भारत ने चीन को दिया करारा झटका, कोविड-19 के बीच ड्रैगन की अर्थव्यवस्था पर संकट

नई दिल्ली

वैश्विक महामारी कोविड-19 क्या कहर के बीच भारत सरकार ने ड्रैगन, यानी चीन को करारा झटका दिया है। भारत के नरेंद्र मोदी सरकार ने चीन के बहिष्कार की अपनी योजना पर अमल करना शुरू कर दिया है।

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को सीमित करते हुए केंद्र सरकार ने भारत देश की सीमाओं से निकट सभी देशों के एफडीआई को केंद्र सरकार की अनुमति के बिना रोक लगा दी है।

करीब 2 साल पहले ही केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने भारत में निवेश के लिए विदेशी दरवाजे खोले थे। सरकार ने एक कानून बनाकर भारत की अर्थव्यवस्था में 100% विदेशी निवेश को मंजूरी दी थी। जिसके तहत किसी भी देश का उद्योगपति अथवा सरकार भारत में 100% एफडीआई के तहत निवेश कर सकता है।

लेकिन इसके साथ ही भारत ने पाकिस्तान और बांग्लादेश पर केंद्र सरकार की अनुमति के बिना निवेश करने पर पाबंदी लगा रखी थी। अब भारत सरकार ने इस सूची में चीन और श्रीलंका को भी डाल दिया है, यानी भारत की सीमाओं से सटी हुई किसी भी देश के द्वारा भारत में केंद्र सरकार की अनुमति के बिना निवेश नहीं किया जा सकेगा।

सीधे तौर पर देखा जाए तो भारत सरकार की यह योजना चीन के निवेश को रोकने के लिए है। क्योंकि कोविड-19 की वैश्विक महामारी शुरू होने के कुछ ही दिनों पहले चीन के सरकारी बैंक में भारत के एचडीएफसी बैंक में करीब डेढ़ प्रतिशत की हिस्सेदारी खरीदी थी।

कोविड-19 को लेकर अमेरिका समेत कई राष्ट्र चीन पर आरोप लगा चुके हैं। अमेरिका ने एक बार फिर से चीन के ऊपर कोरोनावायरस फैलाए जाने का आरोप लगाया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप स्पष्ट तौर पर कहा है कि चीन ने दुनिया के साथ धोखा किया है और जैविक हथियार का इस्तेमाल किया है।

यह भी पढ़ें :  मोदी और ट्रंप के बीच हुआ GSP समझौता, तो बर्बाद हो जाएंगे देश के किसान

भारत सरकार के इस फैसले को अमेरिका के साथ दोस्ती और एक गठबंधन बनाकर दुनिया भर में चीन को घेरने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। अगर योजना सफल होती है तो आने वाले वक्त में चीन की अर्थव्यवस्था पर बड़ा संकट मंडरा सकता है।

उल्लेखनीय है कि अमेरिका के अलावा ब्रिटेन, स्पेन, इटली, जर्मनी, फ्रांस, ब्राजील, इजराइल, जापान, भारत समेत दुनिया के अधिकांश देश चीन की साम्राज्यवादी नीति का विरोध करते रहे हैं।