अशोक गहलोत: अपने ही राजनीतिक गुरू की सियासी हत्या कर संभाली थी प्रदेश की कमान

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जयपुर।

अशोक गहलोत का जन्‍म 3 मई 1951 को राजस्थान के जोधपुर जिले में हुआ था। स्‍व. लक्ष्‍मण सिंह गहलोत के घर जन्‍मे अशोक गहलोत ने विज्ञान और कानून में स्‍नातक डिग्री प्राप्‍त की थी। उसके बाद उन्होंने अर्थशास्त्र विषय से स्‍नातकोत्‍तर डिग्री प्राप्‍त की।

अशोक गहलोत का विवाह 27 नवम्‍बर 1977 को सुनीता गहलोत के साथ हुआ। गहलोत के एक पुत्र वैभव गहलोत और एक पुत्री सोनिया गहलोत हैं। कहा जाता है कि अपने पिता की तरह ही गहलोत को भी जादू दिखाना और घूमना-फिरना पसन्‍द हैं।

1998 से 2003 और 2008 से 2013 तक दो बार राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे अशोक गहलोत को उन्हीं के राजनीतिक गुरु परसराम मदेरणा की सियासी हत्या का दोषी माना जाता है।

जोधपुर में प्रचलित एक किस्से के अनुसार अशोक गहलोत को सियासत में लाने का श्रेय परसराम मदेरणा को ही जाता है। उन्होंने ही अशोक गहलोत को कॉलेज और विश्वविद्यालय से राजनीतिक सीढ़ी चढ़ने के गुर सिखाए थे।

1998 में राजस्थान में जब कांग्रेस परसराम मदेरणा को आगे करके ‘जाट मुख्यमंत्री’ के नाम पर चुनाव लड़ रही थी, तब किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था, कि बहुमत मिलने पर परसराम मदेरणा की बजाय अशोक गहलोत मुख्यमंत्री की कमान संभालेंगे।

बताया जाता है कि परसराम मदेरणा की हठधर्मिता और जब सरकार बनाने का अंत समय था, तब उनके द्वारा कोप भवन में बैठ जाने के कारण अशोक गहलोत ने अपनी राजनीतिक जादूगरी दिखाते हुए तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलकर खुद को प्रदेश में मुख्यमंत्री का सबसे बड़ा दावेदार साबित कर दिया।

कहा जाता है कि राजस्थान में तब जाट समाज से कद्दावर नेताओं का कांग्रेस पार्टी में बोल वाला था। लेकिन खुद को मुख्यमंत्री का दावेदार पेश करने के चक्कर में 3-4 जाट नेताओं ने एक दूसरे का साथ नहीं दिया। जिसका फायदा उठाते हुए अशोक गहलोत ने विधायकों की लॉबिंग करके दिल्ली से खुद को मुख्यमंत्री घोषित करवा दिया।

राष्ट्रीय अध्यक्षा सोनिया गांधी से हरी झंडी मिलने के बाद अशोक गहलोत ने 1 दिसंबर 1998 को राजस्थान के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उन्होंने 8 दिसंबर 2003 तक, पूरे 5 साल तक प्रदेश की कमान संभाली।

इसके बाद प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की तरफ से नेता बनकर केंद्र से आईं वसुंधरा राजे का जादू चला वसुंधरा राजे ने राजस्थान में परिवर्तन यात्रा के द्वारा प्रदेश के जनमानस पर गहरा असर डाला। परिणाम यह निकला की राजस्थान की राजनीति में पहली बार बीजेपी को प्रचंड बहुमत हासिल हुआ।

जैसा कि सियासत में हमेशा चर्चित रहता है, 2008 के वक्त राजस्थान में बीजेपी के अध्यक्ष ओमप्रकाश माथुर और तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बीच खटास पैदा होने के कारण टिकट वितरण को लेकर परेशानी खड़ी हो गई। सही टिकट वितरण नहीं होने के परिणामस्वरुप प्रदेश में बीजेपी की सत्ता हाथ से चली गई।

हालांकि कांग्रेस पार्टी को भी बहुमत हासिल नहीं हुआ। लेकिन एक बार फिर से अशोक गहलोत ने अपनी राजनीतिक सूझबूझ, जिसको लोग उनकी जादूगरी कहते हैं का परिचय देते हुए पहली बार राजस्थान में जीत कर आए बहुजन समाजवादी पार्टी के सभी छह विधायकों को कांग्रेस में शामिल कर लिया और खुद ही मुख्यमंत्री बन गए।

दूसरी बार मुख्यमंत्री रहते अशोक गहलोत ने राजस्थान में कांग्रेस पार्टी को करीब करीब अपने हाथ में ले लिया। परसराम मदेरणा, मिर्धा, शीशराम ओला समेत सभी जाट कद्दावर नेता इस दौरान दुनिया से विदा हो गए। कहा जाता है कि उनके एकमात्र प्रतिद्वंद्वी बचे परसराम मदेरणा के बेटे महिपाल मदेरणा, जो कि भंवरी देवी अपहरण और मर्डर कांड के आरोप में जेल में बंद हैं, उनको भी अशोक गहलोत बचाने का कोई प्रयास नहीं किया।

वर्तमान में अशोक गहलोत कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय संगठन महामंत्री हैं। इसके साथ ही वह तीसरी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के लिए सभी तरह की जोड़-तोड़ करने में जुटे हुए हैं। अलबत्ता पार्टी में आज वह दूसरे नंबर के नेता माने जाते हैं।

इससे पहले अशोक गहलोत 2 जुलाई 1982 से लेकर 7 फरवरी 1984 तक और 7 फरवरी 1984 से लेकर 10 अक्टूबर 1984 तक केंद्र में राज्य मंत्री रह चुके थे। साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंह राव की सरकार में भी 12 जून 1993 से लेकर 8 जनवरी 1993 तक अशोक गहलोत कपड़ा राज्य मंत्री थे।

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