जयपुर।

निर्दलीय विधायक और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक हनुमान बेनीवाल विधानसभा चुनाव के लिए अपना प्रचार प्रसार बुधवार को शाम 5:00 बजे पूरा कर चुके हैं।

भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस की तरह हनुमान बेनीवाल भी अब अगले 2 दिन तक अपने उम्मीदवारों के पक्ष में अधिक से अधिक मतदान करवाने का प्रयास करेंगे।

7 दिसंबर को मतदान और 11 दिसंबर को परिणाम के बाद राजस्थान में नई सरकार बनेगी। सरकार किसकी बनेगी अभी यह कह पाना बेहद कठिन होगा। लेकिन जिस तरह के समीकरण दिख रहे हैं वह हनुमान बेनीवाल के लिए मुफीद नजर आ रहे हैं।

200 विधानसभा क्षेत्र वाली राजस्थान विधानसभा की 199 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं। अलवर की रामगढ़ विधानसभा सीट पर बहुजन समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी लक्ष्मण सिंह की मृत्यु होने के कारण वहां पर फिलहाल चुनाव स्थगित कर दिया गया है।

राजस्थान को वैसे तो सात संभागों में बांटा गया है। लेकिन मोटे तौर पर राज्य को शेखावाटी, मारवाड़, मेवाड़, बगड़, ब्रज और ढूंढाड़ में बांटकर देखा जाता है। इस लिहाज से राज्य में सीटों पर जीत हार भी उसी के अनुसार निश्चित होती हैं।

राज्य के मारवाड़, शेखावाटी, ढूंढाड़ की कुछ सीटों पर हनुमान बेनीवाल काफी असर डाल रहे हैं, इसलिए राज्य की राजनीति में बेनीवाल को उभरता हुआ राजनेता कहने के साथ ही किंग मेकर कहना फिलहाल मुनासिब भी नहीं, तो कहना कतई गलत भी नहीं होगा।

झुंझुनू, सीकर, जयपुर, नागौर, अजमेर, बीकानेर, जोधपुर, पाली, जैसलमेर की कई सीटों पर हनुमान बेनीवाल के उम्मीदवार काफी सरकार स्थिति में हैं।

हनुमान बेनीवाल ने यहां की 57 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। उनमें से खुद बेनीवाल 40 उम्मीदवारों को जीतने का दावा कर रहे हैं, लेकिन इससे इतर निष्पक्ष रुप से बात की जाए तो बेनीवाल के उम्मीदवार 10 से लेकर 15 सीट तक जीतने में कामयाब हो सकते हैं।

10 या 15 सीट अगर हनुमान बेनीवाल की पार्टी जीती है तो यह बात निश्चित है कि राजस्थान में उनके उम्मीदवार कांग्रेस पार्टी के कम से कम 30 प्रत्याशियों को हराने की जिम्मेदार होंगे।

ऐसे में फिलहाल बहुमत से दूर दिख रही है भारतीय जनता पार्टी के लिए काफी राहत की खबर है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी जिसको वर्तमान में भी बहुमत के साथ 5 साल बाद सत्ता में वापसी का दावा किया जा रहा है, वह एक बार फिर दूर होता नजर आ रहा है।

बहरहाल यह कहा जा सकता है कि राजस्थान में आज की राजनीति की स्थिति को ईमानदारी से विश्लेषण कर देखा जाए तो भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां 80 से लेकर 95 सीट तक जीतने में कामयाब हो सकती है।

अगर चुनाव परिणाम में दोनों पार्टियों को इस तरह से सीटें मिलीं, तो निश्चित है कि हनुमान बेनीवाल की आरएलपी, बहुजन समाजवादी पार्टी और वामपंथियों सहित दूसरी निर्दलीय करीब 20 से लेकर 25 सीटों पर जीत हासिल कर सकते हैं।

1993 और 2008 की भांति राजस्थान में अगर किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिलता है, तो ऐसी स्थिति में आरएलपी, बसपा, वामपंथी और निर्दलीय मिलकर किसी पार्टी के साथ सरकार बनाने में कामयाब हो सकते हैं।

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