Narendra modi lalkrishna adwani amit shah
Narendra modi lalkrishna adwani amit shah

नई दिल्ली।

“…..समय बड़ा बलवान एक समय का दिन बड़ा है एक समय की रात….।” यह गाना सटीक बैठता है आज बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और भाजपा को खड़ा करने में अहम भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के संदर्भ में।

साल 1991 जब लालकृष्ण आडवाणी गुजरात के गांधीनगर लोकसभा सीट से उम्मीदवार थे और अपना पर्चा दाखिल कर रहे थे, तब की वह तस्वीर सामने आई है, जो काफी कुछ कह रही है।

जब उनके बराबर बैठे हैं वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आडवाणी के पीछे खड़े हैं बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह। आज 28 साल बाद इसी गांधीनगर सीट से लालकृष्ण आडवाणी का टिकट काटकर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को दिया गया है।

कहना बिल्कुल भी अतिशयोक्ति नहीं होगा, कि 28 साल पहले जो व्यक्ति लालकृष्ण आडवाणी के बराबर बैठने के भी काबिल नहीं था, वह अपनी कड़ी मेहनत, काम करने के जुनून और भाग्य के सहारे उन्हीं वरिष्ठ नेता की सीट पर चुनाव लड़ने जा रहा है।

हालांकि ऐसे कुछ उदाहरण इतिहास में देखे जा सकते हैं, लेकिन संभवतः भारतीय जनता पार्टी में इस तरह का यह पहला उदाहरण है, जब पार्टी के संस्थापक की सीट पर वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव लड़ने जा रहे हैं।

आपको बता दें कि लालकृष्ण आडवाणी की उम्र अधिक होने के कारण उन्होंने पहले ही लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने की इच्छा जाहिर कर दी थी। हालांकि साफ नहीं है कि उनको राज्यसभा भेजना है या दूसरी सीट से उतरना है।

2014 में सत्ता हासिल करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 75 साल से ऊपर के किसी भी व्यक्ति को टिकट नहीं देने की घोषणा की थी।

आडवाणी 90 साल से ऊपर हो चुके हैं। कहा जा रहा है कि इस बात को भांपते हुए संभवतः उन्होंने पहले ही लोकसभा चुनाव मैदान में नहीं उतरने की अपनी इच्छा से पार्टी को अवगत करवा दिया था।