hanuman beniwal

जयपुर।
राजस्थान में लोकसभा चुनाव 2019 का पहला दौर 29 अप्रैल और दूसरा 6 मई को पूरा हो चुका है। प्रदेश में रिकॉड तोड़ते हुए पहली बार इतनी बंपर वोटिंग हुई है। पहले चरण में करीब 68 फीसदी और दूसरे फेज में लगभग 64 प्रतिशत मतदान ने दोनों ही राजनीतिक दलों की गणित बिगाड़कर रख दी है।

हालांकि, दावे अपने अपने हैं और दोनों ही दल 25 में से 25 सीटें जीतने का दम भर रहे हैं, दावा कर रहे हैं। लेकिन समझने वाली बात यह है कि एक ओर जहां डूंगरपुर में बीटीपी सीधी चुनौती पेश करती हुई नजर आ रही है, वहीं नागौर में एनडीए के उम्मीदवार होने के कारण कांग्रेस पार्टी के चिन्ह पर केवल 24 सीटों पर ही मुकाबला रह गया है।

टिकटों की बात की जाए तो इस बार भाजपा ने 9 सीटों पर उम्मीदवार बदले हैं, वहीं कांग्रेस ने 21 टिकट बदले हैं। केवल चार सीटों पर कांग्रेस पार्टी अपने उम्मीदवार रिपीट किए हैं। भाजपा ने 16 सीटों पर 5 साल पुराने प्रत्याशी फिर उतारे हैं।

परिणाम 23 मई को आएगा, लेकिन इस बीच सभी 50 प्रमुख उम्मीदवारों और सैकड़ों अन्य प्रत्याशियों का भाग्य ईवीएम में बंद पड़ा है। बात टिकटों की जाए तो भाजपा ने 9 प्रत्याशी बदले, जिनमें से 2 जगह पर पूर्व सांसदों का निधन हो गया था, वहीं दौसा सीट पर विधानसभा चुनाव से पहले ही हरीश मीणा ने पाला बदल लिया था।

ऐसे में भाजपा को अजमेर, अलवर, दौसा पर टिकट नए को ​देना पड़ा तो वहीं 6 सीटों, जिनमें से बाड़मेर, बांसवाड़ा, झुंझुनूं, नागौर और राजसमंद में पुराने सांसदों के टिकट काट दिए हैं।

इसी तरह से कांग्रेस ने अजमेर, बांसवाड़ा, भीलवाड़ा, उदयपुर, चूरू, दौसा, श्रीगंगानगर, जयपुर ग्रामीण, जयपुर शहर, जलौर, जोधपुर, करौली—धौलपुर, कोटा, पाली, राजसमंद, सीकर, टोंक—सवाईमाधोपुर और उदयपुर में प्रत्याशी बदले हैं।

भाजपा उम्मीदवारों को साल 2014 में एक लाख वोटों से अधिक की जीत वाले अजमेर जिले थे। वहीं दो लाख से ज्यादा वाली सीटों में अलवर, भरतपुर, भीलवाड़ा, चूरू, गंगानगर, झालावाड़ा—बारां, झुंझुनूं, कोटा, राजसमंद और सीकर शामिल रहीं।

इसी तरह से 3 लाख से ज्यादा वोटों से जीतने वाली सीटें चित्तौडगढ़, जयपुर ग्रामीण, जालौर और पाली शामिल हैं। इसके बाद 4 लाख से ज्यादा मतों से जीतने वाली जयपुर, जोधपुर सीट रही। इसमें जयपुर तो 5.40 लाख से जीते थे।

कहा जाता है कि एंटी इनकमबेंसी के चलते कई जगह हार का सामना करना पड़ता है, लेकिन इस बार के चुनाव कुछ अलग तरह के नजर आ रहे हैं। इस बार फिर से मोदी लहर के सहारे भाजपा के कई उम्मीदवार फिर जीत का दावा कर रहे हैं।

कांग्रेस को सत्ता विरोधी लहर का सहारा है, लेकिन कांग्रेस के अधिकांश प्रत्याशियों को अपने दम पर जीत दर्ज करने का भरोसा भी है। अलवर, टोंक सवाई माधोपुर, बाड़मेर, नागौर, जोधपुर जैसी सीटों पर अपने दम पर जीत का दावा किया है।