जयपुर।

‘एयू बैंक जयपुर मैराथन’ का आज सुबह लगातार 10वें साल आयोजन किया गया। इसमें जयपुर समेत देश-विदेश के 55 हज़ार से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया। पूरे आयोजन में करीब 1.5 करोड़ खर्च हुए हैं, ऐसा आयोजकों का दावा है। दौड़ का दृश्य-

इस मैराथन के माध्यम से लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता लाना और पर्यावरण की रक्षा का संकल्प भी दोहराया गया। इस आयोजन के मुख्य आयोजक प. सुरेश मिश्रा हैं, जो कांग्रेस पार्टी के नेता भी हैं। मिश्रा 2008 में कांग्रेस पार्टी के टिकट पर सांगानेर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव भी लड़ चुके हैं। धावकों की हिस्सेदारी-

आयोजन सुबह किया गया था, जिसके लिए तमाम जरूरी व्यवस्थाएं की गई थी। लोगों के लिए बड़े डॉम बनाए गए थे, ताकि किसी धावक को कोई दिक्कत नहीं हो। डॉम में ही मेडिकल कैम्प भी लगाया गया था, साथ ही दौड़ में पार्टिसिपेट करने वालों के साथ दौड़ के दौरान ही मेडिकल टीमें लगाई गई थीं।

55 हज़ार धावक, 1.5 करोड़ खर्च, हैल्दी बनाने की दौड़ में स्वास्थ्य से खिलवाड़! 1

इसमें दौड़ाने वाले बच्चों, बूढ़ों, महिलाओं और जवानों के लिए दर्द निवारक दवाई, स्प्रे और अन्य जरूरी साजो-सामान की व्यवस्था की गई थी। सबसे बड़ी बात यह थी कि छोटे बच्चों को दौड़ने के दौरान दर्द होने पर स्प्रे की भी व्यवस्था की गई।

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गंभीर बात यह है कि यह वही स्प्रे है, जो अंतराष्ट्रीय मानकों पर प्रतिबंधित करने की लिए सिफारिश किया हुआ है। पर्यावरण विशेषज्ञों का दावा है कि इस स्प्रे की दबावपूर्ण गैस को पर्यावरण के लिए भी खतरनाक माना गया है।

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डॉक्टर और फिजियोथेरेपिस्ट भी इस आयोजन में शामिल थे, लेकिन किसी ने भी इस स्प्रे के प्रयोग पर आपत्ति नहीं जताई। एक और तथ्य यह है कि विकसित देशों में बच्चों के दौड़ने पर दर्द होने के बाद भी इस स्प्रे के छिड़काव को गलत माना जाता है। तुरन्त रिलीफ के लिए काम में लिया जाने वाला यह स्प्रे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के लिए भी प्रतिबंधित है।

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प्रायोजकों से मोटा पैसा कमाने और दिखावे के तौर पर सारी सुविधाएं देने की होड़ में आयोजकों ने सारे स्वास्थ्य नियम-कायदों को ताक में रख दिया। बड़े-बड़े बैनर-पोस्टर लगाकर प्रचारित किये जाने वाले इस आयोजन को लेकर राज्य की “ज़ीरो टॉलरेंस” वाली सरकार भी शायद नियमों के प्रति आंखें मूंदकर बैठी है।