nationaldunia

जयपुर।
राजस्थान कर्मचारी चयन आयोग की एक बड़ी गलती का खामियाजा प्रदेश के सात हजारा से ज्यादा अभ्यर्थियों को भगुतना पड़ रहा है।

आरपीएससी ने मुख्य परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी है और परीक्षा देने के लिए तैयार होने वाले अभ्यर्थी अभी तक पूरी तरह से तैयार ही नहीं है। इसके चलते राज्य के 7145 छात्रों ने और समय मांगा है।

दरअसल, आरपीएससी की ओर से जारी किए गए प्री परीक्षा के परिणाम में ओबीसी वर्ग की कट ऑफ 99.33 फीसदी थी।

आरपीएससी के परिणाम में व्याप्त विसंगतियों के खिलाफ परीक्षार्थी भूपेंद्र डूडी और सुरज्ञान सिंह समेत अनेक युवा हाईकोर्ट की शरण में गए थे।

सुनवाई के बाद 1 दिसंबर को कोर्ट ने आरएएस मुख्य परीक्षा के लिए ओबीसी के उन अभ्यर्थियों को भी शामिल करने का निर्णय दिया, जो जनरल की 73% से अधिक होने के कारण परीक्षा में बैठने के योग्य नहीं थे।

गौरतलब है कि आरएएस परीक्षा का आयोजन 5 अगस्त 2018 को किया गया था, और इसका परिणाम 23 अक्टूबर 2018 को घोषित किया गया था।

इस परिणाम में जनरल पुरुषों की कट ऑफ 71.14% रही, जबकि ओबीसी के पुरुषों की 99.33% रही। इसी प्रकार ओबीसी गर्ल्स की 79% कट ऑफ रही थी।

इसी तरह से एससी 75.14% और एसटी की मेरिट 55.93% रही। सामान्य वर्ग की गर्ल्स की मेरिट 66% रही।

राजस्थान उच्च न्यायालय ने अपने फैसला में कहा कि संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार आरक्षित वर्ग की मेरिट अनारक्षित वर्ग से ज्यादा नहीं हो सकती।

खींवसर से विधायक और आरएलपी के संयोजक हनुमान बेनीवाल ने चेतावनी देते हुए कहा है कि आरपीएससी की गलती से आरएएस मुख्य परीक्षा में पहले तो ओबीसी वर्ग के साथ खिलवाड़ हुआ।

अब 7145 अभ्यर्थियों को शामिल किया गया, मगर मात्र 10 दिनों का समय उन्हें मिल रहा है जो उनके साथ अन्याय है। 9-10 दिनों में 16 विषयों की तैयारी करना असम्भव सा है।

प्रशासन और आयोग इस बात को गंभीरता से लें और मुख्य परीक्षा के लिए पर्याप्त तैयारी करने के लिए सफल अभ्यर्थियों को समय दे, वरना हम चुप नहीं बैठेंगे।

अधिक खबरों के लिए हमारी वेबसाइट www.nationaldunia.com पर विजिट करें। Facebook,Twitter पे फॉलो करें।