satish poonia hanuman beniwal
satish poonia hanuman beniwal

जयपुर।

लोकसभा चुनाव से पहले रालोपा के संयोजक हनुमान बेनीवाल ने जब भाजपा के साथ गठबंधन करने के लिये प्रदेश कार्यालय में प्रवेश किया था, तब वर्तमान बीजेपी अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया ने पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में कहा था कि ‘हनुमान बेनीवाल मजबूरी नहीं, मजबूती हैं’, लेकिन महज 6 महीने में ही हालात यह हो गये हैं कि हनुमान बेनीवाल भाजपा के लिये मजबूती के बजाये मजबूरी होते हुये नजर आने लगे हैं।

दीपावली के ठीक एक दिन पहले उनको हनुमान बेनीवाल को नसहीत देते हुये कहना पड़ा है कि ‘हनुमान बेनीवाल अपनी पार्टी को संभालें, भाजपा में दखल नहीं दें’, इससे साबित होता है कि अब हनुमान बेनीवाल भाजपा के लिये मजबूती के बजाए मजबूरी बन चुके हैं।

गौरतलब है कि दो दिन पहले ही हनुमान बेनीवाल ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और पूर्व मंत्री यूनुस खान पर खींवसर के उपचुनाव में कांग्रेस को खुलकर समर्थन देने का गंभीर आरोप लगाते हुये कहा था कि भाजपाध्यक्ष सतीश पूनिया, राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखकर इन दोनों नेताओं के खिलाफ सख्त एक्शन लेने की मांग कर डाली।

यह पहला मौका नहीं था, जब बेनीवाल ने वसुंधरा राजे और यूनुस खान को आड़े हाथों लिया था। वरन खींवसर में उपचुनाव के प्रचार के दौरान रैलियों में कई बार वसुंधरा राजे और यूनुस खान पर जमकर प्रहार किये थे।

अब भाजपा के लिये समस्या यह है कि एक ओर जहां बेनीवाल नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व पर भरोसा जताते हैं, वहीं वसुंधरा राजे और यूनुस खान पर हमला बोलकर गठबंधन के धर्म में दखलअंदाजी करते हैं, इसके चलते भाजपा के लिये परेशानी पैदा हो रही है।

इस समस्या को देखते हुये सतीश पूनिया को बार—बार पत्रकारों के समक्ष हनुमान बेनीवाल को नसीहत देने का काम करना पड़ता है। यदि सतीश पूनिया ऐसा नहीं करते हैं तो उनको अपने ही दल में अन्य नेता घेरने का काम करते हैं, और यदि करते हैं तो गठबंधन का धर्म संकट में आ जाता है।