जम्मू कश्मीर के पिछले 4 दिनों से चल रहे अपने निजी दौरे के दौरान मैं (डॉ. आलोक भारद्वाज) कल 29 अगस्त 2019 की शाम को राजोरी जाते समय रास्ते में अखनूर से गुजर रही “चंद्रभागा नदी” जिसे “चिनाब” नदी भी कहा जाता है के प्रसिद्ध “जीयो पोता घाट” पर पहुंचा।

यह वही जियो पोता घाट है, जहां पर 1882 में कश्मीर के महाराजा रणबीर सिंह ने अपने पुत्र गुलाब सिंह को राजतिलक कर कश्मीर का महाराजा बनाया था।

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महाराजा गुलाब सिंह को इतिहास के सभी विश्लेषक अच्छी तरह से जानते हैं और एक तथ्यात्मक सच्चाई भी मैं आप सभी के समक्ष प्रस्तुत करना चाहता हूं जो मुझे जम्मू कश्मीर के एक प्रसिद्ध पूर्व मीडियाकर्मी और वर्तमान में राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के विभागाध्यक्ष वरिष्ठ प्रोफ़ेसर शरत् चंद्र शर्मा से व्यक्तिगत चर्चा के दौरान प्राप्त हुई।

प्रोफेसर शरत् चन्द्र शर्मा ने मुझसे कहा भारद्वाज जी आप लिखने पढ़ने वाले व्यक्ति है तो आपको यह अवश्य पता होगा कि विभाजन से पूर्व अखंड कश्मीर का मानचित्र वर्तमान के मानचित्र से बिल्कुल अलग था।

उन्होंने एक कागज़ पर उकेर कर मुझे बताया कि अगर आप दोनो मानचित्रों की तुलना करेंगे, तब आप देखेंगे कि वर्तमान में जम्मू और कश्मीर का जो हिस्सा हमारे पास है, वह अखंड कश्मीर का मात्र एक छोटा का अंश ही है।

प्रोफेसर शरतचंद्र ने यह भी कहा कि आज हम हिंदुओं को अपनी आस्था के केंद्र कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाने हेतु चीन की तरफ देखना पड़ता है, जबकि यह पवित्र कैलाश मानसरोवर भी अखंड कश्मीर की हमारी ही भूमि का हिस्सा था।

चर्चा के दौरान प्रोफ़ेसर शरतचंद्र ने कहा कि यहाँ पर पूर्ववर्ती रही सभी सरकारों ने यह विषय कभी नहीं उठाया की भारतीय संसद में जब रियासत कालीन कई महाराजाओं की तस्वीर लगी हुई है तब वहां महाराजा गुलाब सिंह जी की तस्वीर क्यों नहीं है?

जब मैंने उनसे उनके इस वक्तव्य पर स्पष्टीकरण चाहा तब शरत चंद्र ने कहा कि रियासतकालीन भारत में शासक अपनी सीमा का विस्तार केवल भारत के अंदरुनी हिस्से में ही करते थे।

यानी कि इसे ऐसे समझ सकते हैं कि जयपुर का महाराजा अपना प्रसार करते-करते जोधपुर तक पहुंच जाता था और उसे युद्ध में विजय करअपने कब्जे में ले ले था।

यानी कि रियासत कालीन अधिकांश महाराजा अपने राज्य की सीमाओं का विस्तार केवल भारतीय धरा के अंदर ही कर पाए थे।

जबकि केवल एक मात्र कश्मीर के महाराजा गुलाब सिंह ही थे, जिन्होनें कश्मीर की सीमाओं का प्रसार भारतवर्ष की सीमाओं से भी परे जाकर गिलगिट बलूचिस्तान, यानी अफगानिस्तान की सीमा तक और 1962 की भारत चीन युद्ध के बाद चीन के कब्जे में चली गई हमारी भूमि तक करा था।

बाद में स्वतंत्र भारत में कश्मीर के विलयोपरान्त ना तो महाराजा गुलाब सिंह के वंशजों ने कभी आवाज उठाई और ना ही कभी जम्मू कश्मीर की सरकार ने और वर्षों तक केंद्र में कायम रही कॉन्ग्रेस सरकार ने इस विषय के बारे में तर्क संगत रूप से सोचा।

जब मैं अपनी यात्रा के दौरान चंद्रभागा नदी के इस जियो पोता घाट पर रूका तो मुझे सुबह प्रोफ़ेसर शरतचंद्र जी से हुई चर्चा याद आ गयी जिसे आपके साथ साझा करना मैंने उचित समझा है।

इस “जियो पोता’ घाट पर स्थित दुर्गा मंदिर के वयोवृद्ध महंत रामानंद दास महाराज से मेरी मुलाकात हुई जो पिछले 36 वर्षों से अधिक समय से यहां रह रहे हैं और इसके साथ ही उनके द्वारा स्थापित एक धार्मिक स्थल श्रीनगर में भी है जिस पर उनका नियमित आना-जाना रहता है।

महंत रामानंद दास ने कहा कि
हमारे जम्मू कश्मीर में अब हालात पहले के मुकाबले ज्यादा बेहतर हो रहे हैं।

महन्त ने कहा कि जम्मू कश्मीर का आम नागरिक चाहे वह हिंदू हो या मुसलमान को इस धारा 370 और आर्टिकल 35 ऐ के बारे में नरेंद्र मोदी द्वारा उठाए गए कदम से बहुत खुश है और हम सभी आराम से रह रहे हैं, कोई विवाद की स्तिथि यहां नहीं है।

मेरे द्वारा पूछने पर महन्त रामानंद दास जी ने यहां तक कह दिया कि हमारे कश्मीर में अब्दुल्ला परिवार, महबूबा मुफ्ती सईद परिवार और कांग्रेस मिलीभगत कर कर केवल अपने निजी हितों को साधते रहे, और कश्मीर के विकास की बात तो दूर रही, बल्कि इन तीनों ने मिलकर हमारी घाटी में उग्रवाद को बढ़ावा दिया था।

जिसका नुकसान दशकों तक हमारे कश्मीर की भोलीभाली आम जनता को ही उठाना पड़ा।

महन्त रामानंद दास ने कहा कि हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हमेशा आभारी रहेंगे और प्रभु से मेरी तो यह विनती है कि ऐसा प्रधानमंत्री 10 से 15 वर्ष तक लगातार और रहे, ताकि मां भारती का वर्षों से कलुषित दामन पूर्ण रूप से साफ हो सके।

अखनूर में इसी जगह मेरी कई युवाओं से भी बातें हुई और सभी युवा केंद्र सरकार के उठाये गए कदम से प्रसन्न और अपने सकारात्मक भविष्य के प्रति आशान्वित नजर आये।

मेरे द्वारा किए गए संवाद के विडियो आप सभी के अवलोकनार्थ प्रेषित कर रहा हूं, ताकि पूरे देश को पता चले कि जम्मू कश्मीर का आमनागरिक खुश है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जम्मू कश्मीर का निवासी भारत के प्रधानमंत्री के रुप में आगामी 15 वर्षों तक लगातार देखना चाहता है और वहां स्थिति सामान्य है केवल कुछ लोग दुष्प्रचार के रूप में झूठ का प्रसार करने में लगे हुए हैं।

डॉक्टर आलोक भारद्वाज
स्वतंत्र राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषक