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-पायलट के खाते में अनोखा रिकोर्ड दर्ज। पायलट की मौजूदगी में दो लोकसभा चुनाव, दोनो मे कांग्रेस की सारी सीटें हारी, शिवचरण माथुर के बाद अशोक गहलोत ऐसे सीएम की उनके कार्यकाल मे कांग्रेस कोई सीट नहीं जीत पाई आई।

रामगोपाल जाट

लोकसभा चुनाव 2019 के परिणाम ने कई रिकॉर्ड बना दिए। एक ओर जहां भाजपा के सभी सांसद उम्मीदवार लगातार दूसरी बार जीतकर संसद पहुंचे हैं, वहीं कांग्रेस पार्टी ने भी कई रिकॉर्ड ध्वस्त किये हैं।

कांग्रेस पार्टी के राजस्थान प्रदेश के अध्यक्ष सचिन पायलट ऐसे पहले अध्यक्ष बन गए हैं, जिनके नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी ने लगातार दो चुनाव 25-0 के अंतर से हारे हैं।

सचिन पायलट को 2014 में तब प्रदेश की कमान सौंपी गई थी, जब दिसंबर 2013 में कांग्रेस पार्टी की बहुत बुरी तरह से हार हुई थी और उसके बाद तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष डॉ. चंद्रभान ने जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

हालांकि उसके बाद सचिन पायलट के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी ने 5 साल के दौरान बहुत अच्छा प्रदर्शन किया। तीन बार हुए उपचुनाव में कांग्रेस पार्टी ने जहां अपने तीन विधायक जिताने में कामयाबी पाई, वहीं 2 लोकसभा सीटों अजमेर और अलवर में हुए उपचुनाव में भी कांग्रेस पार्टी ने जीत हासिल की।

केवल धौलपुर की विधानसभा सीट पर और कोटा के दक्षिण की सीट पर कांग्रेस पार्टी नहीं जीत पाई।

मजेदार बात यह है कि सचिन पायलट के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी ने जहां 2014 के लोकसभा चुनाव में राजस्थान की सभी 25 की 25 सीटें गवाईं, वही अब 2019 के लोकसभा चुनाव में भी पार्टी ने एक बार फिर से सभी 25 सीटों पर बुरी तरह से मार खाई है।

प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट के साथ ही यह अनोखा रिकॉर्ड बनाने का कारनामा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी किया है। इससे पहले मुख्यमंत्री रहते हुए केवल शिवचरण माथुर ही ऐसे नेता थे, जब राजस्थान में कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा की सभी सीटों पर मात खाई थी।

यह वक्त 1989 का था और परिणाम आने के बाद शिवचरण माथुर को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था, उनके स्थान पर हरिदेव जोशी को सीएम बनाया गया था।

अभी राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट दोनों की ही इस चुनाव में जिम्मेदारी के साथ बहुत बुरी तरह से हार हुई है, ऐसे में नैतिकता के नाते जहां अशोक गहलोत पर इस्तीफे का दबाव है, वहीं सचिन पायलट पर भी प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी छोड़ने की संभावनाओं को बल मिलने लगा है।

बहरहाल आज दिल्ली में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के द्वारा इस्तीफा देने और उनके इस्तीफे को कांग्रेस वर्किंग कमेटी द्वारा लेने से इनकार करने के बाद अशोक गहलोत और सचिन पायलट को निश्चित रूप से राहत मिली होगी।

लेकिन जिस तरह से तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर को पद से हटाया गया था और उनकी जगह हरिदेव जोशी को मुख्यमंत्री बनाया गया था, ठीक उसी तरह से अशोक गहलोत के भी पद से हटाए जाने की संभावना प्रबल होती जा रही है।

अब देखना यह होगा कि कांग्रेस पार्टी क्या 1989 जैसा कोई कड़ा फैसला ले सकती है या फिर आगे भी राजस्थान में मुख्यमंत्री की कुर्सी अशोक गहलोत के पास ही रहेगी?