जयपुर।
पुलिस चाहे तो क्या नहीं कर सकती, लेकिन पुलिस की लेट—लतीफी हमेशा ही लोगों के लिए नुकसानदेह साबित हुई है। पुलिस की ऐसे ही लापरवाही करने के चलते ‘बुलेटिन टुडे’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आलोक शर्मा की जान चली गई।

पुलिस विभाग के लोगों का कहना है पुलिस को सूचना मिलने के बाद महज 15 मिनट के भीतर किसी भी व्यक्ति की लोकेशन ट्रेश की जा सकती है, बशर्ते उसका मोबाइन चालू होना चाहिए।

पुलिस के मुताबिक आलोक शर्मा का जब शव बरामद किया गया, तब उनका मोबाइल फोन चालू स्थिति में था और उसमें 360 से ज्यादा मिसकॉल आए हुए थे।

किंतु अशोक नगर थाना पुलिस को सूचना देने के 12 घंटे बाद भी आलोक शर्मा की लोकेशन ट्रेश करने का काम नहीं किया गया, नतीजा यह निकला कि रात को 11.30 बजे परिवाद देने के बाद दूसरे दिन होटल वालों के कहने पर ही पुलिस जागी।

तब तक आलोक शर्मा ने सुसाइड कर लिया था। यदि पुलिस ने थोड़ी सी भी मुस्तैदी दिखाई होती आलोक शर्मा को बचाया जा सकता था।

बता दें कि आलोक शर्मा के घर नहीं पहुंचने पर शुक्रवार रात को 11.30 बजे उनके पिता ने अशोक नगर थाने में गुमशुदगी के लिए परिवाद दिया था, किंतु पुलिस ने उसको हलके में लिया और आगे कोई कार्रवाई नहीं की।

परिणाम यह निकाल कि दूसरे दिन सुबह करीब 11 बजे सी स्कीम स्थित होटल शकुन में आलोक शर्मा को शव मिला। वह भी होटल कर्मियों पुलिस को इत्तला कर बताया तब राज खुला।

अब सवाल यह उठता है कि पुलिस गुमशुदमी के मामलों में इतनी लापरवाही क्यों बरतती है, जबकि किसी को अपरहण कर हत्या भी की जा सकती है?