New delhi

जब-जब कोई राजनेता बड़ा मुकाम हासिल करता है तो उसके बारे में जनता को और ज्यादा जानने की उत्सुकता होती है।

यही उत्सुकता इस वक्त गृहमंत्री अमित शाह को लेकर है, जिन्होंने दशकों से धारा 370 नामक बेड़ियों में जकड़े जम्मू कश्मीर को आजाद करने में सफलता हासिल की है।

अमित शाह की पहचान वैसे तो तब हुई, जब उनके करीबी रहे आईपीएस डीजी वंजारा ने उनके ऊपर फर्जी एनकाउंटर का आरोप लगाया।

लेकिन करीब 10 साल बाद सीबीआई की विशेष अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य नहीं होने के कारण तमाम विरोधी लोगों की सह पर गोपीनाथ पिल्लई द्वारा दायर की गई याचिका को खारिज करते हुए अमित शाह को बाइज्जत बरी कर दिया।

2003 से 2010 तक गुजरात सरकार में गृह मंत्री रहे अमित शाह नरेंद्र मोदी से तब जुड़े, जब वह 1983 के दौरान कॉलेज में पढ़ते थे।

उसी दौरान नरेंद्र मोदी के कहने पर उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की सदस्यता प्राप्त की। हालांकि, उनका जुड़ाव काफी हद तक आरएसएस के साथ पहले से ही था किंतु व्यापारिक परिवार से आने के कारण काफी सारी दिक्कतें थी, जो नरेंद्र मोदी के संपर्क में आने के साथ खत्म होती चली गई।

1997, 1998, 2002, 2007 और 2012 में अमित शाह गुजरात के सरखेज विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे। इसके बाद उनको 19 अगस्त 2017 में राज्यसभा में भेजा गया।

2019 के लोकसभा चुनाव में गांधीनगर की लोकसभा सीट से जीतकर अमित शाह ने इतिहास रचा। इससे पहले उन्होंने गांधीनगर सीट पर पूर्व गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के लिए चुनाव प्रचार का जिम्मा संभाला था।

आज की तारीख की बात की जाए तो देश में सबसे पावरफुल व्यक्ति के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तवज्जो दी जाता है, लेकिन मई में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव के बाद दूसरी बार प्रधानमंत्री बने नरेंद्र मोदी ने अमित शाह को गृह मंत्री बनाने के बाद संभवत खुद को पिछली पंक्ति में रख लिया है।

यही कारण है कि हर बार मीडिया की सुर्खियों में रहने वाले मोदी के बजाय इस बार गृह मंत्री अमित शाह ज्यादा चर्चित हैं, खासतौर से जम्मू कश्मीर को लेकर उनका रुख स्पष्ट है।

जिसके चलते खुद नरेंद्र मोदी न केवल संसद में, बल्कि संसद से बाहर भी सुर्खियों और सियासत के एक तरह से अमित शाह की पीछे खड़े दिखाई दे रहे हैं।

भारतीय जनता पार्टी की परंपरा के मुताबिक हमेशा दूसरी पंक्ति के राजनेता को भविष्य के लिए तैयार किया जाता है, किंतु अभी उम्र के लिहाज से भी नरेंद्र मोदी उस स्थिति में नहीं पहुंचे हैं कि राजनीति से संयास ले और अपनी विरासत गृह मंत्री अमित शाह को सौंप जाएं।

किंतु जिस तरह से 1983 से लेकर अब तक नरेंद्र मोदी और अमित शाह की अटूट जोड़ी रही है, उससे स्पष्ट है कि निकट भविष्य में नरेंद्र मोदी भले ही पीछे रहें, किंतु सारी सत्ता और पावर उन्हीं के इर्द-गिर्द घूमती रहेगी।

जिस तरह से दूसरे कार्यकाल में पीएम मोदी ने अपने करीबी हमेशा को आगे किया है, उसे स्पष्ट है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में अमित शाह की बेहद अहम भूमिका होने वाली है।

