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लखनऊ।

उत्तर प्रदेश काडर की विख्यात आईएएस अधिकारी बी चंद्रकला की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। 2 सप्ताह पहले तक सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स और चहेतों के साथ तेजतर्रार और इमानदार कहीं जाने वाले अधिकारी अचानक से भ्रष्ट अधिकारी की श्रेणी में आ गई हैं।

बीते 9 साल लंबे समय के दौरान उनके द्वारा जो शोहरत और दौलत कमाई गई थी, एक झटके में निशाने पर आ गई है। संभवत खुद बी चंद्रकला ने भी जीवन में सोचा नहीं होगा।

आपको बता दें कि अवैध खनन मामले में सीबीआई उत्तर प्रदेश के आईएएस बी चंद्रकला से पूछताछ कर चुकी है, जबकि उनके आवास पर छापेमारी हो चुकी है, कई फाइलें जब की जा चुकी है।

उत्तर प्रदेश के कई जिलों में डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट रही बी चंद्रकला इन दिनों सीबीआई के निशाने पर हैं। उनके द्वारा अपनी जोइनिंग के वक्त बताया गया था कि वह एक रुपए की मालकिन नहीं है, लेकिन आज की तारीख में उनके पास एक नंबर में 2 करोड रुपए की संपत्ति है।

सनसनीखेज खुलासे के तौर पर यह बात सामने आई है कि बी चंद्रकला को बचाने के लिए उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री खुद अखिलेश यादव ने दखल दिया था।

आपको यह भी बता दें कि बी चंद्रकला को समाजवादी पार्टी के करीबी अधिकारी माना जाता है। हालांकि वह तेलंगाना राज्य से आती हैं और उनके पति एक इंजीनियर हैं।

उल्लेखनीय है कि समाजवादी सरकार की वक्त साल 2012 से 2016 के बीच अवैध खनन को लेकर बी चंद्रकला द्वारा करीब खाने एलॉट की गई थी।

अवैध खनन को लेकर बी चंद्रकला की शिकायतें हुई और उनकी खेल का भंडाफोड़ करने के लिए 2016 में इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई थी। सुनवाई के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सीबीआई को चंद्रकला के खिलाफ केस दर्ज कर जांच करने के आदेश दिए थे।

सीबीआई सूत्रों का कहना है कि इस मामले में जांच चल रही है। चंद्रकला को लेकर सवाल 2012 से 2016 तक हमीरपुर जिले में बड़े पैमाने पर अवैध खनन करवाने के सबूत मिले हैं, जिसके आधार पर छापेमारी की गई और उनके घर से इस की फाइलें बरामद की गई है।

सीबीआई का मानना है कि चंद्रकला के द्वारा अवैध खनन को बढ़ावा दिया गया जिसके आधार पर राज्य और केंद्र सरकार को बड़े पैमाने पर राजस्व की हानि हुई है।

गौरतलब है कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई के द्वारा छापेमारी की गई और वर्ष 2017 में भी बी चंद्रकला से पूछताछ की जा चुकी है। इसके साथ ही तत्कालीन खनन प्रमुख सचिव रहे डॉ गुरदीप सिंह से भी सीबीआई ने पूछताछ की थी इसकी सीबीआई गहनता से जांच कर रही है, जल्द ही उसकी प्रगति रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाएगी।

उत्तर प्रदेश में अवैध खनन कि सीबीआई द्वारा कार्रवाई के बाद यूपी सरकार सुप्रीम कोर्ट में पहुंची थी। आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में काफी लंबे समय तक मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पास ही खनन विभाग की जिम्मेवारी थी। उससे पहले खनन मंत्री गायत्री प्रजापति का नाम अवैध खनन में आने के बाद उनको कैबिनेट से हटा दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने 2017 को राज्य सरकार की सभी याचिकाएं खारिज करते हुए जांच जारी रखने के आदेश दिए थे। सीबीआई की जांच को खारिज करने के लिए अखिलेश यादव सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी।

अब आपको बताते हैं कि तत्कालीन अखिलेश यादव सरकार ने आईएएस बी चंद्रकला को बचाने के लिए क्या क्या प्रयास किए थे। तत्कालीन यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर करते हुए कहा था कि अवैध खनन से संबंधित सीबीआई की जांच को बंद कर दिया जाए, लेकिन सरकार की ऐसी हसीना को कोर्ट ने खारिज कर दिया था।

आपको बता दें कि बीते दिनों ही सीबीआई ने उत्तर प्रदेश में पूर्व मंत्रियों समेत अधिकारियों के 11 ठिकानों पर छापेमारी की थी। जिसमें बी चंद्रकला का लखनऊ स्थित सरकारी आवास विकास झांसी इसके से संबंधित कई फाइलें जब्त की गई थी।

अवैध खनन के इस बेहद गंभीर मामले को लेकर तत्कालीन अखिलेश यादव सरकार ने हाई कोर्ट के द्वारा याचिका खारिज करने के बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी कि मामले को राजनीतिक चश्मे से देखे बिना जांच बंद कर देनी चाहिए, लेकिन शीर्ष कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी।

सीबीआई ने अज्ञान सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ 11 मामले दर्ज किए थे। ईडी ने भी मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत अवैध खनन आरोपों के खिलाफ मामले दर्ज किए थे।

उत्तर प्रदेश में अवैध खनन से जुड़े व्यापार में करोड़ों रुपए का ही नहीं, बल्कि अरबों खरबों हुए का खेल हुआ था, जिसमें कई भू माफियाओं, अधिकारियों, नेताओं और दबंगों को लेकर मिलीभगत सामने आई थी।

एक मोटे अनुमान के मुताबिक उत्तर प्रदेश में हुए अवैध खनन के चलते विभिन्न जिलों में करीब 25 सौ करोड रुपए का अवैध कारोबार होता है, जिसमें पूर्व सरकार के मुख्यमंत्री और चंद्रकला का भी हाथ था।