नई दिल्ली।

पिछले दिनों इंडोनेशिया में आई सुनामी के बाद सैकड़ों लोग मारे गए थे, लेकिन हॉस्पिटल द्वारा लाशों का सौदा करने का मामला सामने आया था।

हालांकि, यह कोई नई बात नहीं है भारत जैसे देश में भी मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए हॉस्पिटल्स द्वारा लावारिस लाशें खरीदने की खबरें सामने आती रहती हैं।

मानव अंगों के धंधे में कई कंपनियों की बहुत चांदी काटी जाती है। नीदरलैंड की सरकार द्वारा इस ट्रेंड के लिए गाइडलाइन तैयार की जा रही है।

नीदरलैंड सरकार की चिंता है कि देश के कई अस्पताल अमेरिकी कंपनियों के लिए सिर्फ घुटने और कंधे जैसे अंग खरीद रहे हैं। इंसान के अंगों को व्यापार करने वाली कंपनियों को बॉडी ब्लॉकर कंपनियां कहा जाता है।

इस ताज़ा गाइडलाइंस के जरिए सरकार अस्पतालों की सुविधाओं को कम करना चाहती है। इस मामले में अधिकारियों का कहना है कि यह बात अस्पतालों को साफ तौर पर पता होनी चाहिए कि वह खरीद रहे हैं वह किसने और कैसे दान किए थे।

नीदरलैंड की सरकार चाहती है कि कोई भी मानव सरकारी इजाजत के लिए नहीं बेचे जाएं और दान देने वाले परिवार को पता चलना चाहिए कि कहीं उसे बेचा तो नहीं जाएगा। अमेरिका में इस तरह के मामले में जांच चल रही है, जिसकी रिपोर्ट जल्द मिलने है।

अमेरिका में ऐसी बॉडी ब्रोकर कंपनियों के खिलाफ सरकारी जांच चल रही है। यह कंपनियां आम तौर पर दान में मिलने वाली बॉडी को ले जाती हैं, फिर उसे काट कर उसके अंगों को निकालकर भेजती है।

नीदरलैंड के स्वास्थ्य मंत्री ह्यूगो डी युंगे का कहना है कि नए कानून के अनुसार जो लोग इंसानी अंगों का कारोबार करते हैं, उन्हें यह बताना होगा कि दान करने वाले ने उसे बेचने के लिए सहमति दी है या नहीं।

क्योंकि लाश का पैसा मिल रहा होता है, इसलिए एक गरीब परिवार जो अंतिम संस्कार का खर्च नहीं कर पा सके थे, बेच देते हैं। तो फिर इसका हिस्सा उनको भी मिलना चाहिए।

मजेदार बात यह है कि भारत में कई तरह के मामले सामने आने के बावजूद आज तक भारत सरकार या किसी भी राज्य सरकार ने बड़े पैमाने पर इस तरह के मामलों की गहनता से जांच नहीं करवाई है।