फिलहाल गृह मंत्री के रूप में सफलतापूर्वक अपने करियर को पंख लगाते हुए अमित शाह ने 69 साल से जारी कश्मीर की समस्या का समाधान करके खुद को साबित कर दिया है।

आज दुनियाभर में नरेंद्र मोदी सरकार की वाहवाही हो रही है तो उसके पीछे असल कारण गृह मंत्री अमित शाह ही हैं। इससे पहले अमित शाह भारतीय जनता पार्टी के 12 जून 2013 को उत्तर प्रदेश प्रभारी बनाए गए, तब उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की केवल 10 सीट हुआ करती थी।

अमित शाह के संगठनात्मक कौशल और उनके बेहद प्रभावशाली नेतृत्व के कारण 16 मई 2014 को संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश से 71 सीट पर जीत हासिल की।

इस बड़ी जीत के बाद न केवल भारतीय जनता पार्टी ने 282 सीटों पर जीत दर्ज कर पहली बार पूर्ण बहुमत हासिल किया, बल्कि करिश्माई शिल्पकार अमित शाह का कद भी पार्टी में बेहद बढ़ गया।

उसके तुरंत बाद अमित शाह को भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया गया। हमेशा से नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी नए केवल पार्टी के भीतर, बल्कि देश दुनिया में भी चर्चित रही है।

2002 के गोधरा के बाद दंगे होने और उसके बाद केंद्र में तत्कालीन यूपीए सरकार द्वारा नरेंद्र मोदी को अमेरिका का वीजा नहीं देने की अपील करने के बाद भी अमित शाह और नरेंद्र मोदी हमेशा दो शरीर एक जान की तरह रहे।

एक-दूसरे के विकल्प रहने वाली यह जोड़ी भारतीय राजनीतिक इतिहास की सबसे सफल जोड़ी बन गई है। तमाम कयासों को दरकिनार करने वाली इस जोड़ी ने साबित कर दिया है कि फिलहाल उनके करीब कोई नज़र नहीं आ रहा है।

अब एक बात बिल्कुल स्पष्ट है कि नरेंद्र मोदी के सामने अमित शाह कभी खुद को बड़ा साबित करने का प्रयास करते हुए नहीं दिखते हैं। जब भी एक दूसरे से मिलते हैं, तो एक तरह से गुरु और शिष्य के रूप में पेश आते हैं।

जहां पर हमेशा नरेंद्र मोदी की अगवानी करते हैं एक ही रूप, एक ही तरीका और एक ही प्रकार से वह बरसों से इस परंपरा को निभा रहे हैं।

अब, जबकि जम्मू कश्मीर की समस्या का समाधान हो चुका है, और इसके पीछे गृहमंत्री अमित शाह का सबसे बड़ा योगदान है और इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुर्खियों से दूर हैंज़ तब लोगों के जेहन में यही सवाल उठ रहा है कि क्या नरेंद्र मोदी खुद पीछे हटकर आपने सबसे वफादार शागिर्द को भविष्य के लिए तैयार कर रहे हैं?

बीते 36 साल से वफादारी के मामले में भारत में ऐसा कोई भी राजनेता नहीं है जो इस जोड़ी का मुकाबला कर पाए। खुद आगे बढ़ने की बजाय, दोनों ने हमेशा एक दूसरे को आगे बढ़ाने का काम किया है।

यह प्रश्न अधिकांश देशवासियों के जेहन में है, किंतु भविष्य के गर्भ में क्या छुपा है इसको लेकर अभी कुछ कहा नहीं जा सकता।

कहा जाता है कि गृह मंत्री अमित शाह ने चाणक्य बनकर हमेशा चंद्रगुप्त के तौर पर नरेंद्र मोदी को राजनीति का योद्धा तैयार किया है।

बहरहाल 22 अक्टूबर 1964 को जन्मे अमित शाह पूरी तरह से अपनी नजर जम्मू कश्मीर के भविष्य को लेकर गढ़ा चुके हैं। देखना और भी दिलचस्प होगा कि हमेशा कामयाबी हासिल करने वाले हमेशा इस बार जम्मू कश्मीर को किस तरह कामयाब कर पाते हैं।