nationaldunia

जयपुर।

राजस्थान विधानसभा 12 दिसंबर को भंग कर दी गई थी, लेकिन उसके बाद 19 दिसंबर को निवर्तमान विधानसभाध्यक्ष कैलाश चंद्र मेघवाल द्वारा 40 विधायकों को आवास आवंटित करने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है।

इस मामले में मेघवाल ने कहा है कि उन्होंने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल किया है, वहीं राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक हनुमान बेनीवाल ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है।

बेनीवाल ने कहा है कि जब विधानसभा ही 12 दिसंबर को भंग हो गई थी, तो अध्यक्ष के पास अधिकार कैसे रह सकते हैं? उन्होंने कहा है कि सदन के भीतर सदस्यों से बत्तमीजी से बात करने वाले मेघवाल अब तानाशाही पर आ गए हैं।

इधर, मेघवाल ने कहा है कि आवास आवंटन करना उनका अधिकार है और इससे खुद राज्यपाल भी नहीं रोक सकते। बताया जा रहा है कि मेघवाल ने अपने चहेते विधायकों को यह आवास आवंटित किए हैं।

इस प्रकरण को लेकर अब विवाद बढ़ता जा रहा है। संविधान के अनुसार किसी भी विधानसभाध्यक्ष को विधायकों को आवास आवंटित करने का अधिकार है, लेकिन उसको सचिव से लिखित अनुमति लेनी अनिवार्य है।

दूसरी तरफ विधानसभा सचिव दिनेश कुमार जैन का कहना है कि आवास आवंटित करने का अधिकार केवल आवास कमेटी के पास है, लेकिन विधानसभा भंग होने के साथ ही कमेटी स्वत: ही निष्प्रभावी हो जाती है।

बेनीवाल का कहना है कि मेघवाल अपनी तानाशाही को जारी रखते हुए पांच साल की भांति ​सदन की मर्यादाएं तार तार करने में लगे हैं। उन्होंने मेघवाल पर भ्रष्टाचार कर आवास आवंटन का आरोप लगाया है।