गया था। मनोज प्रसाद को 17 अक्टूबर को गिरफ्तार कर लिया गया था।

CBI डायरेक्टर को लिखे अपने लेटर में सना ने इस पूरी बात का खुलासा करते हुए दावा किया कि मनोज और सोमेश ने राकेश अस्थाना से अच्छे संबंध होने का दावा करते हुए उसे वॉट्सऐप तस्वीरें भी दिखाईं।

दोनों ने मीट कारोबारी के खिलाफ केस कमजोर करने के लिए कथित रूप से सना से दो बार में 2.95 करोड़ रुपये भी लिए।

सना ने यह भी आरोप लगाया कि मनोज प्रसाद से इस रकम को लेकर चर्चा करने पर उसने 2 करोड़ रुपये और मांगे और कहा कि इसके बाद वह सीबीआई से पूरी तरह छुटकारा दिला देगा।

इसी मामले में केंद्र सरकार ने गुरुवार को राकेश अस्थाना और सीबीआई के तीन अन्य अधिकारियों की छुट्टी कर दी थी।

इससे पहले 10 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बनी 3 सदस्यीय चयन समिति ने आलोक वर्मा को भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर पद से हटाया था। दोनों अधिकारियों ने एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे।

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