चीनी सामानों का भारत को आयात 50% रह गया, होली पर पिचकारी भी भारत की खरीदनी होगी

नई दिल्ली।

चीन भारत को बड़े पैमाने पर निर्यात करता था, लेकिन पिछले 3 महीने के दौरान चीन से भारत को निर्यात में 50% की कमी है, जो बीते वर्षों में अब तक की सबसे बड़ी कमी है।

कोरोना वायरस की वजह से दुनिया एक बार फिर मंदी की चपेट में आ रही है कोरोना वायरस के कारण व्यापक पैमाने पर चीन के उद्योग धंधे बंद पड़े हुए हैं और वहां से दूसरे देशों को होने वाला एक्सपोर्ट बंद हो गया है।

इसका भारत के आयात और बहुत बुरा असर पड़ा है। भारत के कुल आयात में 50% से ज्यादा की सप्लाई तो अकेले चीन से होती है जो अब बाधित हो चुकी है।

आशंका है कि यह सिलसिला लंबे समय तक चल सकता है। ऐसे में अब भारत की सरकार चीन का विकल्प ढूंढने में लग गई है। सरकार अब कपड़े, सूटकेस, एंटीबायोटिक्स, विटामिंस, कीटनाशकों जैसे 1050 आइटम को दूसरे देशों से इंपोर्ट करने का विकल्प तलाश रही है।

चीन से आयात होने वाले सामानों की सूची बहुत लंबी है, इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमेटिक, डाटा प्रोसेसिंग मशीनों और उपकरणों की आपूर्ति बाधित होने के बाद सरकार ने दुनिया भर में भारतीय मिशनों को खत लिखा है कि वे संभावित आपूर्तिकर्ताओं के पहचान करें और उदाहरण के तौर पर एंटीबायोटिक के लिए स्विट्जरलैंड और इटली को संभावित आपूर्तिकर्ता के तौर पर चिन्हित किया गया है।

ये दोनों चीन की तरह बड़े निर्यातकों देशों में शामिल हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल फोन में सबकुछ इतना आसान नहीं है, क्योंकि इस सेक्टर में चीन का पूरा दबदबा है।

यह भी पढ़ें :  आईपीएल 13वें सीजन का 19 सितंबर को मुंबई और चेन्नई के बीच होगा पहला मुकाबला

निर्मला सीतारमण पहले ही कह चुकी है कि दो-तीन हफ्ते में हालात नहीं सुधरे तो भारत के अन्य नेताओं की चपेट में आने वाला है। चीन से सप्लाई चेन टूटने के बाद उपजे हालात पर विचार के लिए वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय विचार के साथ-साथ स्थानीय प्रोडक्शन को बढ़ावा देने की संभावना तलाशी जा रही है।

फार्मा और केमिकल, स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक्स और प्लास्टिक के आयात के मामले में भारत चीन पर निर्भर है। इसलिए इनकी आपूर्ति सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती है। इस बीच यह राहत की खबर है कि एक अनुमान के मुताबिक चीन के बुढ़ाना से 500 किलोमीटर से ज्यादा दूरी वाले इलाकों में प्रोडक्शन का काम मार्च में किसी भी वक्त बहाल हो सकता है।

हालांकि वह वुहाना और अप्रैल के बाद ही हालात सामान्य होने की संभावना है। इंडस्ट्री लॉबी ग्रुप फार्मा सेक्टर के लघु उद्योगों के लिए इंसेंटिव चाहते हैं। इसके अलावा उनका सरकार को सुझाव है कि बंद हो चुके प्लांट्स को फिर से शुरू किया जाए।

हालांकि मौजूदा संकट निर्यात के मोर्चे पर भारत के लिए एक अवसर पैदा करता है। भारत जैसे ऐसे हालातों में खुद को कुछ आत्मनिर्भर कर सकता है। पीयूष गोयल जब सरकारी एजेंसी और उद्योगों के जनप्रतिनिधि से चर्चा करेंगे तो उसमें 500 से 550 आइटम के निर्यात को बढ़ावा देने की रणनीति पर भी बात होगी।

कपड़ों के धागे कुछ खास औद्योगिक ऑर्गेनिक केमिकल जेम्स एंड ज्वेलरी आइटम की भारतीय निर्यात पर बहुत बुरा असर पड़ा है। इन आइटम के चीन और हांगकांग बड़े खरीदार हैं। संगठनों ने डिपार्टमेंट को बताया है कि निर्यात के लिए चमड़े की उत्पादन, सिरेमिक और की मांग बढ़ी है। एंटीबायोटिक्स विटामिन ए बी सी डी के अलावा हारमोंस की कमी हो सकती है।

यह भी पढ़ें :  कुछ ही घंटों में पलटी केजरीवाल सरकार, केंद्र के निर्देश के बाद खोली अपनी सीमाएं