भारत के 2 साल बाद अब चीन में नोटबंदी होगी?

– कोरोना वायरस से नोट और रेलगाड़ी संक्रमित हो गई, अतः चीन की सरकार ने नोट और सिक्कों को अधिग्रहित कर अल्ट्रावायलेट रोशनी में डिसइनफेक्ट करके पुणे जारी करेगी।

भारत में नोटबंदी के 2 साल पहले की थी। चीन अब नोटबंदी कर रहा है, बल्कि एक तरह से करने को मजबूर हुआ है। धीमी पड़ती गति के साथ ही इसकी परेशानियों को बढ़ाते हुए सीमित समय तक भी मुद्रा को जप्त या रद्द करने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं और अर्थव्यवस्था को अधिक क्षति हो सकती है।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष तथा हाईकोर्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ केके अग्रवाल ने टिप्पणी की है कि संक्रमित मुद्रा के साथ जब भोजन को संभालने के काम को जोड़ दिया जाता है तो इसका नतीजा अस्पताल के संक्रमण का फैलना हो सकता है। अस्पतालों से आने वाले नोट सामान्य अन्य बैक्टीरिया के साथ स्टेफिलोकोक्कस ऑरियस तथा ओरियस के वाहक होते हैं।

चीन में वर्तमान में व्यापक रूप से फैले हुए कोरोना वायरस संक्रमण का एक असर यह हुआ है कि अधिकारी अन्य सारी जप्त कर रहे हैं तथा कोरोना वायरस का संक्रमण हटाने के लिए इन्हें अल्ट्रावॉयलेट मशीनों तथा उच्च तापमान की प्रक्रियाओं से पुनः परिशोधित कर रहे हैं।

संक्रमित नकदी के उपयोग के माध्यम से कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिए चीन का केंद्रीय बैंक के कीटाणु रहित बना रहा है और जमा कर रहा है, यहां तक कि नष्ट भी कर रहा है।

पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना के डिप्टी गवर्नर ने कहा है कि व्यवसायिक बैंकों द्वारा जमा की गई नकदी को ग्राहकों को वापस दिए जाने से पहले कीटाणु मुक्त करना होगा।

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मनुष्यों की भांति नगदी तथा मुद्राओं को भी 14 दिन संपर्क से अलग रखने की प्रक्रिया से गुजरना होगा। यह सुनिश्चित करने के लिए की मुद्राओं के साथ वायरस नहीं फैलें। पहले सभी मुद्राओं को और नकदी को कीटाणुमुक्त किए जाने की प्रक्रिया से गुजरना ही होगा।

विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं अन्य मेडिकल निकायों की रिपोर्ट अब यह है कि संक्रमण की उच्च जोखिम को देखते हुए अब ऐसी प्रक्रिया आवश्यक है। कुछ विशेष रूप से जोखिम वाले स्रोतों से आने वाली मुद्राओं को फिलहाल आवश्यक रूप से जप्त किया जा रहा है।

उदाहरण के लिए वे सभी मुद्राएं जो अस्पतालों और कुछ भोजन सामग्री के बाजार और से आती हैं। इस तरह जब की जा रही है तथा आवश्यक संक्रमण मुक्त बनाने की प्रक्रिया के लिए विशेष रूप से पृथककृत सुविधाओं से भेजी जा रही है।

हालांकि, संक्रमण मुक्त करने की प्रक्रिया अभी शुरू हुई है। इन प्रक्रियाओं के नतीजे में अर्थव्यवस्था में नकदी की कमी हो सकती है। चीनी अधिकारी इसके साथ-साथ प्रक्रिया में आपूर्ति में आई बाधाओं को दूर करने के लिए मुद्राओं का उत्पादन भी बढ़ा रहे हैं।

चीन से संबंधित हर काम एक विशाल प्रयास होता है। अर्थव्यवस्था के विशाल आकार तथा नकदी और मुद्राओं के प्रभाव को देखते हुए यह बहुत बड़ा काम सिद्ध हो सकता है। फिर भी कोरोना वायरस संक्रमण की गंभीरता तथा इससे हो रही मौतों को देखते हुए इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती।

इस क्षेत्र में एक आशाजनक बात यह है कि गुजरे सालों में चीन ने लेनदेन को व्यापक रूप से डिजिटल किया जा चुका है और इसके परिणाम स्वरूप जरूरी उपयोग किए जा सकते हैं, लेकिन ऐसे लेन-देन भी हैं जो अभी भी नकदी पर आधारित हैं।

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ऐसा ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक है, जबकि शहरों और कस्बों में विक्रेता ग्राहक डिजिटल लेनदेन करते हैं। मुद्राएं बैक्टीरिया और वायरस से होने वाले रोगों की वाहकों पर विशेष रूप से मांसाहारी भोजन के बाजारों में आने वाले सिक्कों पर बैक्टीरिया की कॉलोनियां पहचानी गई है।

यह सेल्समोनेला ई निकोलाई तथा ऐसे अन्य प्रकार के सामान्य कीटाणुओं से भरे हुए पाए गए हैं, लेकिन अनोखा कोरोनावायरस 2019 जैसा कि नाम से जाहिर है, एक नया वायरस है इसकी गंभीरता मानव शरीर में इसके विकास तथा का तरीका तथा रोग उत्पन्न करने वाले अन्य सभी गुण अज्ञात हैं।

एपिडेमिक्स विशेषज्ञ तथा दुनिया भर के एपिडेमियोलॉजी के प्रोफेसर एवं विशेषज्ञ को वीर 19 तथा मानव जीवन के प्रति इसके खतरे के बारे में अपनी गंभीर चिंताएं जता रहे हैं। इस वायरस द्वारा स्थाई रूप से जम्मू जाने के संभावित परिणामों के बारे में भी गंभीर चिंता जता रहे हैं।