इनकम टैक्स (income tax) एवं जीएसटी (GST) पर सेमिनार

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जयपुर।
आर्थिक सर्वेक्षण 2018 के अनुसार देश में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर के दो लाख से भी अधिक मामले न्यायपालिका के सभी स्तरों पर विभिन्न अपीलीय कानूनी मंचों पर लंबित है जो कि भारतीय जीडीपी का लगभग 4.7 फीसदी है।

आईसीएआई, जयपुर ब्रांच के चैयरमैन सीए लोकेश कासट ने जानकारी दी कि ‘इनकम टैक्स (income tax) एवं जीएसटी‘ (GST)पर सेमिनार का आयोजन आईसीएआई, जयपुर ब्रांच में दिनांक 17 जनवरी, 2020 को किया गया।

इस सेमिनार के प्रारभिंक सत्र में सीए यश ढड्डा एवं एडवोकेट जतिन हरजाई ने जीएसटी ऑडिट के ग्रे एरिया एवं संभावित मुकदमेबाजी के विभिन्न पहलुओं को समझाया।

उन्होंने बताया कि सरकार के प्रयासों और पिछले एक साल में प्रतिबद्वताओं के बावजूद जीएसटी कानून जैसे ई-वे बिल प्रणाली के क्रियान्वयन में कई मुकदमें और विवाद देखे गए है।

सीए प्रकाश शर्मा, सैंट्रल काउंसिल मैम्बर, आईसीएआई ने कहा कि जीएसटी ऑडिट केवल कर देयता और भुगतान के सामंजस्य के लिए नही है बल्कि यह किसी पंजीकृत व्यक्ति द्वारा जीएसटी अधिनियम, कानून आदि के प्रावधानों के अनुपालन के सत्यापन के लिए भी है।

तत्पश्चात् जीएसटी पर एक पैनल डिस्कशन भी रखा गया जिसके मुख्य वक्ता सीए आकाश बड़गोती एवं सीए चिराग जैन थे।

सीए कुलदीप गुप्ता ने कोड ऑफ इथिक्स पर बताते हुए कहा कि 1 अप्रैल 2020 से चार्टर्ड एकाउंटेंट्स के लिए संबंधित आचार संहिता लागू की जायेगी जो कि सिद्धांतों की एक मार्गदर्शिका है जो पेशेेवरों को ईमानदारी से व्यवसाय का संचालन करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

सीए राजीव सोगानी ने इनकम टैक्स के सैक्शन 270 एवं 271 का विश्लेषण करते हुए बताया कि सैक्शन 270 में किसी भी व्यक्ति द्वारा आय कम बताने या किसी भी प्रकार की गलत सूचना देने पर जुर्माना 200 प्रतिशत तक है।

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आयकर अधिनियम की धारा 271—ब के बेहिसाब आय रखने के लिए दंड से संबंधित है जिसके अनुसार एक करदाता दंड का भुगतान करने के लिए बाध्य होगा।

यदि यह निर्धारण कर अधिकारी द्वारा निर्धारित किया जाता है। तत्पश्चात् सीए अनिल माथूर, सीए संदीप झंवर एवं सीए निक्की झमतानी के निर्देशन में इनकम टैक्स के महत्वपूर्ण मुद्दों पर परिचर्चा का आयोजन किया गया।

जयपुर ब्रांच उपाध्यक्ष सीए अनिल कुमार यादव ने जानकारी दी कि इस वर्कशॉप में करीब 350 से अधिक प्रोफेशनल्स ने हिस्सा लिया।