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जज्बा ही दिलाता है सफलता, राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह का यह मंत्र आज के युवाओं के लिए है। नौजवानों से कल्याण सिंह सदैव यही कहते हैं कि अच्छा काम करो, अच्छी संगति में रहो, खूब मेहनत करो और अपने अंदर किसी भी काम को पूरा करने के लिए जज्बा पैदा करो।

यदि जज्बा है तो जीवन में अवष्य सफलता मिलेगी। सफलता प्राप्त करने के लिए आत्मविश्वास जरूरी है। आत्मविष्वास अति नही होना चाहिए। लगन होनी चाहिए, जो हमारी मंजिल तक हमें पहुंचा सके। काम को करने के लिए मन में आग लग जानी चाहिए।
राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह सादगी वाले व्यक्ति हैं। वे सिद्धांतों पर चलते हैं।

उन्होंने अपने जीवन में सिद्धांत बना रखे हैं। आज जीवन के 87 बसंत देखने के उपरांत भी उन्होंने कभी अपने सिद्धांतों से टकराव नहीं किया। उनके सिद्धांतों के अनुरूप उन्हें जो मिला, सिर्फ उसको लिया। दिन भर मेहनत करने वाले कल्याण सिंह आज भी 87 वर्ष की उम्र में 14 घंटे काम में ही मशगूल रहते हैं।

वे रोज प्रातः चार बजे अपना बिस्तर छोड़ देते हैं। दिन में लगभग चार घंटे अध्ययन करते हैं। लोगों से मिलते हैं और शासन व राजभवन की फाइलों का निस्तारण करते हैं। राजभवन के सबसे छोटे कमरे में रहने वाले कल्याण सिंह का दोपहर में एक गिलास छाछ ही उनका भोजन होता हैं।

राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह 5 जनवरी को 87 वर्ष के हो जायेंगे। कल्याण सिंह एक अनुभवी व कद्दावर राजनीतिज्ञ हैं। उत्तर प्रदेश में उन्होंने अपनी प्रशासनिक क्षमता का जबरदस्त परिचय दिया था। उनके मुख्यमंत्री काल की आज भी मिशाल दी जाती है।

वे जमीनी स्तर से जुड़ाव रखने वाले व्यक्ति हैं। उनका आम नागरिक से नजदीकी जुड़ाव है। उत्तर प्रदेश के गांव-गांव का व्यक्ति उनको अपना समझता है। उत्तर प्रदेश के विभिन्न स्थानों से कल्याण सिंह से मिलने रोज सैकड़ों की संख्या में लोग जयपुर आते हैं।

वे अपना दर्द सुनाते हैं। यथासंभव मदद की चाहत भी रखते हैं। कल्याण सिंह हर आने वाले व्यक्ति की पूरी बात तल्लीनता से सुनते हैं। उनको हिम्मत देते हैं और यथासंभव मदद भी करते हैं।

सिंह ऐसे राज्यपाल हैं जिनसे मिलने के लिए आम आदमी को पहले से कोई समय लेने की जरूरत नहीं होती है। सिंह प्रतिदिन अपने कार्यालय में बैठते हैं और जो भी व्यक्ति प्रातः 11 बजे तक राजभवन आ जाता है, उनसे वे सहज रूप से मिल लेते हैं। जरूरतमंदों की मदद करते हैं। किसी को आर्थिक रूप से सहायता की जरूरत होती है, तो उसे आर्थिक मदद भी देते हैं।

स्वामी विवेकानन्द की प्रतिमा, हर समय लहराता राष्ट्रीय ध्वज, कुलगाीत और अनुसंधान पीठों की स्थापना से विश्वविद्यालयों में राष्ट्र प्रेम और देश भक्ति का नया माहौल बना है।

विश्वविद्यालयों के इतिहास, उद्वेश्यों, विशेषताओं और राज्य की शौर्य गाथा पर आधारित कुलगीतों से परिसरो में गौरव गान हो रहा है। दीक्षांत समारोहों में भारतीय पोशाक में पदक और उपाधि ले रहे छात्र-छात्राओं के दमकते चेहरों पर उल्लास देखते ही बनता है।

छात्र-छात्राओं को गांवों से जोड़कर मानव सेवा का पाठ भी पढ़ाया जा रहा है। राज्यपाल कल्याण सिंह की पैनी नजर से विश्वविद्यालयों की कार्य प्रणाली में पारदर्षिता और गुणवत्ता दिखाई दे रही है। देश के दूसरे राज्यों में भी राजस्थान की उच्च शिक्षा में किये गये नवाचारों को अपनाया जा रहा है।

अभी हाल ही में जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने जयपुर आकर राज्यपाल कल्याण सिंह से उच्च शिक्षा में किये गए नवाचारों की जानकारी ली।

कुलाधिपति कल्याण सिंह की परिकल्पना और निरन्तर माइक्रो समीक्षा से विश्वविद्यालयों की कार्य संस्कृति में परिवर्तन दिखाई दे रहा है। कल्याण सिंह ने 4 सितम्बर, 2014 को राजस्थान के राज्यपाल पद की शपथ ली थी।

कल्याण सिंह ने उच्च शिक्षा में आमूलचूल परिवर्तन कर क्रांतिकारी बदलाव ला दिये हैं। इन परिवर्तनों के सकारात्मक परिणाम राज्य की उच्च शिक्षा में अब दिखाई देने लगे हैं। महापुरूषों, स्थानीय लोक देवताओं पर शोध पीठों के गठन से अनुसंधान में गुणवत्ता लाने के विशेष प्रयास विश्वविद्यालयों में अब फलीभूत हो रहे है।

