टाटा से अपनी हिस्सेदारी लेकर अलग होना चाहती है यह 70 साल पुरानी कम्पनी

नई दिल्ली। टाटा समूह का नाम आते ही देश के प्रत्येक व्यक्ति में ऐसे उद्योगपति कंपनी के लिए सम्मान की भावना निकलती है, लेकिन पिछले करीब 8 साल से टाटा समूह एक अलग तरह के तनाव से जूझ रहा है।

वर्ष 2012 में जब साइरस मिस्त्री को टाटा समूह का प्रमुख बनाया गया था, तब किसी ने सोचा नहीं था कि इसी कारण से दुनिया के इस सबसे बड़े उद्योग समूह में से एक टाटा समूह में चल रही 70 साल पुरानी शापूरजी पलोनजी की दोस्ती टूट जाएगी।

साइरस मिस्त्री की हिस्सेदारी वाली और शापूर्जी पल्लोंजी समूह के द्वारा टाटा समूह से अलग होने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि उनको इस बात की पीड़ा अवश्य है कि 70 साल पुराने इस विश्वास के रिश्ते को टूटने का समय आ गया है, किंतु यह आवश्यक है।

एसपी ग्रुप ने कहा कि 2012 में जब साइरस मिस्त्री ने टाटा संस के अध्यक्ष के पद को स्वीकार किया, तो यह कदम न केवल गर्व की भावना के साथ था, बल्कि यह टाटा संस के बोर्ड में अंदरूनी व्यक्तित्व के तौर पर कर्तव्य की भावना के रूप में भी था।

उल्लेखनीय है कि टाटा संस बनाम साइरस मिस्त्री के बहुचर्चित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मिस्त्री की फर्मों और शापूरजी पलोनजी ग्रुप को टाटा संस में अपनी हिस्सेदारी के शेयरों के खिलाफ पूंजी जुटाने, गिरवी रखने या शेयरों के संबंध में कोई और कार्रवाई करने पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने 28 अक्टूबर 2020 तक यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश दिया है।

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मामले में शीर्ष अदालत 28 अक्टूबर 2020 को अंतिम सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने टाटा संस द्वारा साइरस मिस्त्री की शापूरजी पलोनजी को टाटा संस में उनकी हिस्सेदारी की सुरक्षा के खिलाफ पूंजी जुटाने से रोकने के लिए दाखिल याचिका पर मंगलवार को सुनवाई की।

दरअसल, एसपी समूह विभिन्न कोषों से 11,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रहा है। उसने कनाडा के एक चर्चित निवेशक से टाटा संस में अपनी 18.37 प्रतिशत हिस्सेदारी में से एक हिस्से के लिए पहले चरण में 3,750 करोड़ रुपये का करार किया है।

कनाडा के निवेशक के साथ एसपी समूह द्वारा पक्का करार किए जाने के एक दिन बाद टाटा संस ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। टाटा समूह इस तरह से किसी बाहरी कंपनी का निवेश नहीं चाहता है।