पुणे। महाराष्ट्र की भीमा कोरेगांव में युद्ध के 201 साल पूरे होने के मौके पर दलित संगठनों की महारैली होने की संभावना के बीच सुरक्षाकर्मियों की छावनी बना दी गई है।

दलितों के द्वारा शौर्य दिवस के रूप में मनाया जाने वाली इस कार्यक्रम में देश भर से 5 लाख से ज्यादा लोगों के हिस्सा लेने की संभावना के बीच पुलिस प्रशासन मुस्तैद कर दिया गया है।

लाखों लोगों की इस रैली में सुरक्षा व्यवस्था में कोई परेशानी नहीं आए, इसको देखते हुए स्थानीय प्रशासन में 7000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए हैं।

सभी स्थानों पर ड्रोन और सीसीटीवी कैमरे से नजर रखी जा रही है। आपको बता दें कि पिछले साल 1 जनवरी को यहां पर हिंसा भड़क गई थी, जिसमें एक युवक की मौत के बाद पूरे देश में हंगामा हुआ।

पुणे के जिला मजिस्ट्रेट नवल किशोर राम ने बताया कि यहां पर भीमा-कोरेगांव के विजय स्तंभ पर 1 जनवरी 2019 को, यानी आज देश भर से करीब 500000 लोगों के छुटने की संभावना है।

बड़ी संख्या में लोगों के एकत्रित होने के कारण इलाके में किसी तरह की असुविधा नहीं हो, इसके लिए बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों के व्यवस्था की गई है।

व्यवस्था के लिए 500 सीसीटीवी कैमरे, 11 ड्रोन कैमरा और इसके अलावा कई वीडियो कैमरे लगाए गए हैं। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले और बाबा भीमराव अंबेडकर के पोते आनंद राज अंबेडकर रैली को संबोधित करेंगे।

यहां पर विजय स्तंभ के करीब हालात सामान्य बनाए रखने के लिए और असामाजिक तत्वों को रोकने के लिए पुलिस ने विजय दिवस से पहले ही 12 सौ लोगों के खिलाफ प्रिवेंशन एक्शन लिया है।

इनमें कबीर कला मंच के एक्टिविस्ट और दक्षिणपंथी नेता मिलिंद एकबोटे के संगठन के लोग शामिल हैं, इन लोगों को पुलिस ने कोरेगांव से दूर रखने का निर्देश दिया है।

पुणे पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर भी नजर रखी जा रही है। ग्रामीण एसपी संदीप पाटील ने बताया कि इस रैली से पहले सोशल मीडिया पर किसी तरह की नफरत नहीं पहले इस तरह के संदेशों को स्क्रीन करके देखा जा रहा है।

अफवाहों पर लगाम कसने के लिए इलाके में अभी इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है। स्थानीय पुलिस ने कई लोगों के खिलाफ सुरक्षा के मद्देनजर कार्रवाई की है।

साथ ही साथ 12 एसटीएफ की कंपनियां, रैपिड एक्शन फोर्स, होमगार्ड्स साथ बम डिस्पोजल स्क्वायड की टीमें भी यहां पर तैनात की गई है।

उल्लेखनीय है कि 1818 में यहां पर हुई लड़ाई में ब्रिटेन की सेना, जिसमें बड़ी संख्या में महार सैनिक शामिल थे ने पेशवा या ब्राह्मणों शासकों को बुरी तरह से हराया था।

इस मौके पर लाखों की संख्या में दलित हर साल 1 जनवरी को विजय स्तंभ पर एकत्रित होते हैं।

यह लड़ाई इतिहास में भीमा कोरेगांव के नाम से दर्ज है। इसी के उपलक्ष में देश के दलित संगठनों की तरफ से यहां हर साल कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।