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नई दिल्ली।

एकमात्र सरकारी दूर संचार कंपनी, भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) पर चल रहे 31287 हजार करोड़ के घाटे से निकालने के लिए केंद्र की पीएम मोदी सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है।

केंद्र सरकार ने तय किया है कि इस 9 रत्न कंपनी को लगातार हुए घाटे के बाद उबारना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

मोदी सरकार में दूर संचार मंत्रीी अरूणाा सुंदरराजन के साथ बैठक के बाद कंपनी के टॉप अधिकारियों के हवाले से खबर सामने आई है कि केंद्र सरकार बीएसएनएल के को रिलीफ फंड देने की तैयारी कर रही है।

हालांकि, इस बात पर भी विचार किया जा रहा है कि मोदी सरकार इस कंपनी को हमेशा के लिए बंद कर सकती है। कंपनी के करीब 67 हजार कर्मचारी हैं।

सरकार ने यह भी विचार किया है कि कंपनी के कर्मचारियों की सेवा निवृत्ति की उम्र्र घटाकर 56-58 साल कर दिया जाए। इससे कंपनी को हर साल 3000 करोड़ की बचत होगी।
इसके साथ ही कंपनी यदि आधे कर्मचारियों को सीआरएस भी देती है तो उसके पास करीब 33 हजार से ज्यादा कर्मचारी रहेंगे, जो 3000 करोड़ का नुकसान बढ़ने से रोकने में कामयाब होंगे।

बताया जा रहा है कि बीएसएनएल ने अपनी जमीनों और भवनों से भी आय जुटाने का प्रयास शुरू कर दिया है। इसके तहत कंपनी करीब 15000 करोड़ रुपए एकत्रित करेगी। डिपार्टमेंट आॅफ इंवेस्टमेंट एण्ड पब्लिक ऐसे मैनेजमेंट को भी अगले दो या तीन साल में पूरा करने का चैलेंज है।

बताया जा रहाा है कि कंपनी के घाटे की समीक्षा के दौरान सरकार के द्वारा जान फूंकने की तैयारी में कई विकल्प खोले गए हैं। विश्लेषकों का कहना है कि विकल्पों में कंपनी में रणनीतिक निवेश या इसको बंद करने की भी संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि कंपनी को साल 2017-20118 तक वित्तीय घाटा 31 हजार करोड़ से उपर पहुंच चुका है। इस बीच कंपनी को कॉम्पिटिशन करने में भी परेशानियां हो रही हैं। चैयरमैन अनुपम श्रीवास्तव के अनुसार कंपनी को रिलायंस जियो आने के बाद भारी घाटा हुआ है।