Pm modi bjp
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Jaipur news.

– एयर स्ट्राईक के बाद कांग्रेस भी बदलेगी राजस्थान में अपनी चुनावी रणनीति।

राजस्थान में सत्तारूढ़ कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने ही लोकसभा चुनावों से पहले ही अपने मिशन-25 के लिए “होमवर्क” करना शुरू कर दिया है।

जहाँ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलेट के बीच रस्साकस्सी के बीच मैदान में उतरने वाली कांग्रेस “फीडबेक” के आधार पर प्रत्याशियों के चयन में जुटी हैं।

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वहीं पिछली बार की तरह सभी 25 सीटों पर फिर से जीत की उम्मीद में BJP ने इस बार अपने एक तिहाई मौजूदा सांसदों के चेहरों को बदलने का संकेत देते हुए “छंटनी अभियान” पर काम शुरू कर दिया गया है।

लोकसभा चुनाव में राजस्थान मिशन-25 को हासिल करने में जुटी सत्तारूढ़ कांग्रेस पिछले 2 महीने से लगातार प्रत्याशियों के चयन को लेकर मंथन में जुटी है।

जमीनी स्तर से मिले फीडबैक के आधार पर कांग्रेस ने एक दर्जन सीटों पर अपने नाम तय भी कर लिए थे लेकिन देश में “एयर स्ट्राइक” के बाद बदले माहौल के चलते अब कांग्रेस अपनी रणनीति बदलने जा रही है।

अपने हारे हुए सांसद और विधायक से लेकर वर्तमान मंत्रियों को भी चुनाव लड़ने का मौका नहीं देने की बात करने वाली राजस्थान कांग्रेस ने अब एयर स्ट्राइक के बाद कांग्रेसी टिकट वितरण में कोई भी जीताऊ उम्मीदवार के अलावा किसी भी तरह का कोई पैरामीटर नहीं रखना चाहती है।

वैसे उपमुख्यमंत्री और PCC अध्यक्ष सचिन पायलट शुरू से ही यह कह रहे हैं की उनके परिवार से कोई चुनाव नहीं लड़ेगा और अभी बड़े पदों पर मौजूद सभी नेताओं से भी यही उम्मीद की थी, लेकिन अब नए पैरामीटर की बात कह चुनावी संग्राम में कूदने की बात कह रहे हैं।

उधर पिछले लोकसभा चुनाव में राजस्थान की सभी 25 सीटें जीतने वाली BJP करीब तीन माह पूर्व संपन्न विधानसभा चुनाव में 1.5 फीसदी वोटों के मामूली अंतर से चुनाव चुनाव हार गई थी। अब मिशन-25 की तैयारियों में BJP सूबे की सभी संसदीय सीटों पर एक बार फिर कब्जा करने की रणनीति के तहत काम कर रही है।

पार्टी नेतृत्व सर्वे और फीड़बैक के आधार पर बाड़मेर के सांसद कर्नल सोनाराम, जालोर-सिरोही सांसद देवजी पटेल, नागौर सांसद और केन्द्रीय मंत्री सी.आर.चौधरी, झुंझुंनू सांसद संतोष अहलावत, सीकर सांसद सुमेधानंद सरस्वती, बांसवाड़ा सांसद मानशंकर निनामा एवं करौली-धौलपुर सांसद डॉ.मनोज राजोरिया के टिकट काटे जाने पर गंभीरता से विचार भी कर रही है।

हालांकि, वसुंधरा राजे इनमें से सी.आर.चौधरी, डॉ.मनोज राजोरिया, रामचरन बोहरा और कर्नल सोनाराम को फिर से टिकट दिए जाने के पक्ष में है।

लेकिन इनके क्षेत्र में बने माहौल और जयपुर में तो पूर्व राजपरिवार की सदस्य दीया कुमारी के चुनाव लड़ने की जिद ने पार्टी को कशमकश में डाल रखा है।

इन सबके बीच पार्टी का यही दावा है की पीएम नरेंद्र मोदी के 5 साल की उपलब्धि और अशोक गहलोत सरकार की इन तीन महीनों की नाकामी उन्हें फिर से सभी सीटों पर जीत दिलाएगी।

वैसे साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में BJP राज्य की सभी 25 सीटों पर चुनाव जीती थीं, लेकिन इनमें से अजमेर और अलवर सांसदों के असामयिक निधन के कारण उप चुनाव हुए तो इन दोनों सीटों पर कांग्रेस जीत गई।

वहीं, विधनसभा चुनाव में दौसा सांसद हरीश मीणा भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए। ऊपर से राजस्थान की सत्ता भी अब उसके हाथ से निकल गयी है।

ऐसे में अब बीजेपी अपने उन कुछ रसूखदार नेताओं की घरवापसी की तैयारी में है जो विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने से बागी हो चुनाव मैदान में कूदे थे।

गत वर्ष दिसंबर महीने में हुए विधानसभा चुनाव में BJP के 180 प्लस के लक्ष्य को धराशायी करते हुवे उसे महज 73 पर सिमटा देने वाली सत्तारूढ़ कांग्रेस मतभेद भूलकर एकजुट होकर आगे बढ़ने की बात कह रही है।

हालांकि, दोनों ही दल के बड़े नेता यह जानते हैं की विधानसभा चुनाव की तुलना में लोकसभा चुनाव के समीकरण बेहद अलग होते हैं।

लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी के पास एक निश्चित जनाधार के साथ लोकसभा सीट पर आने वाले विधायकों का समर्थन भी उसके पास होना बेहद लाजमी है।

ऐसे में यही देखना दिलचस्प होगा की नरेंद्र मोदी को वापस लाने और उनके सत्ता से हटाने की राजनितिक दलों की यह जंग आखिरकार किस कदर आगे बढ़ेगी।

Credite- Shrivtsan

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