Jaipur

चुरू जिले के सरदारशहर के पास सोनपालसर गांव में जिस नेमीचंद नामक व्यक्ति की पुलिस थाने में मारपीट के दौरान मौत हुई थी, उस मामले की तह तक जाने के लिए “नेशनल दुनिया” की टीम ने जयपुर से लेकर सरदारशहर के सोनपालसर तक का दौरा किया।

इस दौरान इस घटना के कई खुलासे सामने आए। हम इस खबर को दो पार्ट में तह तक पहुंचकर सच्चाई से रूबरू करवाएंगे।

पहले ‘पार्ट’ में आपको बता रहे हैं कि मृतक नेमीचंद की मौत केवल पुलिस के पीटने से नहीं हुई थी, बल्कि चोरी के आरोप में उससे पहले गांववालों ने उसे पकड़कर खूब धुन दिया था।

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हमने जयपुर के सांगानेर से सीकर होते हुए चूरू और चूरू से सरदारशहर, सरदारशहर से आगे 52 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सोनपालसर गांव पहुंचकर सच्चाई जानने का प्रयास किया।

इस दौरान हमने एक दर्जन से ज्यादा गांव वालों से बात की इसके साथ ही नेमीचंद के घर पहुंचे। जहां पर उसके पिता निरानाराम और सगे भाइयों जगदीश और शंकरलाल से भी बात की।

उसके मामा और उसके जीजा मगाराम से भी हमने सच्चाई को जानने का पूरा प्रयास किया। इसके अलावा पास ही के धीरासर गांव में, जहां पर नेमीचंद ने चोरी की थी, उस घर पर पहुंचकर कालूराम चौधरी से भी बात की।

साथ ही साथ रंगियासर गांव, जो कि यहां की पंचायत है, उसके सरपंच संतोष से भी मुलाकात कर सच को समझने का प्रयास किया है।

आपके सामने हम इन दोनों स्टोरी में बताएंगे कि नेमीचंद के साथ शुरू से क्या घटना हुई और पुलिस थाने में किस तरह का बर्ताव किया गया।

उसके बाद उसकी भाभी को उठाया गया और उसके साथ भी थाने में ज्यादती की गई, लेकिन इसके साथ ही एक चीज और जो पुलिस की तरफ से सामने आनी बाकी है, उसके बारे में भी सच बताने की कोशिश करेंगे।

17 जुलाई को सुबह करीब 7 बजे जयपुर के सांगानेर से चलकर दोपहर करीब 2:00 बजे सोनपालसर पहुंचे। दिन भर से थके हारे हम सीधे नेमीचंद के घर पहुंचे, जहां पर जाजम पर कुछ लोग बैठे हुए थे।

यहीं पर बैठे थे सादुलशहर के पूर्व विधायक मनोज न्यांगली की और उनके चारों तरफ बैठे हुए थे स्थानीय कुछ ग्रामीण, जो कपड़ों और रहन-सहन से या निचली जाति से संबंध रखते हुए नजर आ रहे थे।

लेकिन उनके बीच में 3 लोग राजपूत समाज से बैठे हुए थे, जो इस परिवार को संबल देने के लिए आए हुए थे। हमने वहां पहुंचकर सबसे पहले जाजम पर बैठे लोगों की तस्वीरें उतारी उसके बाद नेमीचंद के पिता ने निरानाराम से उसके घर के बारे में बात की।

वहां पर एक मिट्टी से बना हुआ कच्चा घर था, वही उनका घर बताया गया। उन घरों के पीछे की तरफ दो तीन महिलाएं बैठी हुई थी, जो जाजम पर पुरुषों के पास है नहीं बैठ सकती है, यह राजस्थान की परंपरा है।

जाजम पर बैठे अन्य लोगों से हमने बात की, उस में मृतक नेमीचंद के मामा जो कि सारे मामले को संभालने का प्रयास कर रहे थे, उन्होंने बताया कि नेमीचंद को पुलिस कब और कहां से पकड़ कर ले गई।

यह किसी को पता नहीं है। बाद में केवल यह बात सामने आई थी कि धीरासर में उसको चोरी करने के आरोप में पुलिस पकड़ कर ले गई है।

नेमीचंद की जीजा मगाराम ने बीच में बोलते हुए बताया कि उस पर पुलिस ने 5 लाख रुपये चोरी होने का आरोप लगाया है, जिसमें तीन लाख के गहने और 2 लाख रुपये नगद चोरी की बात सामने आई है।

उसी के आरोप में 30 जून को उसको धीरासर गांव से उठाया गया, जहां पर गांव वालों ने उसको पकड़ लिया था। इस बीच हमने नेमीचंद के छोटे भाई जगदीश से बात की।

हालांकि वह बोलने को तैयार नहीं था, लेकिन काफी कुरेदते हुए हमने जानने का प्रयास किया कि वास्तविक घटना क्या थी।

उसने बताया कि नेमीचंद अपने सबसे बड़े भाई सीताराम और भाभी के साथ पड़ोस में ही दूसरे गांव में रहता था। वह अनपढ़ भी है और कंवरा भी।

वह गांव में भेड़ बकरियां चराकर अपना पेट भरता था और कभी-कभी गांव वालों के साझे में खेती भी करता था। सबसे छोटे भाई शंकरलाल ने बताया कि नेमीचंद के बारे में पूरा गांव जमानत दे सकता है कि वह चोर नहीं था।

वह कहता है कि इसके बावजूद पुलिस ने उसको क्यों उठाया और क्यों मारा, यह समझ से परे है?

