मिर्धा, महरिया समेत सचिन पायलट का भी अशोक गहलोत ने यूं कर दिया जाप्ता-

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जयपुर।

राजस्थान में कांग्रेस पार्टी 1998 के चुनाव में परसराम मदेरणा को आगे कर चुनाव लड़ रही थी, तो दूसरी तरफ जोधपुर के सरदारपुरा से विधानसभा चुनाव में उतरे अशोक गहलोत के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था।

साल 2008 और उसके बाद वर्ष 2013 में अशोक गहलोत के नेतृत्व में बुरी तरह से हारी कांग्रेस पार्टी इस बार मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ बनी एंटी इनकंबेंसी की लहर में सरकार बनाने के सपने देख रही है।

लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस बार भी अपनी चाल चल दी है। बीते 5 साल से राजस्थान में अपने बलबूते मेहनत कर कांग्रेस को फिर से खड़ा करने में जुटे प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट की अशोक गहलोत ने घेराबंदी कर दी है।

समय की चाल और राजनेताओं के कमाल देखिए, जिस राजस्थान में प्रदेश कांग्रेस कमेटी से जो जाट नेता आधे से ज्यादा टिकट बांटा करते थे, आज उन्हीं के परिवार के बेटे और बेटियां एक अदद टिकट को तरस गए हैं।

गहलोत ने सबसे पहले नागौर में टिकट काटकर मिर्धा परिवार को निपटाया। यहां पर नागौर सीट से हरेंद्र मिर्धा और डेगाना से रिछपाल मिर्धा के टिकट काटकर मिर्धा परिवार की सियासत का अंतिम अध्याय लिख दिया है। उसके बाद महरिया बंधुओं के टिकट काटकर जाट समाज के 1 वर्ग को कांग्रेस से दूर कर दिया।

सुभाष महरिया और नंदकिशोर महरिया ने बीते दिनों सीकर में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की रैली में अपने बलबूते जो भीड़ जुटाई। सुभाष महरिया बीजेपी छोड़ कर, तो नंदकिशोर महरिया निर्दलीय से कांग्रेस में शामिल हुए थे

उसके परिणामस्वरूप दोनों को टिकट दिए जाने की चर्चा थी। लेकिन पायलट खेमे में होने के कारण दोनों ही महरिया बंधुओं के टिकट काट दिए गए। मेहरिया बंधु भी बगावत करते नजर आ रहे हैं।

जिस सीकर की राहुल की रैली के लिए महरिया परिवार ने जी-जान
लगाई, रैली के लिए पैसे खर्च किये, उनका भी पत्ता साफ कर दिया।

कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक अशोक गहलोत के कहने से आहोर के स्थानीय सरपंच निम्बाराम चौधरी ने जी-जान लगा कर चैन्नई के महानगर काॅलेज ग्राउण्ड पर करवाई थी।

35 हजार राजस्थान के प्रवासियों की महारेली जिन निम्बाराम चौधरी ने इंतज़ाम किया, गहलोत ने आहोर से उनका ही पत्ता साफ कर दिया है!

पायलट के तमाम प्रयासों को धत्ता बताकर नागौर से मिर्धा का पता साफ कर दिया? नोहर से किसान नेता कुम्भाराम आर्य की पुत्रवधू का पता साफ कर दिया! रतनगढ़ से पुसाराम गोदारा का पता साफ काट डाला! इसी तरह से सादुलशहर से सन्तोष सहारण का पता साफ काटा!

गहलोत गुट ने ही बीकानेर वेस्ट से बीड़ी कल्ला को टिकट नहीं देकर विवाद को जन्म दिया। आज कल्ला को टिकट मिल गया है। कन्हैया लाल झंवर का टिकट कटने के बाद उन्होंने निर्दलीय नोखा से चुनाव लड़ने का घोषणा कर दी, तो इसके साथ ही डूडी ने भी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान कर दिया है। इधर, सिरोही के संयम लोढा का पता साफ कर दिया!

कहा जा रहा है कि सचिन पायलट का भी बंदोबस्त कर दिया। जिस टोंक विधानसभा सीट से सचिन पायलट चुनाव लड़ रहे हैं, वहां 70 हजार वोट मुस्लिम मतदाता हैं। कहा जा रहा है कि वहां पर भी गहलोत ने बीजेपी के घोषित उमीदवार को बदलवा कर यूनुस खान को टिकट दिलाने का प्रयास कर दिया है।

उधर, बीकानेर के नोखा से बीजेपी के कन्हयालाल झंवर को टिकट मिला है, जिसमें भी गहलोत की जादूगरी ने डूडी की मुश्किलें बढा दी हैं। डूडी को भी पायलट का करीबी माना जाता है।

बाड़मेर के कद्दावर नेता बनने की ओर अग्रसर हो रहे पूर्व मंत्री जसवंत सिंह के बेटे मानवेन्द्र सिंह को राजस्थान की सियासत में शेरनी बन चुकीं वसुंधरा राजे के सामने उतार दिया है। मानवेंद्र सिंह ने हाल ही में बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे।

तमाम सीटों पर सामने आए कांग्रेस के उम्मीदवारों को देखकर कहा जा सकता है कि तीनों सूचियों में संगठन महामंत्री अशोक गहलोत की खूब चली है। जहां पर भी सचिन पायलट को घेरने की जरूरत थी, वहां पर गहलोत ने कोई कसर नहीं छोड़ी है।

दो चीजें विशेष रूप से याद रखने की हैं। पहली ये कि अशोक गहलोत को राजनीति का जादूगर कहा जाता है, तो दूसरी बात यह है कि बीते दो-ढाई साल से अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच मुख्यमंत्री उम्मीदवार की दावेदारी को लेकर शीतयुद्ध चल रहा है।

याद रखने वाली बात यह भी है कि राजस्थान में कांग्रेस पार्टी को चुनाव में स्पष्ट बहुमत मिलने की स्थिति में मुख्यमंत्री के लिए सचिन पायलट का दावा मजबूत होगा।

दूसरी तरफ 90 से लेकर 100 सीट तक कांग्रेस पार्टी जीती है, तो अशोक गहलोत अपनी सियासी जादूगरी से सरकार बनाने में कामयाब हो सकते हैं। शायद गहलोत खुद भी यही चाहते हैं!