Om thanvi vice chancellor
Om thanvi journalist (file photo)

Jaipur news.

3 दिन पहले ही राजस्थान सरकार के द्वारा राज्य के प्रदेश के पहले पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति बने वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी की कुर्सी छिन सकती है।

कुलपति बनने के लिए जिन जरूरी योग्यताओं की आवश्यकता होती है, वह ओम थानवी के पास नहीं है। ऐसे में कुछ सीनियर जर्नलिस्ट और पत्रकारिता में शिक्षण का अनुभव रखने वाले शिक्षक कोर्ट में इस नियुक्ति को चुनौती देने जा रहे हैं।

दरअसल, राज्य सरकार के द्वारा जनवरी 2017 में राजस्थान में सरकारी विश्वविद्यालयों के लिए कुलपति बनाए जाने का की योग्यताएं निर्धारित की थीं। जिसके तहत कुलपति के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति के पास कम से कम 10 साल का प्रोफेसर होने का अनुभव होना चाहिए।

इसके साथ ही सरकारी अफसरों को, जो इस पद के लिए अप्लाई कर रहे हैं, उनके पास इस पद के बराबर पे बैंड होना चाहिए।

हालांकि, राज्य सरकार के द्वारा तय किए गए इस नियम के बाद भी तब राज्य के केवल 12 विश्वविद्यालयों पर यह नियम लागू हो पाया था, 13 यूनिवर्सिटीज इस नियम से बाहर थीं।

अब देखने वाली बात यह होगी कि राज्य सरकार द्वारा जनवरी 2017 में विधानसभा के द्वारा बनाए गए कानून के दायरे में हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय आता है, या नहीं?

यदि यह विश्वविद्यालय उस कानून के दायरे में आता है तो राज्य सरकार द्वारा पत्रकार ओम थानवी को कुलपति बनाए जाने का फैसला उल्टा पड़ सकता है।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपनी पूर्ववर्ती सरकार के दौरान आखरी वर्ष इस विश्वविद्यालय की स्थापना की थी। जिसको राज्य में सरकार बदलने के बाद वसुंधरा सरकार ने बंद कर दिया था और उसके सभी शिक्षक और छात्रों को राजस्थान विश्वविद्यालय के जन संचार केंद्र में शिफ्ट कर दिया था।

अभी तक उसके तमाम शिक्षक और छात्र राजस्थान विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग में ही हैं। आपको यह भी बता दें कि पत्रकार ओम थानवी को कांग्रेस का समर्थक माना जाता है, जिसके चलते उनको यह पद दिए जाने की चर्चाएं भी है।

अपने 40 साल के पत्रकारिता के अनुभव में ओम थानवी ने 25 साल तक जनसत्ता अखबार को संभाला था। इसके साथ ही दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार में भी उनको एडवरटाइजिंग कमेटी का सलाहकार नियुक्त किया गया था।

हालांकि ओम थानवी के पास दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में विजिटिंग प्रोफ़ेसर की योग्यता है, लेकिन उस अनुभव को राजस्थान सरकार द्वारा बनाए गए नियम के तहत पूरा नहीं माना जा सकता।

क्योंकि राज्य सरकार के कानून के मुताबिक कुलपति के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति के पास कम से कम 10 साल तक प्रोफेसर होने का अनुभव होना चाहिए।

सवाल ये भी है कि क्या राज्य सरकार ने हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय को पुनः स्थापित किया है, या नए सिरे से शुरू किया है? यदि नए सिरे से शुरू किया है तो थानवी कुलपति बने रहेंगे।

यदि पुनः स्थापित किया है तो नियमानुसार राज्य सरकार अपनी मर्जी से किसी व्यक्ति को कुलपति नियुक्त नहीं कर सकती। योग्य व्यक्ति को ही कुलपति चुनने की तय प्रक्रिया के अनुसार कुलपति बनाया जा सकता है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि ओम थानवी को कुलपति बनाए जाने कफेसल क्या कोर्ट में चुनौती देने योग्य है, या राज्य सरकार द्वारा की गई नियुक्ति ही जारी रहेगी?

इन विश्वविद्यालयों में नहीं है कुलपति बनने के लिए 10 साल के प्रोफ़ेसर होने के अनुभव की आवश्यकता

आयुर्वेदविश्वविद्यालय जोधपुर, स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय उदयपुर , श्रीकर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय जोबनेर, कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर, कृषि विश्वविद्यालय, राजस्थान हैल्थ साइंस यूनिवर्सिटी, जयपुर, आरटीयू कोटा, राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय बीकानेर, सरदार पटेल पुलिस विश्वविद्यालय जोधपुर, स्पोर्टस यूनिवर्सिटी झुंझुनूं, कौशल विकास विश्वविद्यालय जयपुर और जगद्धगुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय जयपुर।

आशंकित होने लगे हैं राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्र और शिक्षक

राज्य में सरकार बदलते कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार ने भले ही पत्रकारिता विश्वविद्यालय फिर से शुरू कर दिया हो, लेकिन इसके साथ ही राजस्थान विश्वविद्यालय में पत्रकारिता की पढ़ाई कर रहे छात्रों और उनको अध्यापन कराने वाले शिक्षकों में जबरदस्त आशंकाएं व्याप्त है।

छिन सकती है पत्रकारिता विवि के कुलपति ओम थानवी की कुर्सी! 1

दरअसल, पहले अशोक गहलोत सरकार ने विश्वविद्यालय स्थापित किया, लेकिन उसके लिए नए भवन था और ना ही अन्य सुविधाएं, जिसके चलते यह विश्वविद्यालय जगतपुरा में केवल 2 कमरों में चल रहा था।

राज्य सरकार ने इसी आधार पर इस को बंद कर दिया था। अब गहलोत सरकार ने इस को फिर से शुरू किया है तो राजस्थान विश्वविद्यालय में पत्रकारिता की पढ़ाई कर रहे छात्रों और उनको पढ़ा रहें शिक्षकों को इस बात का डर है कि उनको फिर से विश्वविद्यालय में भेज दिया जाएगा।

लेकिन राज्य में 5 साल बाद यदि सरकार बदलती है तो क्या यह विश्वविद्यालय संचालित रहेगा, या फिर से 2013 की तरह बंद कर दिया जाएगा? सरकार के आदेश के मुताबिक हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से आए हुए शिक्षक वापस उसी विश्वविद्यालय में जाएंगे।

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