भारत के लिए आसान नहीं है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को समझना?

– पता नहीं होता है कब राष्ट्रपति ट्रंप गंभीर होते हैं और कब मजाकिया मूड में? इसे अभी तक अमेरिका के अखबार तो समझ नहीं सके, भारत की क्या बिसात है?

गत वर्ष अमेरिका के सैन्य नायकों को अवार्ड देने की एक समारोह में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद को मेडल ऑफ ऑनर देने के बारे में मजाकिया ट्रंप ने कहा मुझे भी एक मेडल मिलना चाहिए, पर वह मुझे यही कहते रहते हैं कि मैं इस के योग्य नहीं हूं।

यह सुनकर श्रोता हंसने लगे, पर जब उन्होंने कहा कि तो क्या अगर मेरे पास योग्यता नहीं है तो क्या मैं खुद को अवार्ड नहीं दे सकता? आखिरकार में राष्ट्रपति हूं मेरे पास असीम अधिकार है? इस पर श्रोता और ज्यादा हंसे। यह अमेरिकन राष्ट्रपति के स्वयं का एक उदाहरण है, जब उन्होंने कहा यह कहा तो वह मुस्कुरा रहे थे, यहां तक कि वहां मौजूद सेना के पुराने जनरल भी उनके साथ इस मजाक कर लो उठाते लग रहे थे, लेकिन अमेरिका में कई लोगों को यह बात मजेदार नहीं लगी।

इनकी राजनीतिक विरोधियों ने नाराजगी जताई, कुछ नहीं तो इतने प्रतिष्ठित कार्यक्रम में मजाक करने पर उनसे इस्तीफा तक मांग लिया। मीडिया ने भी उनके खिलाफ मुहिम छेड़ दी और कहा कि वे किसी बनाना रिपब्लिक के तानाशाह की तरह बात कर रहे हैं।

यह स्पष्ट है कि उनके आलोचक यह नहीं समझे कि वे सिर्फ मजाक कर रहे हैं। उन्होंने ट्रम्प की बात को अक्षरशह लिया और उन्हें मान लिया कि ट्रंप खुद को मेडल ऑफ ऑनर देना चाहते हैं।

प्राइमटाइम टीवी पर उन्हें घमंडी अलोकतांत्रिक और विश्व के सबसे पुराने लोकतंत्र का नेतृत्व करने के लिए सर्वथा अयोग्य करार दिया गया।

ट्रंप की भारत यात्रा की पूर्व संध्या पर इस बात को ध्यान में रखना होगा कि ट्रंप एक बहुआयामी व्यक्ति हैं। वो बेहद प्रतिक्रिया पैदा करते हैं, जो उन्हें पसंद करते हैं, उनकी हर बात पसंद आती है और उन्हें उनसे नफरत करते हैं, उनकी हर बात से चिढ़ते हैं।

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सवाल है कि भारत को वह कैसे लगते हैं? शानदार या खींच पैदा करने वाले। उनके एक बयान से पहले ही काफी भ्रम पैदा हो गया है। उन्होंने कहा था कि भारतीय प्रधानमंत्री ने वादा किया है कि अमदाबाद एयरपोर्ट से मोटेरा स्टेडियम तक के मार्ग में 7000000 लोगों का स्वागत करेंगे।

यह कल्पना करना भी कठिन है कि 70 लाख लोग उनका स्वागत करेंगे, क्योंकि जनसंख्या ही 80 लाख है। कोई नहीं जानता है कि क्या वास्तव में नरेंद्र मोदी ने 7 लाख बोला और ट्रम्प ने 70 लाख समझ लिया। क्योंकि लाख शब्द भारत में ही इस्तेमाल होता है।

लेकिन सम्मानीय मेहमान जो इतनी बड़ी तादाद में लोगों के आने की उम्मीद कर रहे हैं, को अगर एक लाख लोगों की भीड़ ही नजर आती है तो उन्हें घोर निराशा होगी। भारत की तरफ से इसका स्पष्टीकरण भी जारी किया गया है।

समझा जाता है कि इस भ्रम को दूर करने के लिए बैक डोर चैनल का प्रयोग किया गया है, लेकिन लगता है कि ऐसा हुआ है नहीं है, क्योंकि कोलोराडो की एक सभा में ट्रंप ने अपने इस दावे को दोहराया, बल्कि लोगों की संख्या 7 मिलियन से बढ़ाकर 10 मिलियन बताया। वहां मौजूद लोगों के सामने कहा कि मैंने सुना है कि वह 10 मिलियन लोग होंगे।

विश्व में सबसे बड़े स्टेडियम में से एक मोटेरा स्टेडियम के मार्ग में 6 से 10 मिलियन, यानी 60 लाख से एक करोड़ लोग खड़े होंगे। गौरतलब है कि यह विश्व का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम है।

