-8 गांवों के आदिवासियों की 34 साल पुरानी समस्या को बीटीपी विधायकों ने उठाया विधानसभा में।

Jaipur

भारतीय ट्राइबल पार्टी के विधायक राजकुमार रोत ने आदिवासी इलाकों में व्याप्त समस्याओं को विधानसभा में पुरजोर तरीके से उठाया है।

विधायक राजकुमार ने लगातार आदिवासियों को जमीनों से वंचित किये जाने के मामले को विधानसभा में उठाया है।

उन्होंने सरकार का ध्यान इस गंभीर समस्या की तरफ उठाते हुए इसकी उच्च स्तरीय जांच करवाने और आदिवासियों को उनकी ज़मीनें वापस दिलाने की मांग की है।

बता दें की डूंगरपुर विधानसभा क्षेत्र के बिछीवाड़ा पंचायत समिति के पटवार हल्का खजूरी के गांव मालमाथा, जगाबोर, झालन, खेड़ापाल, आसीयाव,धर्माओदी, डेडली, खजूरी में आदिवासियों का बड़ा मामला है।

यहां पर आजादी से पहले से आदिवासी लोग बीलानाम जमीन पर निवास करते आ रहे हैं, जहां पर उनके मकान, कुएं, खेती वगैरह हैं। इसके अलावा उनके पास कोई जमीन भी नहीं है।

लेकिन गंभीर बात यह है कि सन 1985 में तत्कालीन तहसीलदार द्वारा उक्त सभी गांवों की जमीन जहां पर गरीब आदिवासी लोग निवास करते हैं, जिसको वन विभाग के नाम हस्तांतरण कर दी।

विधानसभा में बीटीपी विधायकों ने उठाये गंभीर मुद्दे 1

उसके बाद से ये लोग उक्त जमीन को अपने नाम कराने के लिए भटक रहे हैं, पर अभी तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ।

ग्रामीणों का कहना है कि जब से पता चला कि हमारी जमीन वन विभाग को दे दी गई है, उसके बाद से सभी अफसरआन और नेताओं को समस्या बताई पर किसी ने समस्या पर गौर नहीं किया।

लोकसभा चुनाव प्रचार के वक्त बीटीपी के विधायकों को उक्त समस्या बताने पर विधानसभा में मुद्दा उठाने का आश्वासन दिया था।

इनका कहना है-

-मेरे पिताजी की उम्र 95 साल है, वह कहते हैं कि हमारे दादा जी इसी जमीन पर रहते थे, पता नहीं 1985 में ऐसा क्या हुआ। हमारे 8 गांवों की जमीन वन विभाग को दे दी।

हमारे पास दूसरी जमीन भी नहीं है। दोनों विधायकों ने हमारी समस्या विधानसभा में उठाई है। हमें पूरा भरोसा है कि हमारी समस्या का समाधान होगा।
-देवीलाल पिता मंगला भराड़ा उम्र 58 साल निवासी मालमाथा

-लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान इन सभी गांवों के लोगों द्वारा यह समस्या बताई थी, जिस पर गौर किया तो लगा कि काफी बड़ी और पुरानी समस्या है। इसलिए इसको हमने विधानसभा में उठाया गया।
-राजकुमार रोत, विधायक चौरासी