—पंजाब से नहरो मे आने वाले गंदे पानी, पीएम फसल बीमा योजना, किसानों की आत्महत्या सहित विभिन्न मामलों को रखा देश की संसद में

Delhi
राजस्थान के नागौर से राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी से सांसद हनुमान बेनीवाल ने देश की संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चल रहे धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते हुए राजस्थान को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग की।

बेनीवाल ने किसान और जवानों के कई मुद्दों को सदन में रखा। उन्होंने धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते हुए कहा कि आज़ादी के दशकों बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक लेकर देश के प्रत्येक व्यक्ति का सीना गर्व से चौड़ा होता है।

हम इस देश के वासी हैं, क्योंकि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने राष्ट्रहित में अनेकों फैसले लिए हैं, जो पहली बार लिए गए हैं।

हनुमान बेनीवाल ने प्राकृतिक आपदाओं में पूर्व में जो नियम निर्धारित हैं, उनमें बदलाव की मांग की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से जो आर्थिक सहायता राज्यों को मिलती है, उसकी सहायता राशि बढ़ानी चाहिए।

साथ ही उन्होंने पैरामिलिट्री के जवानों और पुलिस के जवानों को भी सेना की तर्ज पर शहीद का दर्जा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि पैरामिलिट्री और पुलिस के जवान यदि कर्तव्य पर अपने प्राणों को न्योछावर करते हैं तो उन्हें भी केंद्र की सरकार को शहीद का दर्जा देने हेतु आवश्यक अधिनियम लाना चाहिए।

बेनीवाल ने कहा कि राष्ट्रपति ने अभिभाषण में बढ़ते जल संकट के संबंध में गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि पंजाब से राजस्थान में जो पानी सिंचाई व पीने के लिए नहरों के माध्यम से आता है, उसमें फैक्ट्रियों के रसायन युक्त गंदे पानी को डाल दिया जाता है, जिसकी वजह से कैंसर जैसी घातक बीमारियां राजस्थान के लोगों को हो रही है।

इसलिए केंद्र सरकार को इस मामले में दखल देते हुए पंजाब सरकार को निर्देशित करते हुए नहरों के पानी में जो गंदा पानी सम्मिलित किया जा रहा है, उसको तत्काल बंद करवाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जिस तरह गांधी के आदर्शों पर चलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन के माध्यम से देश में जिस तरह प्रेरणा देते हुए आंदोलन का रूप दिया।

उसी तर्ज पर पानी किस तरह बचाया जा सके, उस दिशा में हमें सोचने की आवश्यकता है। उन्होंने सदन में बोलते हुए कहा कि राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम की रिपोर्ट जब हम देखते हैं, तो अत्यंत गंभीर रिपोर्ट हमें देखने को मिलती है।

क्योंकि भूजल का लगातार गिरता स्तर एक बहुत बड़ी चिंता हम सबके सामने खड़ी कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने बड़ी इच्छा शक्ति दिखाते हुए पेयजल की समस्याओं से निपटने के लिए जलशक्ति मंत्रालय का गठन किया और मिशन मोड पर पानी को बचाने हेतु कार्य शुरू किया वो निश्चित तौर पर अच्छा परिणाम देश के लिए देगा।

बेनीवाल ने कहा कि अभिभाषण के पैरा संख्या 23 में राष्ट्रपति ने मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था के संबंध में बात कही। उन्होंने देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने कहा कि देश के विकास का रास्ता गांव के खेत खलिहान से होकर निकलता है।

इसलिए हम सबको मिलकर किसान को किस तरह बचाना है। किसान को समृद्ध किस तरह बनाना है, उस दिशा में कार्य करना है।

उन्होंने 2 दिन पूर्व गंगानगर जिले में किसान द्वारा सुसाइड नोट पर राजस्थान के मुख्यमंत्री का नाम लिख कर आत्महत्या कर देने का जिक्र करते हुए कहा कि इस मामले में मुख्यमंत्री पर आपराधिक मुकदमा दर्ज होना चाहिए।

क्योंकि चुनाव में आने से पूर्व उन्होंने संपूर्ण कर्ज माफी की बात कही थी, मगर उसके बाद सरकार पलट गई।

बेनीवाल ने प्रधानमंत्री परंपरागत खेती योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इस योजना में प्रत्येक ब्लॉक में कम से कम 50% जैविक खेती कैसे की जाए इस दिशा में ठोस कार्ययोजना को तत्काल मूर्त रूप देने की जरूरत है।

उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को बहुत बड़ी क्रांतिकारी योजना बताते हुए कहा कि पहली बार ऐसा हुआ है कि देश के किसान के खाते में दिल्ली से निकला हुआ पैसा सीधा मिल रहा है।

साथ ही उन्होंने केंद्र की सरकार से मांग करते हुए कहा की राजस्थान को पंजाब से और हरियाणा से जो निर्धारित पानी देना तय किया हुआ है, को पानी नहीं मिल रहा है।

इसलिए केंद्र सरकार को इस मामले में दखल देना चाहिए। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार से राजस्थान में पेयजल से जुड़ी लंबित परियोजनाओं को स्वीकृति देने की मांग की।

सांसद बेनीवाल ने सदन में कहा कि एक विशेष राज्य के दर्जे के लिए जो मापदंड निर्धारित हैं, वो राजस्थान सारे पूरा करता है।

उन्होंने कहा कि अरावली पर्वतमाला, थार का मरुस्थल पाकिस्तान से सटी हुई अंतरराष्ट्रीय सीमा सहित मदन राजस्थान पूरा कर रहा है राजस्थान को केंद्र सरकार विशेष राज्य का दर्जा दिया जाए।

हाल ही में बाड़मेर जिले के जसोल में धार्मिक कार्यक्रम के दौरान हुई मौतों के मामले में आयोग बनाकर जांच करवाने की मांग को दोहराया साथ ही उन्होंने कुछ वर्षों पूर्व जोधपुर में हुई मेहरानगढ़ दुखान्तिका की तरफ भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा की इसमें चोपड़ा आयोग का गठन हुआ। आयोग ने दोषियों के खिलाफ मुकदमे की सिफारिश की उसके बावजूद मामले को दबा दिया गया।