इसके बाद उन्होंने अपने जानेमाने मजाकिया अंदाज में कहा कि, लेकिन क्या आप जानते हैं प्रधानमंत्री महोदय ने 10 मिलियन लोगों का दावा किया है, यही मेरी समस्या है कि अब मैं कभी भी अमेरिका में इकट्ठे होने वाली भीड़ से संतुष्ट नहीं हो पाऊंगा।

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इस खचाखच भरे हॉल में 20000 लोग हो सकते हैं, भले ही भविष्य में 50000 हो जाएं, पर भारत में 10 मिलियन लोग देखने के बाद में इतने से संतुष्ट नहीं हो पाऊंगा, इन सब बातों से अहमदाबाद में मेजबान घबरा गए हैं।

नमस्ते ट्रंप अभियान में जटिल पहेली है कि क्या ट्रंप गंभीर हैं? क्या उन्हें अक्सर से लिया जाना चाहिए? इसी बीच कांग्रेस के नेता अर्जुन मोढवाडिया ने भाजपा पर प्रहार का मुद्दा मिल गया? क्या यह जुमला ट्रम को बहलाने के लिए दिया गया था?

उन्होंने कहा हमें अमदाबाद की सड़कों पर 70 लाख लोग कहां से लाएंगे? ट्रंप कोई गांधीजी तो है नहीं, जो गुजरात भर के लोगों ने देखने हुए उनके प्रति समर्थन जताने आए।

7000000 लोगों के रोड शो का जुमला उल्टा पड़ेगा, मुद्दा यह है कि डोनाल्ड ट्रंप क्या कहते हैं? उन्होंने सभी को असमंजस में डाल दिया है, क्या कोई नहीं जानता है कि वह कब मजाक करते हैं और कब गंभीर होते हैं और कब उनकी बात का अक्षरशह से मतलब निकाला जाना चाहिए?

यात्रा से पहले उन्होंने एक और ऐसी टिप्पणी कर दी, जिसने लोगों को सिर खुजाने के लिए मजबूर कर दिया है। यह टिप्पणी उनके भारत दौरे के दौरान व्यापार समझौते से संबंधित है। कुछ दिन पहले संकेत था हां! कुछ बड़े समझौतों की घोषणा होनी थी, फिर पता चला कि अमेरिका के व्यापार मंत्री उनके साथ नहीं आ रहे हैं।

ट्रम्प ने खुद कहा कि डील इस वर्ष नवंबर में उनके दोबारा निर्वाचित होने तक टाली जा सकती है। अचानक खबरें मिल रही है कि व्यापार मंत्री आ रहे हैं और ट्रेड डील हो सकती है। लगता है खुद ट्रंप ने इसकी पुष्टि कर दी। उन्होंने कहा कि मैं भारत जा रहा हूं, हम ट्रेड पर बात कर रहे हैं,पर उन्होंने इसे भी एक ट्विस्ट दे दिया।

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कहा हमें कुछ बात करनी है, हम कुछ काम की बात करेंगे, यह बात हमें बहुत परेशान करती है कि उन्होंने हम पर भारी शुल्क लगा रखे हैं। विश्व में सर्वाधिक शुल्क भारत का ही है। कई सालों से वे हम पर कड़ा प्रहार कर रहे हैं। एक बार फिर ट्रंप ने जवाब दिया।

उन्होंने कहा कि दो देश एक बड़ा व्यापारिक सौदा कर सकते हैं, साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि वे एक अच्छा सौदा नहीं कर सकते तो इसकी वार्ता धीमी रहेगी। हम एक जबरदस्त सौदा कर सकते हैं या फिर हम इसमें धीरे-धीरे और आगे बढ़ सकते हैं।

यह भी संभव हो सकता है कि हम इस वर्ष नवंबर में होने वाले चुनाव के बाद करें, मैं मानता हूं कि ऐसा भी संभव हो सकता है, हम देखेंगे क्या संभव हो सकता है। इसके साथ ही उन्होंने दूसरा बयान दिया हम सिर्फ वही सौदा कर रहे हैं, जो अच्छे हैं, क्योंकि हमारी नीति अमेरिका फर्स्ट, अमेरिका सबसे पहले की है।

एक बार फिर दिल्ली के अधिकारी परेशानी में पड़ गए हैं। क्या अमेरिका के राष्ट्रपति एक सख्त सौदा करने वाले हैं। क्या उनके अमेरिका फर्स्ट पर जोर देने से भारत के हितों पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा? क्या खास बड़ा व्यापारिक सौदा करने से पूर्व आंतरिक व्यापार पर चर्चा की जाएगी और डोनाल्ड ट्रंप है?

आप यह कभी नहीं जान सकते कि कब उन्हें गंभीरता से लिया जाना चाहिए और कब उनके सेंस ऑफ ह्यूमर का मजाक उठाना उस पर हंसना चाहिए।