जयपुर।

अलवर के थानागाजी इलाके में 26 अप्रैल को एक विवाहिता के साथ उसके पति के सामने बंधक बनाकर 5 लड़कों द्वारा गैंगरेप करने के मामले को लेकर राजस्थान की सियासत गरमाई हुई है।

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक और खींवसर विधानसभा से विधायक हनुमान बेनीवाल लगातार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश के डीजीपी कपिल गर्ग समेत पूरी सरकार को सवालों के घेरे में खड़ा कर रहे हैं।

बेनीवाल ने आज भी डीजीपी के लिए पुराना पत्र अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर करते हुए पुलिस महानिदेशक और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से जवाब मांगा है।

2 जून 1990 के पत्र का हवाला देते हुए हनुमान बेनीवाल ने पुलिस महानिदेशक कपिल गर्ग से सवाल करते हुए आरोप लगाया है कि डीजीपी की अनुमति के बिना कहीं पर भी कोई भी पुलिस अधीक्षक किसी गैंगरेप के मामले को अपने स्तर पर छुपा नहीं सकता।

इसके साथ ही हनुमान बेनीवाल ने सवाल यह भी किया है कि जब कोई मामला इतना बड़ा हो और पुलिस महानिदेशक को उसका पता हो तो यह संभव नहीं है कि प्रदेश के मुखिया, यानी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तक यह बात नहीं पहुंचे?

हनुमान बेनीवाल ने इस बात का भी हवाला दिया है कि जब प्रदेश के मुख्यमंत्री को इतने बड़े गैंगरेप के मामले का पता चल गया था तो उन्होंने मामले को दबाकर लोकसभा चुनाव जिसका पहला चरण गैंगरेप के 3 दिन बाद, यानी 29 अप्रैल को हुआ था।

उसमें फायदा लेने और उसके बाद 6 मई को हुए दूसरे चरण के मतदान में कांग्रेस पार्टी को दलित वोटों का नुकसान नहीं हो जाए, इससे बचने के लिए इतने गंभीर मामले को खुद ने दबाया और पुलिस महानिदेशक के द्वारा पुलिस अधीक्षक राजीव पचार और उनके अधीनस्थ पुलिस कर्मचारियों के द्वारा दबाया गया।

बेनीवाल ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर सीधा हमला करते हुए कहा है जिस तरह का गंभीर मामला मुख्यमंत्री के स्तर पर और पुलिस महानिदेशक दबाया गया है, इससे जाहिर है कि उच्च पदों पर बैठे यह दोनों ही व्यक्ति दोषी हैं।

इसलिए नैतिकता के नाते मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को इस्तीफा देना चाहिए और पुलिस महानिदेशक को पद से बर्खास्त करना चाहिए।

आइए देखते हैं क्या लिखा है हनुमान बेनीवाल ने-

“02/06/1990 को यह परिपत्र राजस्थान पुलिस महानिदेशक (DGP ) के आदेशों से परिपत्र संख्या 460-505 जारी हुआ, जो राज्य के समस्त पुलिस अधीक्षकों को पालना के लिए भेजा गया। इसमें गौर करने लायक 2 बातें हैं, उससे साफ जाहिर से पुलिस मुख्यालय स्तर पर डीजीपी की मर्जी के बिना अलवर गेंगरेप जैसा संवेदनशील मामला कोई नही छुपा सकता”

अनुसूचित जाती /जनजाति से सम्बंधित कोई घटना घटित होने पर उसकी सूचना तुरन्‍त प्रभाव से पुलिस महानिरीक्ष्‍ाक (पुनर्गठन) राज. , जयपुर पुलिस महानिरीक्ष्‍ाक सीआईडी सीबी अपराध शाखा व गोपनीय शाखा जयपुर पुलिस महानिरीक्ष्‍ाक प्रशासन राज. जयपुर को देने का प्रावधान है सुनिश्चित किया गया।

पुलिस उप अधीक्षक ( CO,SC/ST) से कम स्तर का अधिकारी अपराध की जांच नही करेगा,
फिर ऐसे परिपत्रों का क्या फायदा?

अलवर गेंगरेप जैसे प्रकरण को सिर्फ दलित वोट प्रभावित नही हो इसलिये डीजीपी स्तर से दबाने का प्रयास किया गया, मामले में एसएचओ ओर एसपी के खिलाफ कार्यवाही की गई, जबकि सम्बंधित Dy .SP और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के सम्बंध में शासन ने कोई टिपण्णी नही की ऐसा क्यों?

अशोक गहलोत जनता जवाब मांग रही है, शासन के प्रति रोष है लोगों मे, ऎसे दरिंदो को फांसी पर लटकाओ, तब मानेंगे न्याय हुआ।