जयपुर।

राजस्थान में निवर्तमान विधानसभा अध्यक्ष कैलाश चंद मेघवाल के द्वारा सदन का सत्र आहूत नहीं करने के कारण जोरदार संकट खड़ा हो गया है। राज्य सरकार ने सदन का सत्र आहूत करने की घोषणा कर दी, और मेघवाल ने सदन के सत्र से साफ इंकार कर दिया।

निवर्तमान विधानसभा अध्यक्ष कैलाश चंद्र मेघवाल द्वारा राज्य में विधान सभा सत्र नहीं बुलाए जाने की घोषणा के बाद प्रदेश की सरकार सकते में आ गई है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्यपाल कल्याण सिंह से बात कर इसे संवैधानिक संकट का हल निकालने का प्रयास शुरू कर दिया है।

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दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी के नेता और पूर्व संसदीय कार्य मंत्री राजेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा है कि राज्य सरकार शार्ट नोट इस पर कभी भी विधानसभा क्षेत्र नहीं बुला सकती यह संवैधानिक तौर पर ए अमान्य है।

कैलाश चंद मेघवाल ने आज सुबह विधानसभा भवन में ही पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ने केवल 7 दिन के शॉर्ट नोटिस पर सदन का सत्र आहूत करने के लिए कहा है, लेकिन संवैधानिक तौर पर कभी भी सदन का सत्र 21 दिन के नोटिस के बाद ही शुरू किया जा सकता है।

कांग्रेस पार्टी की तरफ से अभी इस बारे में अधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन दो दिन पहले राज्यपाल कल्याण सिंह के द्वारा जारी किए गए आदेश को कैलाश मेघवाल ने मानने से इनकार कर दिया है। जानकारों का मानना है कि राज्यपाल और विधानसभा अध्यक्ष के बीच में टकराव की स्थिति होने के कारण प्रदेश में संवैधानिक संकट खड़ा हो गया है।

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दरअसल, राज्य की नवगठित सरकार के पास अभी कोई बजट नहीं है, जिसके चलते राज्य की गहलोत सरकार कोई भी वित्तीय फैसला नहीं ले पा रही है। प्रदेश सरकार चाहती है कि सत्र बुलाकर लेखानुदान पारित करवा लिया जाए, ताकि बजट सत्र तक फैसले लिए जा सकें।

इधर, विपक्ष चाहता है कि लोकसभा चुनाव के पहले प्रदेश की कांग्रेस सरकार कम से कम वादे पूरे कर सके, ताकि आम चुनाव से पहले पार्टी के खिलाफ माहौल बनाया जा सके। ऐसे में एक ओर राज्यपाल ने सत्र आहूत करने की घोषणा कर दिया है, तो दूसरी तरफ निवर्तमान अध्यक्ष ने सत्र बुलाने से ही मना कर दिया है।

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इस संवैधानिक संकट से निपटने के लिए राज्यपाल कल्याण सिंह ने प्रदेश सरकार के महाधिवक्ता महेंद्र सिंह सिंघवी को तलब किया है। बताया जा रहा है कि शाम तक राज्यपाल की तरफ से कोई संवैधानिक ऑर्डर जारी किया जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि राजस्थान में 11 दिसंबर को विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद निवर्तमान विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने नव निर्वाचित 40 विधायकों को विधायक आवास आवंटित करके विवाद में आ गए थे।

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