इस बीच जाजम पर बैठे हुए राजपूत समाज के एक व्यक्ति ने कहा कि कुछ समय पहले, करीब 6 माह पूर्व उसने धीरासर के कालूराम चौधरी के यहां पर बकरियां चराने का काम करता था।

इसी दौरान सामने आया कि नेमीचंद ने कालूराम की एक बकरी चुरा कर बेच दी थी। जिसके बाद कालूराम ने उसको नौकरी से निकाल दिया।

आगे बताते हैं कि कुछ दिनों पहले कालूराम उसको वापस बकरी चराने के लिए बुलाना चाहता था, लेकिन नेमीचंद नहीं जा रहा था।

इसके साथ ही यह भी पता चला कि इसी दौरान नेमीचंद ने धीरासर में चोरी की और गांव वालों ने उसको दबोच लिया। दबोचकर उसके साथ मारपीट की गई और पुलिस के आने के बाद उसको पुलिस के सुपुर्द कर दिया।

यह घटना 30 जून की बताई जाती है, शाम का टाइम करीब 5:00 बजे का रहा होगा। इसके आगे नेमीचंद के मामा बताते हैं कि उनको इस घटना की जानकारी तब मिली जब 4 तारीख को यानी 4 जुलाई को उसकी भाभी को पुलिस उठा ले गई।

4 जुलाई को ही नेमीचंद को उसके घर तफ्तीश के लिए पुलिस लेकर आई थी। इस दौरान पुलिस के लोग कह रहे थे कि “आज इसका आखिरी दिन है।”

जब गाड़ी में उसको वापस पटकर ले जा रहे थे, तब वह चिल्ला रहा था कि “यह लोग मुझे मार डालेंगे।” उसके पिता ने निरानाराम जो कि अहसास से नजर आ रहे हैं।

उन्होंने बीच में बीच में बोलने का प्रयास किया कहा कि पुलिस वाले उसके साथ बेरहमी से बर्ताव कर रहे थे। उसके यहां पर हमारे सामने भी थप्पड़एं मारी गई थी, और मारपीट करने के निशान उसके चेहरे पर और शरीर को साफ नजर आ रहे थे।

हमने इसके बाद सोनपालसर गांव में प्रवेश किया, जहां से एक व्यक्ति जो कि मेघवाल समाज से हैं और गांव में ही किसी के साझे में जमीन बुवाई कर अपना जीवन यापन करता है।

उसके बड़ा बेटा है, जो आठवीं कक्षा में पढ़ता है और छोटा वाला पांचवी कक्षा में पड़ता है। काफी कुरेदने पर उसने बताया कि नेमीचंद चोरियां करता था और काफी पहले से इस बात की जानकारी सभी को थी।

उसने बताया कि जिस दिन पुलिस ने उसको पकड़ा, उस दिन गांव वालों ने उसको चोरी करते हुए पकड़ा था और उसकी जोरदार पिटाई कर दी थी। पुलिस ने ले जाकर थाने में क्या किया इस बारे में उनको कोई जानकारी नहीं है।

हम कुछ पीछे चलते हैं तो नेमीचंद के मामा बताते हैं कि नेमीचंद की भाभी को पुलिसवालों ने इसलिए उठाया था, क्योंकि नेमीचंद ने कहा था कि चोरी का सारा माल वह ले जाकर अपनी भाभी को देता था।

इसके बाद भाभी को ले जाकर उसके साथ भी थाने में मारपीट की गई। नेमीचंदके मामा का दावा है कि नेमीचंद की भाभी के साथ पुलिस वालों ने थाने में कस्टडी के दौरान काफी ज्यात्ति की थी और इसके बाद जब नेमीचंद की मौत हो गई।

तब रात को 10:00 बजे, यह समय 5 जुलाई का था, उस दिन रात को 10:00 बजे पुलिस थाने से कई गाड़ियां आई, जिसमें नेमीचंद की लाश थी। पुलिस वालों ने उसकी लाश को तुरत फुरत में उतारा।

इसके बाद पुलिस वालों ने जबरदस्ती अंतिम संस्कार करने के लिए बोला गया। गांव वालों ने बड़ी मुश्किल से लकड़ियां जुटाई और रात को 2:00 बजे उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

2:00 बजे बाद पुलिस गांव से गई और कुछ लोगों के द्वारा खाली कागज पर हस्ताक्षर करवा लिए गए। जिसमें मृतक नेमीचंद के पिता ने निरानाराम भी थे।

उन्होंने बताया कि दूसरे दिन पुलिस ने कहा कि नेमीचंद की भाभी उनके पास है और उसको जाकर ले आएं

दूसरे दिन कुछ लोग थाने पहुंचे, लेकिन उससे पहले ही वह उसको दूसरे थाने ले जा चुके थे। फिर इसके बाद 6 जुलाई को शाम करीब 5:00 बजे पुलिस की गाड़ियां और नेमीचंद की भाभी को निढ़ाल आस्था में यहां पर पटक कर चले गए।

साथ ही यह भी कहा कि इस बारे में अगर किसी को बताया गया तो उसके साथ भी यही हालत होगी, उन्होंने कहा कि एक थानाधिकारी जिसका नाम रणवीर सिंह है, उसके अलावा किसी पुलिस वाले का नाम वह लोग नहीं जानते हैं।

मृतक नेमीचंद के जीजा मगाराम ने बताया कि सारी घटना की जानकारी उनको 7 जुलाई को मिली, जब नेमीचंद का अंतिम संस्कार भी किया जा चुका था। उसके बाद से वह लोग यहां पर हैं।

तमाम बातचीत में स्थानीय गांव रंगियासर और यहीं के सोनपालसर के कुछ लोग भी बीच-बीच में कुछ घटना का जिक्र करते हुए पाए गए।

इसके बाद हम वहां से करीब 4:00 बजे वापस रुख किया और रतनगढ़ होते हुए लक्ष्मणगढ़, सीकर होते हुए रात को करीब 9:00 बजे जयपुर पहुंचे।