Jaipur

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक और नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल ने भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस में सेंधमारी शुरू कर दी है।

हनुमान बेनीवाल ने अपने ट्विटर अकाउंट के माध्यम से खुले तौर पर कांग्रेस और बीजेपी के उन नेताओं को राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी में शामिल होने का न्योता दिया है, जो पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और वर्तमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की वजह से खुलकर बोल नहीं पाते हैं।

आज से 3 दिन पहले हनुमान बेनीवाल ने ट्विटर के माध्यम से ऐसे नेताओं को राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी में आमंत्रित किया था, जो कांग्रेस और भाजपा में हैं, किंतु पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और अशोक गहलोत के पॉलीटिकल प्रेशर की वजह से सही मुद्दों पर भी आवाज उठाने से सहम जाते हैं।

हनुमान बेनीवाल ने स्पष्ट तौर पर लिखा था, कि जो भी नेता कांग्रेस या भाजपा में हैं, और वसुंधरा राजे और अशोक गहलोत की वजह से सामाजिक मुद्दों को नहीं उठा पा रहे हैं, बोल नहीं पा रहे हैं, दबाव में हैं ऐसे नेता उनके साथ आ सकते हैं, उनका राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी में स्वागत है।

बेनीवाल शामिल करेंगे बीजेपी-कांग्रेस के विद्रोही नेताओं को 1

आपको बता दें कि इसी माह के अंत तक या अगले महीने के शुरुआत में नागौर की खींवसर विधानसभा क्षेत्र और झुंझुनू की मंडावा में विधानसभा उपचुनाव होने हैं।

सूत्रों की मानें तो दोनों जगह पर हनुमान बेनीवाल राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के टिकट पर अपने खुद के दम से उम्मीदवार उतारने का प्लान बना चुके हैं।

लोकसभा में बीजेपी के साथ गठबंधन करने वाले बेनीवाल ने जिस तरह से बीते दिनों पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बहाने पूरी भाजपा को चेतावनी दी है, उससे बिल्कुल साफ है कि हनुमान बेनीवाल इन दोनों विधानसभा सीटों पर उपचुनाव अपने दम पर लड़ेंगे।

उन्होंने दोनों जगह अनौपचारिक तौर पर राजनीति की रैलियां करके स्पष्ट कर दिया है कि दोनों विधानसभा क्षेत्रों में उनकी पार्टी के खुद के उम्मीदवार होंगे, और इसको लेकर वह किसी भी पार्टी के साथ समझौता नहीं करेंगे।

साफ तौर पर हनुमान बेनीवाल ने कहा था कि लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी को फिर से प्रधानमंत्री बनाने के लिए ही उन्होंने बीजेपी के साथ गठबंधन किया था और उस गठबंधन के दम पर कोई यह नहीं समझे कि यह बीजेपी का और रालोपा का हमेशा के लिए गठबंधन हो गया है।

बताया जा रहा है कि मंडावा से कांग्रेस पार्टी रीटा चौधरी को और खींवसर विधानसभा क्षेत्र से हरेंद्र मिर्धा या फिर पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी को टिकट देकर मैदान में उतार सकती है।

गौरतलब यह भी है कि एक बार चुनावी रैली में जनता को संबोधित करते हुए हनुमान बेनीवाल ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि अगर खींवसर विधानसभा क्षेत्र से रामेश्वर डूडी चुनाव लड़ते हैं, तो वह अपना उम्मीदवार नहीं उतारेंगे।

लेकिन यह समय का तकाजा है या कुछ और, हनुमान बेनीवाल फिलहाल किसी भी सूरत में दोनों विधानसभा क्षेत्र पर होने वाले उपचुनाव में पीछे हटने को तैयार नहीं दिखाई दे रहे हैं।

अगर हनुमान बेनीवाल खींवसर विधानसभा क्षेत्र और मंडावा से अपने उम्मीदवार उतारते हैं तो यह न केवल बीजेपी के लिए, बल्कि कांग्रेस के लिए बड़ा संकट सामने आ सकता है।

गौरतलब है कि आज की तारीख में विधानसभा में कांग्रेस पार्टी के 100 विधायक हैं, जबकि बीजेपी के 73 और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के 2 विधायक हैं। 2 बीटीपी और 2 कॉमरेड व 12 निर्दलीय विधायक हैं। साथ ही 6 विधायक बसपा के हैं।

इन दोनों विधानसभा क्षेत्र पर होने वाले उपचुनाव से यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि राज्य की जनता कांग्रेस की सरकार को पसंद करती है या नहीं।

हनुमान बेनीवाल मंडावा में एक चुनावी सभा कर चुके हैं, जबकि क्षेत्र है जहां पर उनकी पकड़ बहुत मजबूत बताई जाती है।

हालांकि उन्होंने अभी तक अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान नहीं किया है, किंतु माना जा रहा है कि मंडावा से दौलत सिंह महला और खींवसर से नारायण बेनीवाल को उम्मीदवार बनाया जा सकता है।

फिलहाल बीजेपी या कांग्रेस में से कोई भी नेता राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के पाले में नहीं आया है, किंतु संभावनाएं जताई जा रही है कि इस उप चुनाव के वक्त कुछ नेता राष्ट्रीय लोक दल पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं।

यदि ऐसा होता है, तो 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव के वक्त बीजेपी और कांग्रेस के लिए रालोपा भी एक नई खतरे की घंटी है।