लखनऊ।

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में 3 दिसंबर को खेतों में गाय के शरीर के अवशेष मिलने के बाद गोकशी के आरोप में भड़की हिंसा ने पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की हत्या कर दी थी। इस मामले को लेकर राजनीति जारी है।

इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की हत्या के आरोप में जितेंद्र मलिक उर्फ जीतू फौजी को पुलिस ने हिरासत में ले रखा है। सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा है कि अगर कोई सबूत होगा और पुलिस उसे सन्त ईद मानेगी तो हम पुलिस के सामने पेश करने को तैयार हैं।

इधर पुलिस की प्रारंभिक रिपोर्ट में बताया गया है कि अगर समय पर पुलिस चेत जाति और अतरौली में गोवंश के अवशेष डोर ट्रॉली को पकड़ लेती तो संभव है यह हिंसा नहीं भड़कती।

आपको बता दें कि 10 दिसंबर को सुबह करीब 9:30 बजे बुलंदशहर के पास एक गांव में गोकशी की का आरोप लगाते हुए हिंसा भड़क गई थी। शिकायत के बावजूद पुलिस देरी से पहुंची और इसके चलते गोवंश के अवशेषों से लदी ट्रॉली रास्ते में रोकने की कोशिश नाकाम रही। पुलिस पर इस मामले में लापरवाही बरतने का आरोप है।

इस प्रकरण में लोगों ने गोकशी के एफआईआर दर्ज करवाई थी, और जिन पर आरोप लगाए गए थे, उन पर रासुका लगाने की मांग की थी। एफआईआर की कॉपी मिलने से पहले ही लोगों में हिंसा भड़क गई। पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक स्थानीय पुलिस की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है।

आपको यह भी बता दें कि इसे हिंसा में गोली लगने से एक युवक जिसका नाम सुमित जाट था, उसकी भी हत्या कर दी गई थी। इसी के गुस्से को लेकर भड़की हिंसा ने इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह को मार दिया था।

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