EWS Reservation ashok gehlot
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जयपुर।
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा इस साल के मध्य में लोकसभा सत्र के दौरान जब निर्धन सवर्णों के लिये 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खूब वाहवाही हुई थी, लेकिन इतनी नहीं, जितनी इन दिनों राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत लूट रहे हैं।

बीते करीब एक पखवाड़े से जयपुर के हर चौराहे, हर नुक्कड़, गली मोहल्ले के बाहर अशोक गहलोत को ईडब्ल्यूएस में स्थाई संपत्ति का प्रावधान हटाये जाने को लेकर धन्यवाद और बधाई देते बड़े बड़े बैनर टंगे पड़े हैं।

राज्य सरकार ने केवल इनकम का प्रावधान रखा है, बाकि स्थाई संपत्ति के सभी प्रावधान समाप्त कर दिये हैं। जिसके कारण सवर्ण समाज की ओर से कई धन्यवाद और बधाई बैनर लगाये गये हैं।

खास बात यह है कि जयपुर महापौर विष्णु लाटा के द्वारा भी धन्यवाद और बधाई के ग्लोसाइन बोर्ड लगाये गये हैं। मुख्यमंत्री गहलोत के आवास पर सवर्ण समाज के द्वारा तकरीबन रोज आभार और धन्यवाद देने वालों का तांता लगा रहता है।

एक दिन राजपूत समाज और एक दिन ब्राह्मण समाज के द्वारा उनका आभार जताने का क्रम चल रहा है। कांग्रेस से जुड़े हुये इन समाजों के तमाम नेता लोगों को एकत्रित कर अशोक गहलोत के सामने अपने नंबर बढ़ाने में लगे हुये हैं।

किंतु इसके बाद भी राज्य के बेरोजगारों के लिये अच्छी खबर नहीं है। दरअसल, राजस्थान सरकार भले ही आरक्षण में से स्थाई संपत्ति का प्रावधान हटा दिया हो, लेकिन बावजूद इसके केंद्र सरकार या अन्य राज्यों की सरकारों द्वारा निकाली जाने वाली सरकारी भर्ती के लिये राज्य के बेरोजगार योग्य नहीं हो पायेंगे।

याद दिला दें कि बीते दिनों केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा था कि यदि केंद्र सरकार की किसी योजना का राज्य सरकारें नाम बदलती हैं, तो ऐसे में केंद्र की योजना का जनता को कोई फायदा नहीं मिलता है।

इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि राज्य सूची को छोड़कर संघ या संघ—राज्य सूची के विषयों में राज्य सरकारें बदलाव करती हैं, तो भी किसी को कोई फायदा नहीं मिलता है।

माना जा रहा है कि भले ही निकाय चुनाव से पहले ईडब्ल्यूएस के लिये स्थाई संपत्ति का प्रावधान समाप्त कर कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार वोट बटोरने का सपना देख रही हो, किंतु केंद्र और अन्य राज्यों में राजस्थान के बेरोजगारों को इसका लाभ नहीं मिलने के कारण अशोक गहलोत के तमाम सम्मान जनता के लिहाज से निर्थक साबित हो रहे हैं।