जयपुर।

जरूरी बहुमत के साथ पांच साल बाद सत्ता में लौट रही कांग्रेस पार्टी के नेता, राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री अशोक गहलोत एक बार फिर से मुख्यमंत्री बनने की सम्भवना जताई जा रही हैं।

अशोक गहलोत काफी समय से लगातार राजस्थान की निवर्तमान मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, उनके प्रमुख सचिव आईएएस तन्मय कुमार, निजी सचिव धीरेंद्र कमठान, मीडिया सलाहकार महेंद्र भारद्वाज, डीआईपीआर के कमिश्नर रहे और आईएफएस अफसर अरिजीत बनर्जी पर सीधे तौर पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाते रहे हैं।

कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अशोक गहलोत ने पिछले दिनों भी अपने सरकारी निवास पर मीडिया से बात करते हुए कहा था कि राजस्थान में सरकार मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे नहीं चला रहीं हैं, बल्कि उनके यहां बना हुआ कॉकस चला रहा है।

इतना ही नहीं पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पत्रकारों से बात करते हुए यहां तक कहा था कि राजस्थान में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे नहीं हैं, बल्कि 1 आईएएस अफसर सरकार चला रहा है और उनका सहयोग कर रहा है चार जनों का कॉकस।

परोक्ष रूप से कांग्रेस की सरकार आने पर ऐसे अधिकारियों को सबक सिखाने के बारे में भी चेतावनी देते हुए अशोक गहलोत ने कहा था कि कांग्रेस की सरकार बनने पर भ्रष्टाचार में लिप्त इन लोगों पर खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के साथ काम करने वाले आईएएस अधिकारी तन्मय कुमार, उनके निजी सचिव धीरेंद्र कमठान, मीडिया सलाहकार महेंद्र भारद्वाज, डीआईपीआर कमिश्नर रहे अरिजीत बनर्जी और एक अन्य व्यक्ति का नाम लेते हुए अशोक गहलोत ने कहा था कि सुधरे नहीं, तो इन लोगों का उनकी सरकार आने पर उचित इंतजाम किया जाएगा।

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के करीबी इन लोगों के अलावा अशोक गहलोत ने एक टीवी चैनल के मालिक का नाम लिए बगैर कटाक्ष करते हुए कहा था कि लोकतंत्र का असली चौथा स्तंभ वही है।

हालांकि, उन्होंने सीधे तौर पर यह नहीं बताया कि इन लोगों पर एक्शन क्या होगा, लेकिन जिस तरह अशोक गहलोत की ‘वर्किंग स्टाइल’ है, वह इस बात की तरफ इशारा करती है कि राजस्थान में इस टीवी चैनल मालिक के खिलाफ भी कांग्रेस सरकार द्वारा तगड़ा एक्शन लिया जा सकता है।

इसके अलावा अशोक गहलोत ने खान घोटाले में महाघूस कांड के मुख्य आरोपी रहे सीनियर आईएएस अशोक सिंघवी के साथ-साथ इसमें लिप्त लोगों को बचाने का वसुंधरा राजे सरकार पर आरोप लगाया था।

अब सवाल यह उठता है कि क्या अशोक गहलोत सरकार बनी तो इन लोगों के खिलाफ फिर से जांच करवाएगी? यदि गहलोत की सरकार नहीं बनकर सचिन पायलट के नेतृत्व में सरकार बनी तो भी कार्यवाही होगी?

राजस्थान की विधानसभा चुनाव परिणाम में कांग्रेस पार्टी ने बहुमत हासिल किया है। सरकार कांग्रेस की बनने वाली है और संभावना है कि अशोक गहलोत ही मुख्यमंत्री बनेंगे। सियासी गलियारों में चर्चा है कि यदि ऐसा होता है तो क्या अशोक गहलोत इन लोगों पर कार्रवाई करेंगे?

मजेदार बात यह है कि बीते दिनों अपनी चुनावी सभाओं में अशोक गहलोत कहते रहे हैं कि वह पिछली सरकार से सम्बंधित लोगों पर, किसी भी तरह से बदले की भावना में कोई काम नहीं करेंगे।

वैसे विपक्षी दल और विधायक हमेशा अशोक गहलोत और वसुंधरा राजे के मिलेजुले होने का आरोप लगाते हुए एकदूजे को बचाने का आरोप लगाते रहे हैं। ऐसे इस बार की सरकार के कामकाज को देखना दिलचस्प होगा।