—स्मैक में बर्बाद दो दोस्तों की कहानी, राजधानी के कई थाना इलाकों में बिक रहा है यह जहर।
जयपुर।
बड़े घरों के बिगड़ैल रईसजादे नशे की लत का शिकार होकर अपराध की दलदल में इस कदर डूब गए हैं कि इन्हें अब छोटी से छोटी घटना करने से भी गुरेज नहीं है।

ऐसी ही एक दास्तां बड़े घरों के दो लाडलों की है जो स्मैक की नशे की लत को पूरा करने के लिए अपराध की डगर पर चल पर्स, मोबाइल आदि छीनने की वारदातों को अंजाम देने लगे।

पुलिस ने एक मामले में इन दोनों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, वहां से दोनों को जेल भेज दिया गया। कहानी यहीं ख़त्म नहीं होती, सवाल यह उठता है कि राजधानी में इतनी आसानी से नशे की सामग्री युवाओं को कैसे उपलब्ध हो जाती है जबकि पुलिस अपने इलाके में लगातार गश्त और नशा सामग्री पर लगाम का दावा ठोकती रहती है।

शहर के कई इलाके ऐसे हैं जहां यह धीमा जहर बहुत आसानी से मिल जाता है। पुलिस यदि अपने मुखबिर तंत्र को और मजबूत कर नशे की सामग्री बिकनेवाली जगहों पर कार्रवाई करे तो निश्चित ही नशे की लत में डूब रहे युवाओं को सही राह पर लाया जा सकता है।

यह है मामला
आदर्श नगर थाने में 26 जून को गोनेर रोड निवासी हिमांशु शर्मा (24) ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह जनता कॉलोनी स्थित आईसीआईसीआई बैंक के एटीएम से रूपए निकालकर अपने घर की तरफ जा रहा था।

तभी गोविन्द मार्ग से पहले जनता कॉलोनी मोड़ पर तीन लड़के एक्टिवा स्कूटी पर सवार होकर आए और उसकी बाइक को टक्कर मार दी। साइड में चलने की बात को कहकर धक्का-मुक्की करने लगे और जेब में रखे कुल 4640 रुपए निकालकर मौके से फरार हो गए।

पीड़ित ने जाते-जाते बदमाशों की एक्टिवा के नंबर नोट कर लिए और पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच पड़ताल शुरू की।

यूं आए पकड़ में
पुलिस ने एक्टिवा के नम्बरों के आधार पर मामले की जांच-पड़ताल शुरू की तो गाड़ी मनिहारों का रास्ता, कोतवाली निवासी कादिर (21) के नाम से रजिस्टर्ड निकली, पुलिस उक्त जगह पर पहुंची।

कादिर को वहां से दस्तयाब कर वारदात के बारे में पुछा तो उसने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया एवं वारदात में शामिल चाणक्य मार्ग निवासी आजम (23) के बारे में भी पुलिस को बताया।

इस पर पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, वहां से दोनों को दो दिन के पुलिस रिमांड पर सौंपा गया। बाद में दोनों को जेल भेज दिया गया।

नशा ही सब-कुछ
पूछताछ में कादिर और आजम खान ने पुलिस को बताया की उनके लिए नशा ही सब-कुछ है और स्मैक की लत इस कदर पड़ी कि जब परिजनों के द्वारा दिए गए खर्चे के रुपयों से नशे की लत पूरी नहीं हो पाई तो अपराध की राह पर चल पड़े।

दोनों आपस में अच्छे दोस्त है और ताज्जुब कि बात यह है कि कादिर के पिता एक सहकारी कॉपरेटिव बैंक के मैनेजर है और आजम खान के पिता का चांदी के वर्क का व्यवसाय है।

इतना अच्छा परिवार होने के बावजूद स्मैक की लत ने दोनों को अपराधी बना दिया। आजम के खिलाफ ब्रह्मपुरी और सुभाष चौक थाने में दो मामले दर्ज है जिनमे एक मामला आर्म्स एक्ट का है वहीं कादिर का यह पहला मामला बताया जा रहा है।

नशे में धुत्त होकर देते वारदात को अंजाम
जांच-अधिकारी एसआई प्रहलाद नारायण ने बताया कि वारदात के समय दोनों आरोपित स्मैक के नशे में इस कदर धुत्त हो जाते थे कि दोनों को यह तक पता नहीं होता था कि किसके साथ और वारदात को कहां अंजाम दिया गया।

पुलिस करें सख्ती तो बचाया जा सकता है युवाओं का भविष्य
राजधानी के कई थाना इलाकों में स्मैक, चरस, गांजा खुलेआम बिक रहा है जिसका सीधा असर युवा पीढ़ी पर पड़ रहा है।

इसकी चपेट में अधिकतर पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं है। जवाहर नगर इलाके में स्मैक गांजा की बिक्री चरम पर है वहीं झालाना सहित आस-पास के इलाकों में देर रात तक आसानी से लोगों को शराब उपलब्ध हो जाती है।

जवाहर नगर में पुलिस ने एक दो बार कार्रवाई कर गांजा बरामद कर आरोपितों को गिरफ्तार किया है लेकिन इसके कुछ दिन बाद ही इनका व्यापार फिर से पनपने लगता है।

यदि पुलिस माफियाओं के खिलाफ सख्त रूख अपनाए तो इस जहर को बेचने से रोका जा सकता है और युवाओं को सही दिशा में लाया जा सकता है।