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Jaipur

राजस्थान विश्वविद्यालय में आज काफी समय बाद सिंडिकेट की बैठक हुई। बैठक में बजट पास नहीं किया गया।

केवल एक महीने के लिए लेखानुदान पारित किया गया है। सबसे मजेदार बात यह है कि विश्वविद्यालय में जितनी लायबिलिटी वेतन की है।

उससे कहीं ज्यादा पेंशन का भार बढ़ गया है। राज्य सरकार ने हाथ खड़े कर दिए और विश्वविद्यालय के पास पेंशन और वेतन के पैसे देने के लिए बजट ही नहीं है।

आज राजस्थान विश्वविद्यालय में कुलपति प्रोफेसर आरके कोठारी के अध्यक्षता में सिंडिकेट की बैठक हुई। बैठक में सरकार की ओर से मनोनीत विधायक मुरारी लाल मीणा और अमीन कागज़ी शामिल हुए।

इस मौके पर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए, जिनमें अमीन कागज़ी को स्पोर्ट्स बोर्ड का डायरेक्टर बनाया गया है।

कई दिनों से आंदोलन कर रहे संविदा कर्मियों के वेतन में भी भर्ती की गई है। अब तक ₹6000 प्रति माह के हिसाब से काम करने वाले संविदा कर्मियों को ₹9200 प्रति माह के हिसाब से तनख्वाह मिलेगी।

हालांकि, विधायक अमीन कागज़ी के आश्वासन के बावजूद संविदा कर्मियों ने आंदोलन खत्म नहीं किया और जब तक विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से संविदा कर्मियों की लिस्ट नियमित करने के लिए राज्य सरकार के पास भेजी नहीं जाएगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

अस्थाई तौर पर 21 तारीख तक आंदोलन को स्थगित किया गया है। खास बात यह है कि राजस्थान विश्वविद्यालय के शिक्षकों और नॉन टीचिंग स्टाफ की वेतन के लायबिलिटी करीब 80 करोड़ मासिक है, जबकि 120 करोड़ में मासिक पेंशन के पेटे दिए जा रहे हैं।

सदस्यों की कमी होने के कारण कोरम पूरा नहीं हो पाया और इसके चलते सिंडिकेट ने बजट पास नहीं किया, इसके कारण 1 माह के लिए लेखानुदान पारित किया गया है।