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राजकीय संग्रहालय और आमेर महल अधीक्षक ने सूचना दी है कि 21 मार्च को धुलंडी के अवसर पर आमेर महल पर्यटकों के लिए दोपहर 2:30 बजे से लेकर शाम को 5:30 बजे तक खुला रहेगा।

आमतौर पर आमेर महल हमेशा खुला रहता है, जिसके चलते पर्यटकों की खूब आवाजाही रहती है। यहां रोजाना देश और विदेश से हज़ारों पर्यटक आते हैं।

होली के अगले दिन धुलंडी के अवसर पर लोगों के द्वारा एक दूसरे को रंग लगाने और गुलाल से धुलंडी खेलने के कारण महल में प्रवेश केवल 3 घंटे तक रखा गया है।

आपको बता दें कि आमेर महल को आमेर दुर्ग के नाम से भी जाना जाता है। राजस्थान की राजधानी जयपुर के आमेर क्षेत्र में ऊंची पहाड़ी के ऊपर यह महल स्थित है, जिसको देश दुनिया के पर्यटक देखने के लिए आते हैं।

कच्छावा शासक राजपूत मानसिंह प्रथम ने इस दुर्ग का निर्माण करवाया था। महल की कलाकृति विशुद्ध रूप से हिंदू वास्तु शैली के घटकों के लिए जाना जाता है।

लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर से निर्मित यह भव्य आकर्षण और भव्यता का केंद्र है। यह दुर्ग पहाड़ी के चारों स्तरों पर बना हुआ है।

इसमें दीवाने आम, जिसको जनसाधारण का प्रांगण और दीवाने खास, यानी विशिष्ट प्रांगण समेत शीश महल और जय मंदिर के अलावा सुख निवास जैसे भाग हैं।

आमेर महल और जयगढ़ दुर्ग अरावली पर्वतमाला की एक पहाड़ के ऊपर स्थित हैं। एक गुप्त सुरंग के द्वारा पहाड़ी से होते हुए इन को जोड़ा गया है।

साल 2013 में आयोजित विश्व धरोहर समिति के 36 में सत्र में प्रदेश के पांच दूसरे दुर्गा समेत आमेर दुर्ग को भी राजस्थान के पर्वतीय दुर्गों के भाग के रूप में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था।