Jaipur

आज अटल बिहारी वाजपेयी की पहली पुण्यतिथि है। अटल बिहारी वाजपेयी को केवल भाजपा या आरएसएस ही याद नहीं कर रहे हैं, बल्कि विपक्ष भी कायल है।

भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी बीते साल आज ही के दिन दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह गए थे।

भाजपा के पितृ पुरूष अटल बिहारी वाजपेयी के हमेशा साथी रही लालकृष्ण आडवाणी, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत तकरीबन सभी बड़े नेताओं ने आज अपने महानायक को भावभीनी श्रद्धांजलि दी है।

...इसलिए याद किया जाता है अटल बिहारी वाजपेयी को, आज है पहली पुण्यतिथि 1

इस बीच यह जानना जरूरी है कि अटल बिहारी वाजपेयी को याद क्यों किया जाता है। आखिर क्या कारण है कि उनको भारत रत्न से नवाजा गया है?

आखिर क्या कारण है कि अटल बिहारी वाजपेयी तीन बार पीएम बनने में कामयाब हुए? कई ऐसे कारण हैं जो अटल बिहारी वाजपेयी को इतने मन से याद किया जाता है।

हम जानते हैं कुछ कारण, जो अटल बिहारी वाजपेयी हमेशा याद किया जाएगा-

परमाणु परीक्षण ने हिला दी थी दुनिया

यह दिन ऐसे वक्त के लिए याद किया जाएगा, जब पूरी दुनिया की पैनी नज़र भारत के ऊपर थी। लेकिन भारत के दो महान व्यक्ति, भारत रत्न कुछ और ही ठान कर बैठे हुए थे।

13 मई 1998 के दिन, जब पूरी दुनिया चैन की सांस ले रही थी, तब अचानक अमेरिका के नासा ने खबर दी कि भारत ने अपना दूसरा परमाणु परीक्षण कर दिया है। इससे पहले भारत ने 1978 में भी पहला परीक्षण कर दुनिया को चौंका दिया था।

महान वैज्ञानिक और मिशाइल मेन, भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के अग्रज बने हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के द्वारा फ्री हैंड देने के बाद इतिहास रचने जा रहे थे।

अमेरिका, जापान, जर्मनी, इटली, चीन, रूस समेत तमाम देश इस बारे सोच भी नहीं सकते थे, लेकिन अटल और कलाम की जोड़ी ने वह कर दिया, जो पहले कभी नहीं हुआ था।

इसके बाद भारत ने लगातार कई प्रतिबंधों का सामना किया। विकास की बात कहने वाले इस परीक्षण को गलत ठहरा रहे थे, लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी और अब्दुल कलाम के दिमाग में अपने देश को ताकतवर बनाने का काम कर रहे थे।

एक वोट से सरकार गंवाकर सरकार बनाने की नींव रख दी

साल 1996 के दौरान पहली बार प्रधानमंत्री बने अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार केवल एक वोट से गिर गई थी।

तब अटल बिहारी वाजपेयी ने संसद में जो भाषण दिया, वो भारत के रहने तक याद किया जाता रहेगा। अटल ने अपना इस्तीफा देने से पहले अगले चुनाव के वक्त सरकार बनाने का रास्ता साफ किया था।

इसके बाद 1998 में के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी की दुबारा से 13 महीनें के लिए सरकार बनी। जिसमें उन्होंने ऐतिहासिक पोकरण परमाणु परीक्षण कर दुनिया को अपनी ताकत का अहसास करवाया।

नरेंद्र मोदी को दे दी थी नासियत

साल 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बने नरेंद्र मोदी के करीब 1 साल बाद 2002 में गुजरात में सांप्रदायिक दंगे हुए जिसमें हजारों लोगों का कत्लेआम किया गया था।

इस प्रकरण को लेकर तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को नशा देकर सबको चौंका दिया था।