वंचितों और असहायों के सहयोग के लिए स्वयं कुलाधिपति कल्याण सिंह मजबूती के साथ खडे़ हुए हैं। किसी भी विद्यार्थी का भविष्य अंधेरे में न रहे बल्कि उसके जीवन को नई रोशनी मिले, इसके लिए गम्भीरता से प्रयास हो रहे हैं। विश्वविद्यालयों में शिक्षा के वातावरण में बदलाव दिखाई दे रहा है।

शैक्षणिक माहौल बनाने और विभिन्न शैक्षणिक एवं इतर शैक्षणिक व्यवस्थाओं के सुचारू संचालन के लिए राज्यपाल सिंह ने प को केन्द्र बिन्दु निर्धारित करते हुए आठ सूत्रीय कार्ययोजना बनाई। आठ सूूत्रीय बीजमन्त्र से कुलपति अपने-अपने विष्वविद्यालयों में पकड मजबूत कर सकते हैं।

सिंह का मानना है कि नवा ‘प‘ कुलपतियों के जिम्मे है और वे इसे किस प्रकार अपने अपने परिसरों में लागू करते है, यह उनकी इच्छाशक्ति और कार्यशैली को दर्शायेगी।

कुलाधिपति सिंह द्वारा तैयार की गई इस कार्य योजना में 1. प्रवेश 2. पढ़ाई 3. परिसर 4. परीक्षा 5. परीक्षण 6. परिणाम 7. पुनर्मूल्यांकन और 8. पदक जैसी विश्वविद्यालयों की समस्त गतिविधियों को इन बिन्दुओं में समाहित किया गया है। प्रत्येक गतिविधि की समीक्षा एवं समाधान का पैना मार्गदर्शन इस योजना में है।

प्राइमरी से उच्चतम शिक्षा तक सुधार की ओर निरन्तर प्रयास करते रहना चाहिए। नकल नही करनी चाहिए। नकल से अकल का विकास नहीं होता है।

जोधपुर के जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय से सम्बद्व एक निजी काॅलेज में हो रही परीक्षा में नकल का मामला राज्यपाल व कुलाधिपति कल्याण सिंह के संज्ञान में आया।

राज्यपाल सिंह ने बायतु (बाड़मेर) स्थिति महादेव काॅलेज में हो रही नकल के मामले की विश्वविद्यालय के कुलपति से शीघ्र तथ्यात्मक रिपोर्ट मांग कर एक ही दिन में काॅलेज के विरूद्व सख्त कार्यवाही करवा कर राज्य में चलने वाली नकल पर नकेल लगा दी।

कल्याण सिंह दीक्षांत समारोह के दूसरे दिन विश्वविद्यालयों द्वारा गोद लिये गये गांव और ढाणियों में जाकर ग्रामीणों से बात करते हैं। उनकी समस्याए सुनते हैं और समस्याओं का निराकरण भी करते हैं।

कुलाधिपति सिंह कहते है कि ‘मैंने अपने हाथों से खेती-बाडी की है। गांव की समस्या और किसानों की पीड़ा से मैं अच्छी तरह वाफिक हूँ। इसलिए गांवों को गोद लेकर वहां विकास कार्य करने के लिए मैंने विष्वविद्यालयों से कहा है।‘

गांवों में राज्यपाल के दौरो से ग्रामीण महिला पुरूष संतुष्ट नजर आते है। मौके पर प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी से काम हो जाते है।

सिंह ने गांव को स्मार्ट बनाने के लिए ग्रामवासियों को पांच सूत्री विकास का फार्मूला दिया। गांव को नशा मुक्त, जुआ मुक्त, मुकदमा मुक्त, गंदगी मुक्त और निरक्षरता मुक्त बनाना है। इन कार्यो के लिए गांव के प्रत्येक व्यक्ति को सक्रिय भागीदारी निभानी होगी। इससे गांव में परिवर्तन आयेगा। गांव के सभी घर खुषहाल हो सकेंगे।

गांव के विकास के दस सूत्र कुलाधिपति कल्याण सिंह ने बताए हैं। सड़क, स्वास्थ्य, सिंचाई, शिक्षा, शक्ति(बिजली), सुरक्षा व स्वरोजगार से स्वालंबन पनपेगा तथा बेटियों को उच्च शिक्षा तक पढाने, सद्भाव के वातावरण व घरों में शौचालय बनाने से समाज निरन्तर आगे बढेगा।

राज्यपाल कल्याण सिंह ने युवाओं को तीन सीख देती हैं। जीवन में कभी निराश एवं हताश नहीं हों। जीवन का लक्ष्य तय करें। गुरूजन, माता-पिता, समाज, देश का योगदान कभी नहीं भूलें।

राज्यपाल कल्याण सिंह ने ‘कोमल कोठारी लोक कला लाइफ टाईम एचीवमेन्ट अवार्ड‘ की शुरूआत की है। लोक कलाओं के संरक्षण, संवर्धन व परिवर्धन को बढ़ावा देने एवं उत्तरजीविता को बनाये रखने में अतुल्य योगदान करने वाले एक व्यक्ति को यह पुरस्कार प्रतिवर्ष 21 दिसम्बर को पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, उदयपुर द्वारा वर्ष 2016 से नियमित दिया जा रहा है।

राज्यपाल कल्याण सिंह का कहना है कि ‘राजस्थान के लोग बड़े ही भोले, सज्जन व सौम्य हैं। उनके स्वभाव में छल-कपट नहीं है। प्राचीन रस्मोरिवाज, परम्पराएं, पहनावे आदि सर्वत्र दिखाई देते हैं। राजस्थानी लोकगीत तो आत्मा को छू लेते हैं। यहां का हर नगर, हर गांव अलग-अलग विशेषताओं वाला है।’

नोट—राज्यपाल कल्याण सिंह के जन्म दिवस के एक दिन पूर्व उनके कार्यालय से जारी आलेख।